
जिला अस्पताल में दिखाई दिया टीम वर्क
आगर मालवा. यदि सरकारी अस्पताल के चिकित्सक पूर्ण मनोस्थिति के साथ किसी काम में परस्पर समन्वय स्थापित कर जुट जाए तो विपरित हालातों में भी जटिल से जटिल उपचार व ऑपरेशन कर सकते है। कुछ इसी का कार्य मंगलवार को जिला अस्पताल में पदस्थ चिकित्सको ने कर दिखाया। प्रसव पूर्व अत्यधिक रक्त स्त्राव की वजह से जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रही एक मूकबधिर महिला का 12 डॉक्टरो की टीम ने एपीएस एलएससीएस एवं हिस्टोरेक्टोमी का सफल ऑपरेशन कर दिया।
सुबह 11:30 बजे रोजमर्रा की भांति सभी चिकित्सक अपने-अपने कक्ष में ओपीडी में मरीजों को देख रहे थे इसी बीच कानड़ अस्पताल से रेफर होकर आई प्रसूता ने पूरे अस्पताल में खलबली मचा दी। भूरी बाई नामक एक मूकबधिर महिला को प्रसव पूर्व अत्यधिक रक्त स्त्राव हो रहा था। वहां मौजूद महिला रोग विशेषज्ञ डॉ बृजभूषण पाटीदार ने जैसे ही महिला को देखा तो तेज गति के साथ महिला के शरीर से खून बह रहा था और खून की मात्रा महज 4 ग्राम रह गई थी। बच्चा गर्भ में ही मृत हो चुका था और महिला को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। ऐसी दशा में डॉ पाटीदार ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तत्काल आरएमओ डॉ शशांक सक्सेना को अवगत कराया। डॉ सक्सेना सुबह 11:40 पर सिविल सर्जन डॉ एसके पालीवाल के पास पहुंचे और महिला को बचाने का प्रयास आरंभ किया। डॉ पालीवाल ने तत्काल सभी चिकित्सको को प्रसूति वार्ड में बुलाया और पूरी एक टीम तैयार कर दोपहर 12 बजे ऑपरेशन आरंभ कर दिया। ऑपरेशन इतना जटिल था कि उसमें एक सर्जन एवं एक वरिष्ठ महिला चिकित्सक की आवश्यकता थी। निजी क्षेत्र में कार्य करने वाले सर्जन डॉ ईश्वर तथा महिला रोग विशेषज्ञ डॉ अर्पणा सक्सेना को सूचना दी गई तो दोनों ही चिकित्सक नि:स्वार्थ भावना से ओटी में मोर्चा संभाल लिया।
करीब ढाई घंटे तक चला ऑपरेशन
सिविल सर्जन डॉ पालीवाल तथा आरएमओ डॉ शशांक सक्सेना के निर्देशन में डॉक्टरों की टीम पूरे मनोयोग के साथ महिला को बचाने में जुट गई। चिश्चेतना विशेषज्ञ डॉ जितेन्द्र केथवाल, डॉ पंकज बघेल ने निश्चेतना का कार्य संभाला वहीं महिला रोग विशेषज्ञ डॉ बृजभूषण पाटीदार, डॉ ईश्वर, डॉ अर्पणा सक्सेना सर्जरी में जुट गए और इन वरिष्ठ चिकित्सकों का डॉ खुशबू सोनी, डॉ गुलनाज राणा, डॉ सुनीता कबीर सागरिया, डॉ प्रियंका परमार ने सहयोग किया। दोपहर 12 बजे से 2:30 बजे तक यह ऑपरेशन सतत् जारी रहा। इस अवधि में कोई भी चिकित्सक पानी पीने भी नहीं रुका।
5 यूनिट रक्त भी हाथोहाथ चढ़ाया
महिला का रक्त स्त्राव इतना अधिक हो चुका था कि उसे बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य दिखाई दे रहा था। चिकित्सकों ने जैसे ही मृत बच्चे को बाहर निकाला तो स्थिति ओर अधिक विकट हो गई। आनन-फानन में बढ़ा ऑपरेशन करते हुए बच्चा दानी निकालकर महिला की जान बचाई गई। इतना अधिक रक्त बहने से महिला को अतिरिक्त रक्त की भी आवश्यकता पडऩे लगी। ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ मनीष पंथ ने मोर्चा संभाला और आगर में पहली बार तत्काल 5 यूनिट रक्त डोनर से लेते हुए उसे तैयार कर एक घंटे मे ही उपलब्ध करा दिया। रक्तदाता भेजने का कार्य समाज सेवक मुकेश पाटीदार ने किया। जैसे ही पाटीदार को बताया गया कि ए-पॉजीटिव रक्त चाहिए तो पाटीदार ने एक के बाद एक रक्तदाताओं को जिला अस्पताल पहुंचाना आरंभ किया।
ब्लड बैंक का लायसेंस मिलते ही महिला की बची जान
आगर में ब्लड बैंक की शुरुआत करने का लायसेंस १४ फरवरी को ही जिला अस्पताल को मिला था और १५ फरवरी को ही जटिल ऑपरेशन सामने आ गया। यदि यहां ब्लड बैंक की व्यवस्था न होती तो शायद चिकित्सक इतना बड़ा कदम उठाने में हिचकिचाते पर ब्लड बैंक होने से सबसे बड़ी समस्या का अपने आप ही समाधान हो गया और पहली बार इधर ब्लड डोनेशन चलता रहा और उधर ब्लड मरीज को चढ़ता रहा।
अगस्त के बाद फरवरी में हुआ ऑपरेशन
जिला अस्पताल के प्रसुति वार्ड में अगस्त 2021 के बाद फरवरी 2022 माह में ऑपरेशन की शुरुआत हुई है। यहां महिला रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद संबंधितों द्वारा सामान्य प्रसूता महिलाओ को भी जटिल अवस्था में बताकर रेफर कर दिया जाता था और जिला अस्पताल में ऑपरेशन करने से परहेज किया जा रहा था। परेशान महिलाओं का ऑपरेशन शहर के ही निजी अस्पतालो में हो रहे थे और वहां उन्हे काफी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा था पर मंगलवार को जिला अस्पताल के चिकित्सको ने यह बता दिया कि यहां किसी के बिना कोई कार्य नहीं रूकता है। यदि टीम भावना हो तो चुनौतियां से पार पाया जा सका है।
बना रहे चिकित्सकों में यह समन्वय....
मंगलवार को जिस तरह जिला अस्पताल के चिकित्सको ने एक मूकबधिर महिला की जान बचाने के लिए एकजुट होकर समन्वय स्थापित किया भगवान करे यह समन्वय हमेशा बना रहे। सरकार द्वारा जिला अस्पताल में तमाम संसाधन उपलब्ध करा रखे हैं, पर चिकित्सकों में समन्वय न होने की वजह से मजबूरन मरीजों को अन्यत्र जाना पड़ता था। बेहद गरीब महिला की स्थिति ऐसी थी कि कुछ पल के लिए चिकित्सक अपने तमाम कामकाज भूल गए थे। उनके सामने बस महिला को बचाना ही एक मात्र लक्ष्य था। महिला का पति भी अपंग था और न तो उसके पास पैसे थे और न ही महिला को बचाने का समय था। यदि १५ मिनट देरी हो जाती तो महिला जिंदगी की जंग हार जाती। कहा जाता है कि डॉक्टर के रूप में भगवान को देखा जाता है यह कहावत आज जिला अस्पताल के डॉक्टरों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के चिकित्सकों ने सिद्ध भी कर दी है। मूकबधिर महिला की स्थिति ऐसी थी कि वह अपनी पीड़ा बयां भी नही कर पा रही थी और न कुछ समझा पा रही थी। यह उसका पांचवा प्रसव था। बच्चा गर्भ मे ही दम तोड़ चुका था, सर्जरी कर बच्चे को बाहर निकाला तो प्रसव पूर्व अत्यधिक रक्त स्त्राव आरंभ हो गया। किसी पानी के नल की तरह महिला के शरीर से खून बाहर बहने लगा। यदि आगर से महिला को अन्यत्र रेफर भी किया जाता तो कुछ ही पल में महिला की मौत हो जाती। महिला का हिमोग्लोबीन 4 से 5 ग्राम ही रह गया था। ऐसी दशा में भी डॉक्टरो ने इस चुनौती को स्वीकार भी किया।
मेरे सभी चिकित्सक साथियों ने आज अभूतपूर्व टीम वर्क का प्रदर्शन किया है साथ ही निजी क्षेत्र से मानवता के नाते आए चिकित्सको ने भी अपना कर्तव्य निभाया सभी के परस्पर सहयोग से एक मुकबधिर गरीब महिला को समुचित उपचार समय पर मिल गया जिससे उसकी जान बची है बेहद जटिल ऑपरेशन था ऑपरेशन में जुटे सभी चिकित्सको ने ढाई घंटे तक पानी तक नही पिया हम सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते है।
एसके पालीवाल, सीएस जिला अस्पताल आगर
आर्थिक रूप से बेहद कमजोर मूक बधिर महिला का एपीएस एलएससीएस एवं हिस्टोरेक्टोमी का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सकों ने मानवता का परिचय दिया है इस तरह का जटिल ऑपरेशन होना आगर के लिए बड़ी उपलब्धि है जिला अस्पताल के सभी डॉक्टर बधाई के पात्र है। चिकित्सकों में जो समन्वय देखा गया है हम उम्मीद करते हैं इस तरह का समन्वय हमेशा बना रहे जिला अस्पताल में सिटी स्कैन, सेंट्रल लेब के साथ साथ पर्याप्त अनुभवी चिकित्सक तथा अत्याधुनिक संसाधन मौजूद है अब ब्लड बैंक भी शुरू हो चुका है।
अवधेश शर्मा, कलेक्टर आगर
Published on:
15 Feb 2022 11:58 pm
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