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उज्जैन. चार्टर्ड अकाउंटेंट ( Chartered Accountant foundation Day ), एक ऐसा पेशा, जो किसी भी देश की वित्तीय ( Accounting ) स्थिति को दिशा देता है। असंशयी भरोसेवाला इनका कार्य, देश की सरकार और वहां की जनता ( government and the public ) के बीच वित्तीय हिसाब-किताब की नींव मजबूत करता है... अपनी बुद्धिमता, मेहनत और विश्वास के जरिए आज समाज में इन्होंने वह मुकाम हासिल किया है, जिसके बिना त्रुटिहीन हिसाब-किताब की कल्पना संभवनहीं है। सोमवार 1 जुलाई को सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) स्थापना दिवस है।
देश-समाज में सीए के महत्व को दर्शाता है
यह दिन देश-समाज में सीए के महत्व को दर्शाता है। उज्जैन ने भी इस क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ाई है। कुछ वर्षों पहले तक जहां शहर में 40-50 सीए थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 300 से ज्यादा हो गई है। सीए क्षेत्र में शहर की बढ़ती पहुंच के कारण ही कुछ वर्ष पूर्व यहां चार्टर्ड अकाउंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की शाखा प्रारंभ हो गई हैं। इसके अंतर्गत उज्जैन सहित देवास व आसपास का क्षेत्र आता है। वर्तमान में उज्जैन ब्रांच में 425 से अधिक सीए पंजीकृत हैं। शहर में एेसे कई सीए हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से न सिर्फ इस पेशे का भरोसा और बढ़ाया बल्कि अपनी अलग पहचान भी कायम की है। किसी की तीन पीढ़ी इस कार्य में लगी तो कोई अपने शहर के लिए मेट्रो सिटी छोड़कर आया। सीए स्थापना दिवस पर विशेष रिपोर्ट-
मुंबई छोड़ा, लौटे अपने शहर
बचपन से ही स्पोट्र्स व अन्य गतिविधियों में अव्वल रहे सीए डॉ. अनुभव प्रधान ने कॉमर्स से मेरिड में स्नातक होने के बाद कॉमर्स क्षेत्र की सबसे बड़ी डिग्री हासिल करने का लक्ष्य तय किया था। उन्होंने सीए बनने का निर्णय लिया और पिता डॉ. हरिश प्रधान के मित्र कर सलाहकार ओपी अग्रवाल ने मुंबई आरवीजी होस्टल में भर्ती होने की सलाह दी। जहां देशभर से गिनती के विद्यार्थियों का चयन होता है, अनुभव ने अपनी मेहतन से आरवीजी में जगह बनाई। वर्ष २००२ में सीए बनने के बाद वे मेट्रो सिटी मुंबई की चमक और जल्द तरक्की की संभावना को छोड़ अपने ही शहर में सेवा देने का निर्णय लेकर उज्जैन लौट गए। जब वे उज्जैन आए तक ४०-५० सीए ही थे। अनुभव ने अपने ही शहर में सेवा देकर मेहनत के बूते चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपनी नई पहचान बनाई। अनुभव प्रधान एक एेसे सीए हैं, जिन्होंने सीए बनने के बाद भी विद्यार्थी की भूमिका नहीं छोड़ी। सीए रहते हुए उन्होंने एम. कॉम, एलएलबी, एलएलएम, एमबीए किया। इसके अलावा सहकारिता आंदोल के पित्रपुरुष कहे जाने वाले भारत सरकार के पूर्व वित्त राज्य मंत्री डॉ. सवैयसिंह सिसौदिया के मार्गदर्शन में सहकारिता में भी कदम रखा, बैंक के संचालक बने, साथ ही इस विषय में शोध कार्य कर डॉक्टरेड की डिग्री हासिल की। अनुभव कहते हैं, सीए किसी हिसाब-किताब का प्रमाणीकरण करते हैं जिस पर सरकार भरोसा करती है। उनके अनुसार वैसे तो सभी देश के अपने सीए इंस्टीट्यूट होते हैं लेकिन भारत के इंस्टीट्यूट की विश्वसनीयता पूरे विश्व में है।
जब कोई जानता नहीं था तब सीए बने, अगली पीढ़ी भी साथ
अमृतलाल एच. जैन का नाम शहर के सबसे वरिष्ठ सीए में शामिल है। शहर ही नहीं संभवत: वह संभाग के पहले सीए थे। वे तब सीए बने जब कोई इसके बारे में ठीक से जानता भी नहीं था। ९० वर्ष तक वे उन्होंने सीए का कार्य किया और ९२ वर्ष की उम्र में वर्ष २०१७ में उनका निधन हुआ लेकिन उन्होंने जो गौरवमयी पहचान बनाई, उससे प्रेरणा लेकर अगली पीढ़ी भी सीए को किसी पेशे की जगह गौरवमयी परंपरा के रूप में आगे बढ़ाने में शामिल हुई। उनके पुत्र व शहर के वरिष्ठ सीए अजय जैन बताते हैं, मूलरूप से अमृतलाल एच. जैन शाजापुर के रहने वाले थे और मुंबई से सीए की पढ़ाई कर १९५१ में उज्जैन आए। १९५७ में इंदौर में भी अपनी एक ब्रांच स्थापित की। उनके कार्य के कारण समाज में उन्हें काफी सम्मान मिला और इसी से प्रेरणा लेकर अजय जैन १९७५ में सीए बने। वर्ष २२०८ में अजय जैन के पुत्र अनुजय परिवार की तीसरी पीढ़ी के सीए बने। अजय कहते हैं, सीए की विश्वसनियता लगातार बढ़ती जा रही है। आयकर में तो सीए का प्रमाणिकरण जरूरी है ही, अन्य विभागों में भी महत्व बढ़ा है।
शादी के बाद सीए बनीं, प्रोफेशन में बंटा रही हांथ
शहर में कुछ चुनिंदा सीए दंपतियों में से एक नयापुरा निवासी संदीपसिंह व रीना कुशवाह भी हैं। संदीप वर्ष २००५ में सीए बने और इसी वर्ष उनकी व भोपाल निवासी निशा की शादी हुई। शादी से पहले निशा ने बीकॉम की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने इग्लिश लिट्रेचर में एमए किया। पति संदीप पहले से सीए हैं, इसलिए रीना ने भी इसी क्षेत्र में आगे बढऩे का निर्णय लिया। इस फैसले में संदीप ने उनकी हर तरह से मदद की। जब उनकी बेटी महज एक महीने की थी, तब निशा ने सीए की पढ़ाई के लिए फार्म भरा और हर परीक्षा में पहली बार में चयनित होती गईं। वर्ष २०१२ में वे भी पति की तरह सीए बन चुकी थीं। अब वे दोनों साथ ऑफिस जाते-आते हैं और मिलकर कार्य करते हैं। दोनों ने अपने कार्य भी बांट रखे हैं। निशा कुशवाह कहती हैं, पति-पत्नी के समान प्रोफेशन में होने का काफी लाभ मिलता है। पति के सहयोग से ही वे शादी के बाद सीए बन सकी हैं। परिवार में पहले सीए बने संदीपसिंह ने बताया, पिता कैलाशसिंह कुशवाहा कॉमर्स के लेक्चरार थे और उन्हीं की मार्गदर्शन ने उन्होंने यह फिल्ड चुनी। पत्नी के सीए बनने से उन्हें काफी मदद मिलती है।
महिला सीए बनी ब्रांच चेयरमैन
कामिनी त्रिवेदी वर्ष २००५ में सीए बनी थी। उन्होंने अपनी मेहनत और कार्यशैली से शहर में अलग पहचान बनाई। यही नहीं वे सीए उज्जैन ब्रांच की चेयरमैन भी हैं और अपने कार्य के साथ इस भूमिका को बखुबी निभा रही हैं। उन्होंने सीएस व सीए की पढ़ाई करने पूरी करने के बाद शादी की। शादी करने के बाद भी वे इस क्षेत्र से जुड़ी अन्य शिक्षा लेकर अपने आप को आगे बढ़ाती रहीं। कामिनी त्रिवेदी कहती हैं, सीए किसी भी देश की इकॉनोमी को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि बजट या अर्थव्यवस्था से संबंधित सरकार के निर्णयों में सीए इंस्ट्रीट्यूट का विशेष महत्व होता है। आयकर के साथ अन्य विभागों में भी सीए के प्रमाणिकरण का महत्व काफी बढ़ा है। जीएसटी के बाद इस क्षेत्र में संभावना और बढ़ गई है। उन्होंने बताया, उज्जैन ब्रांच में भी लगातार पंजीयनों की संख्या बढ़ रही है और सभी सदस्यों का भरपुर सहयोग मिलता है।
जीएसटी डे आज
सीए स्थापना दिवस के साथ ही सोमवार को जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) की दूसरी वर्षगांठ है। एक देश एक कर के उद्देश्य से लागू किए गए जीएसटी के अब अलग-अलग असर देखने को मिल रहे हैं। जानकार मानते हैं कि जीएसटी को लागू करने का उद्देश्य बेहतर है लेकिन अभी भी इसमें अपेक्षित स्थायित्व नहीं आ पाया है। हालांकि जीएसटी के बाद से इनकम टैक्स रिटर्न की संख्या बढ़ी है वहीं सरकार भी टैक्स पेयर बढऩे का दावा करती है।
Published on:
01 Jul 2019 11:43 am
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