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Breaking: भैरव को देशी-विदेशी ही नहीं, चायना की मदिरा का महाभोग…

Ujjain News: भैरव अष्टमी पर यहां देशी-विदेशी ही नहीं, चायना तक की शराब, सिगरेट, चिलम, कोल्ड्रिंक्स, बीड़ी, भांग सबकुछ चढ़ाया गया.

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chhappan bhairav temple at ujjain

Ujjain News: भैरव अष्टमी पर यहां देशी-विदेशी ही नहीं, चायना तक की शराब, सिगरेट, चिलम, कोल्ड्रिंक्स, बीड़ी, भांग सबकुछ चढ़ाया गया.

उज्जैन. भैरव अष्टमी पर उज्जैन के भागसीपुरा स्थित छप्पन भैरव मंदिर में बाबा को अनूठा भोग अर्पण किया गया। यहां देशी-विदेशी ही नहीं, चायना तक की शराब, सिगरेट, चिलम, कोल्ड्रिंक्स, बीड़ी, भांग सबकुछ चढ़ाया गया था। इंदौर का एक परिवार आखिर क्यों कर रहा है दस सालों से यह पूजा आइए, जानते हैं।

भैरव बाबा स्वप्न में दिखे

वर्ष 2004 की बात है, एक महिला को भैरव बाबा स्वप्न में दिखे और कहा कि मेरी पूजा ठीक प्रकार से नहीं हो रही है, मुझे मदिरा का भोग लगाओ। इंदौर रहने वाली इस महिला ने जब इस स्वप्न का जिक्र पति नीरज देसाई से किया, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने उज्जैन अपने मायके आकर छप्पन भैरव को 60 प्रकार की मदिरा का भोग लगाया। (उल्लेखनीय है कि उज्जैन निवासी उनके भाई छप्पन भैरव मंदिर के पुजारी हैं)।

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भैरव अष्टमी के दिन छप्पन भैरव को 60 प्रकार की देशी-विदेशी ही नहीं चायना की मदिरा और 56 पकवानों का महाभोग बाबा को अर्पण किया। स्वयं बहन उज्जैन आई और अपने सपने को साकार किया। तभी से वे हर साल भैरव जयंती के मौके पर बाबा को सभी प्रकार की मदिरा का भोग अर्पण करने लगे।

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इसलिए नहीं चढ़ाते थे मदिरा

पुजारी पं. राजेश व्यास ने बताया कि ब्राह्मण होने के कारण हम लोग बाबा को शराब का भोग नहीं लगाते थे। क्योंकि हमारे घर में मांस-मदिरा प्रतिबंधित है, यही वजह रही कि हम बाबा को भी मदिरा नहीं चढ़ाते थे। लेकिन जब वर्ष 2004 में बहन को बाबा ने स्वप्न दिया, तो फिर तभी से बाबा को मदिरा का भोग लगाने लगे।

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मदिरा से सजा मंदिर

भैरव अष्टमी पर छप्पन भैरव का मंदिर मदिरालय के रूप में नजर आ रहा था। पकवानों के साथ देशी-विदेशी मदिरा की अनेक बोतलें भी रखी हुई थीं। इतना ही नहीं, बाबा को सिगरेट, कोल्ड्रिंक्स आदि भी भोग स्वरूप परोसी गई।

56 भैरव एक साथ

यह मंदिर अतिप्राचीन है। यहां भैरव बाबा की 56 प्रतिमाएं एक ही स्थान पर होने से इनका नाम चमत्कारी छप्पन भैरव पड़ा। पुजारी पं. व्यास ने बताया कि राजा भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य भी यहां आकर पूजा करते थे। अवंतिका तीर्थ के अष्ट भैरव में इनकी गणना होती है।

10 हजार का खर्च, पॉकेट मनी से

नीरज देसाई ने बताया कि प्रतिवर्ष भैरव अष्टमी पर जो भव्य पूजा की जाती है, उसका लगभग 10 हजार खर्च आता है, जिसे मेरे बच्चे, पत्नी और स्वयं के द्वारा पॉकेट मनी से किया जाता है। इसमें अन्य किसी भी भक्त की मदद नहीं ली जाती।