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यह है एमपी की बेटी…देश की पहली महिला संतूर वादक

संस्कृति विभाग द्वारा घोषित शिखर सम्मान में डॉ. वर्षा अग्रवाल को दुर्लभ वाद्य वादन श्रेणी में पुरस्कृत

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उज्जैन. संस्कृति विभाग ने घोषित किए मध्यप्रदेश में कला, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र के 2019-20 के सबसे बड़े शिखर सम्मान से उज्जैन की बेटी डॉ. वर्षा अग्रवाल को भी नवाजा है। उन्हें दुलर्भ वाद्य वादन श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। खास बात यह है कि वह देश की पहली महिला संतूर वादक हैं,

जिन्होंने अपनी संगीत साधना से उज्जैन का नाम देश ही नहीं विदेशों तक पहुंचाया है। डॉ वर्षा अग्रवाल शासकीय गर्ल्स डिग्री कॉलेज दशहरा मैदान में प्रोफेसर हैं और अपनी अनूठी साधना को बतौर गुरु के तौर पर विद्यार्थियों को बांट रही है। डाबरी पीठा में निवासरत डॉ. अग्रवाल का कहना है संतूर एक कठिन साज है, इसके सौ तारों को मिलाना और गायकी तथा तंत्रकारी दोनों अंगों का बादन इस पर करना अत्यंत कठिन है। इसलिए आज भी झस क्षेत्र में बहुत कम कलाकार है।

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शिखर पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अग्रवाल छह वर्ष की उम्र से ही संगीत की साधना कर रही है| वे बताती है कि उनके दादाजी चाहते थे कि वे संगीत के क्षेत्र में जाए। इसके बाद से उन्हें ऐसी लगन लगी कि वे इसी में रचबस गई। उन्होंने तबलावादक पंडितललित महंततथा पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी सेसंतूर कीसंगीतकी शिक्षाली संगीत के प्रति उनका समर्पण ऐसा था कि अविवाहितहोकर मन संतूर के तार के साथ जोड़ दिया। अग्रवाल ने बताया कि अबतक उनकी छह एल्बम रिलीज हो चुकी हैं।

60 देशों की यात्रा, राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए
संतूर वादक के रूप में डॉ. वर्षा अग्रवाल अब तक 60 देशों की यात्रा कर अपने कला का जादू बिखेरा है। इसमें अमेरिका, कनाडा, यूरोप, अफ्रिका, दुबई सहित कई देशों में दूतावासों में प्रस्तुति दी है। देश में ऐसा कोई संगीत आयोजन नहीं जहां उन्होंने अपनी प्रस्तुति नहीं दी। डॉ. अग्रवाल को पांच अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड, 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने फर्स्ट लेडीऑफ संतूर, वर्ष 2019 में अंतर राष्ट्रीय संगीत शिरोमणी सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं।

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