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मानसिक स्वास्थ्य के लिए रचनात्मकता विटामिन समान – प्रो. भारद्वाज

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में रचनात्मकता एवं मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर एफडीपी–एसडीपी कार्यक्रम विशेषज्ञों ने नवाचार और तनावमुक्त शिक्षा के महत्व पर दिया जोर विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ अंतरानुशासीय कार्यक्रम
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उज्जैन

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rishi jaiswal

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Updated: 13 Mar 2026, 7:44 PM IST

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में रचनात्मकता एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर एफडीपी–एसडीपी कार्यक्रम

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में रचनात्मकता एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर एफडीपी–एसडीपी कार्यक्रम

उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में “रचनात्मकता एवं मानसिक स्वास्थ्य : पारस्परिक अंतरानुशासीय संबंध” विषय पर आयोजित एफडीपी–एसडीपी कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, कृषि विज्ञान अध्ययनशाला, सांख्यिकी अध्ययनशाला तथा विश्वविद्यालय एल्युमिनी एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज ने की। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

मानसिक स्वास्थ्य और रचनात्मकता के संबंध पर जोर

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आहार की तरह है, जबकि रचनात्मकता उसके लिए विटामिन का कार्य करती है। उन्होंने विद्यार्थियों में सीखने की रुचि विकसित करने, अध्ययन में एकाग्रता बढ़ाने और तनावमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में जे.एन.आई.बी.एम. के संकायाध्यक्ष एवं निदेशक प्रो. डॉ. धर्मेन्द्र मेहता ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

विशेषज्ञ व्याख्यान और विचार-विमर्श

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रसिद्ध क्रिएटिविटी गुरु इंजीनियर पुनीत भटनागर ने विश्वविद्यालय परिसर में विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने रचनात्मकता और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों को विस्तार से समझाते हुए विद्यार्थियों में नवाचार की भावना विकसित करने पर जोर दिया। अपने तीन दशकों के कॉरपोरेट अनुभव और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विज्ञापन अभियानों के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने केस स्टडी और परिस्थिति विश्लेषण के जरिए विषय को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. राजेश टेलर ने विश्वविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्र परंपरा के बारे में जानकारी साझा की। कार्यक्रम के दौरान कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज, प्रो. डॉ. उमा शर्मा, प्रो. डॉ. धर्मेन्द्र मेहता और प्रो. डॉ. कामरान सुल्तान ने इंजीनियर पुनीत भटनागर का स्मृतिचिन्ह, पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। साथ ही प्रो. डॉ. कामरान सुल्तान और प्रो. डॉ. बी. के. आंजना ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों 3, 4 और 9 पर भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. उमा शर्मा, प्रो. डॉ. अंजना पाण्डेय, प्रो. डॉ. स्वाति दुबे, प्रो. डॉ. एम. के. द्विवेदी और डॉ. नयनतारा डामोर सहित कई शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।