
डॉ. जटिया के भाजपा संसदीय बोर्ड में शामिल होने से शहर की राजनीति का एक केंद्र और बढ़ा, बड़े नेताओं को फायदा-नुकसान होने की अटकलें
उज्जैन. भाजपा के संसदीय बोर्ड में डॉ. सत्यनारायण जटिया का शामिल होना, उज्जैन की राजनीति को खासा प्रभावित करने वाला होगा। अभी तक भाजपा की स्थानीय राजनीति संगठन के अलावा मंत्री, सांसद और विधायक के ईर्द-गीर्द थी लेकिन अब डॉ. जटिया के रूप में एक और पॉवर सेंटर तैयार हो गया है। यह केंद्र इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगा क्योंकि जटिया पुराना व अनुभवी नाम होने के साथ ही उस सुपर सीट पर पहुंचा है जहां किंग नहीं, किंग मेकर बैठते हैं। ऐसे में दादा का इस तरह कम बैक होना कई बड़े नेताओं के लिए काफी मायने रखेगा।
राजनीति के ढेरों बसंत-पतझड़ देख चुके डॉ. जटिया के लिए एक बार फिर समय बदला है। राजनीतिक चढ़ाव में अति उत्साह और उतार में अवसाद से दूर रहने की खासीयत रखने वाले डॉ. जटिया की नजर में हालांकि यह भी पार्टी से मिली एक जिम्मेदारी हो सकती है लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इसे अपने नजरिए देख रहे हैं। यह इसलिए भी क्योंकि कई नेताओं ने राज्यसभा सदस्य के पद को दादा के राजनीतिक सफर का पूर्ण विराम मान लिया था। यहां तक कि कई मंच-कार्यक्रमों में उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज भी किया गया। अब जब एक बार फिर डॉ. जटिया पार्टी की मुख्य राजनीतिक धारा का अंग बने हैं तो स्थानीय राजनीति के लिए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि उनसे जुड़े लोगों का कहना है कि इससे पूर्व भी पावर सेंटर रहने के दौरान दादा ने न कभी पट्ठावाद को बढ़ावा दिया और नहीं किसी का कड़ा विरोध किया, सिर्फ अपना मत रखा।
निगम चुनाव में ली बैठकें
डॉ. जटिया बुधवार को केंद्रीय राजनीति का हिस्सा बने हैं लेकिन कुछ दिन पूर्व वे स्थानीय राजनीति में पार्टी के निष्ठावान सामान्य कार्यकर्ता के रूप में भी भूमिका निभाते नजर आए थे। निगम चुनाव में भाजपा के महापौर व पार्षद प्रत्याशियों की जीत के लिए छोटी-बड़ी सामाजिक बैठकें ली थीं। हाल ही में छतरी चौक पर हुए झंडावंदन कार्यक्रम में भी वे शामिल हुए।
ऐसे प्रभावित होगी स्थानीय राजनीति
- डॉ. जटिया की नियुक्ति को कई नेता पार्टी के विस्तार और संगठन की मजबूती से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि इससे बढ़ता पट्ठावाद थोड़ा कम होगा। हाल ही के चुनाव में पट्ठावाद के आरोप भी लगे थे।
- आगामी चुनावों में टिकट-पद आदि को लेकर संबंंधित नेताओं के प्रति डॉ. जटिया का नजरिया महत्वपूर्ण रहेगा। इसलिए कई नेताओं को फिर से नजदिकियां बढ़ाना पड़ सकती हैं।
- संसदीय बोर्ड सदस्य होने के नाते कार्यक्रम-मंचों पर डॉ. जटिया को विशेष स्थान मिलेगा। दिल्ली तक बात पहुंचाने के लिए वे एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेंगे।
- प्रक्रिया अनुसार अन्य प्रदेश के नेताओं को भी टिकट आदि के लिए डॉ. जटिया को भी अपना बायोडाटा देना होगा। जो उनसे सीधे नहीं जुड़े हैं वे स्थानीय नेताओं के माध्यम से उनसे संपर्क करेंगे। इससे स्थानीय नेताओं की बाहरी नेताओं में पूछपरख बढ़ेगी।
- डॉ. जटिया के समर्थकों का मनोबल बढ़ेगा। उन नेता-कार्यकर्ताओं को भी एक नया विकल्प मिलेगा जिन्हें अभी किसी गुट विशेष में जगह नहीं मिल रही है।
(चर्चा में जैसा राजनीतिक जानकारों ने संभावना जताई)
Published on:
22 Aug 2022 08:39 pm
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