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दत्त जयंती: सती अनुसुइया के घर जन्मे, 24 गुरु बनाए…तीनों देवों के एकसाथ होते हैं दर्शन

Ujjain News: दत्त यानी दिया हुआ, ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने अत्रि ऋषि को दिया, इसलिए आत्रेय कहलाए। तीनों देव अर्थात उत्पत्ति, स्थिति और लय का एकरूप ही दत्तात्रय कहलाए।

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Dattatraya Jayanti Dutt Temple Ujjain

Ujjain News: दत्त यानी दिया हुआ, ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने अत्रि ऋषि को दिया, इसलिए आत्रेय कहलाए। तीनों देव अर्थात उत्पत्ति, स्थिति और लय का एकरूप ही दत्तात्रय कहलाए।

उज्जैन। दत्त यानी दिया हुआ, ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने अत्रि ऋषि को दिया, इसलिए आत्रेय कहलाए। तीनों देव अर्थात उत्पत्ति, स्थिति और लय का एकरूप ही दत्तात्रय कहलाए। सत, रज, तम के परे परब्रह्म का अनुभव देने वाले एकमुखी दत्त यानी विष्णु रूपी दत्तात्रेय सती अनुसुइया के घर जन्मे। जन्म लेने के बाद ब्रह्मा, विष्णु और महेश अंतरध्यान हो गए और रह गए सिर्फ विष्णु रूपी दत्तात्रय, जिनमें तीनों देवों की शक्तियां केंद्रित हैं।

बड़ी अनूठी है भगवान दत्तात्रय की प्रतिमा
सिंहपुरी स्थित दत्तात्रय मंदिर के पुजारी पं. किरण गौरे ने बताया कि दत्तात्रय के रूप में जो आयुध है, वह डमरू, त्रिशूल शिव के, शंख-चक्र विष्णु के तथा माला-कमंडल ब्रह्माजी के प्रतीक हैं। दत्तात्रय के पीछे गाय है वह पृथ्वी है। इर्द-गिर्द नजर आने वाले श्वान वेदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तन पर लगी भस्म पवित्रता और वैराग्य भावना दर्शाती है। कमंडल सिर्फ भिक्षा का पात्र नहीं, बल्कि वह जीवन शक्ति और सबके लिए जल-धन-धान्य आदि का प्रतीक है।

कई लोगों से प्राप्त किया ज्ञान
श्रीदत्तात्रय ने कई लोगों से ज्ञान ग्रहण किया, उसमें वस्तु और प्राणी भी शामिल हैं। सबको अपना गुरु माना और सम्मान दिया। इसके पीछे दर्शन यह है कि किसी को कभी भी छोटा न समझें, किसी से भी आपको नई सीख मिल सकती है, उन्होंने 24 गुरु बनाए।

सिंहपुरी में मनाया जन्मोत्सव
सिंहपुरी स्थित अतिप्राचीन दत्तात्रय मंदिर में भगवान दत्तात्रय का जन्मोत्सव मंगलवार को मनाया गया। पं. किरण गौरे ने बताया कि सुबह 9 बजे रुद्राभिषेक पूजन व शृंगार के बाद शाम 5 बजे कीर्तन हुआ। शाम 6.30 बजे जन्मोत्सव व जन्म आरती की गई।

महाकाल मंदिर के बाहर है अतिप्राचीन दत्त मंदिर
दत्त जयंती पर बुधवार को महाकाल मंदिर के बाहर हाथी द्वार पर स्थित महाराष्ट्र समाज के अतिप्राचीन श्रीदत्त मंदिर में महाराष्ट्र तरूण मंडल के तत्वावधान में धार्मिक कार्यक्रम होंगे। सुबह अभिषेक-पूजन तो शाम को शृंगार दर्शन, महाआरती, प्रसादी वितरण के साथ सुंदरकांड भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। पुजारी संजय दिवटे, सुशील मूले ने बताया सुबह शुभ मुहूर्त में पंडितों द्वारा दत्त भगवान की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक-पूजन किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 3 बजे से श्रीवीर हनुमान भक्त मंडल के जस्सु गुरु महाराज की मंडली द्वारा संगीतमय सुंदरकांड व भजन प्रस्तुत किए जाएंगे। शाम को आकर्षक शृंगार दर्शन के साथ 6.30 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण होगा। शाम 7 बजे से महाराष्ट्र समाज के योगेश देवले के नेतृत्व में शास्त्रीय गायन होगा। इस अवसर पर अभिषेक सिंह गायन करेंगे।