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कैलेंडर की इस त्रुटि से हो रही म.प्र. शासन की किरकिरी

म.प्र. शासन के नाम से बाजार में बिक रहे कैलेंडरलोग हो रहे भ्रमित, न प्रकाशक का पता न मुद्रक का

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म.प्र. शासन के नाम से बाजार में बिक रहे कैलेंडरलोग हो रहे भ्रमित, न प्रकाशक का पता न मुद्रक का

शाजापुर. प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश शासन की ओर से नववर्ष के कैलेंडर का प्रकाशन करवाकर उसे शासकीय विभागों में पहुंचाया जाता है। वैसे तो ये शासकीय कैंलेंडर बाजार में विक्रय नहीं किए जा सकते, लेकिन मध्यप्रदेश शासन के नाम से अन्य कैलेंडर बाजार में विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि इन कैलेंडर पर न तो प्रकाशक का पता होता है और न ही मुद्रक का। ऐसे में लोग मध्यप्रदेश शासन का नाम देखकर ये कैलेंडर खरीदते हुए भ्रमित हो जाते हैं।
शहर में भी पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश शासन के नाम से अलग-अलग किस्म के वर्ष 2020 के कैलेंडर विक्रय के लिए दुकानों पर उपलब्ध हैं। दुकानदारों से जब मध्यप्रदेश शासन के कैलेंडर के बारे में पूछा जाए तो वे ये नकली कैलेंडर दे देते हैं। इन कैलेंडरों पर मध्यप्रदेश शासन बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है। जिससे कोई भी इसे शासकीय कैलेंडर खरीदकर क्रय कर लेता है। हालांकि इन कैलेंडरों पर छोटे अक्षरों में ये भी लिखा होता है कि ये मध्यप्रदेश शासन द्वारा घोषित अवकाशों के अनुसार या फिर मध्यप्रदेश शासन द्वारा अधिकृत घोषित अवकाशों के अनुसार लिखा होता है। ऐसे में हर कोई इन्हें शासकीय कैलेंडर समझकर क्रय कर लेता है। दुकानदारों का तर्क है कि इसमें वे सभी अवकाश की सूचना रहती है जो कि शासन द्वारा घोषित किए जाते हंै। ऐसे में लोग यहां तक कि शासकीय विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी इन कैलेंडरों को खरीदकर ले जाते हैं।
प्रदेश शासन की हो रही किरकिरी
शहर के कुछ प्रतिष्ठानों पर एक कैलेंडर विक्रय के लिए पहुंचा है। इस कैलेंडर में वैसे तो प्रकाशक और मुद्रक का नाम नहीं है, लेकिन इसके प्रत्येक पृष्ठ पर बड़े अक्षरों में मध्यप्रदेश शासन और छोटे अक्षरों में द्वारा घोषित अवकाशों के अनुसार लिखा हुआ है। दूर से कोई भी इसे शासकीय कैलेंडर समझकर इसे खरीदने के लिए पहुंच जाता है। इस कैलेंडर के जनवरी 2020 माह के पृष्ठ पर लिखी गई तारीख में गफलत हो रही है। इस कैलेंडर में 10 तारीख के बाद सीधे 18 तारीख कर दी गई। वहीं 17 तारीख के बाद 11 तारीख लिखी गई है। ऐसे में हर कोई इस कैलेंडर को मध्यप्रदेश शासन का कैलेंडर समझकर इसमें हुई प्रिंटिंग मिस्टेक को देख रहा है। इससे प्रदेश शासन की किरकिरी हो रही है। वर्ष के पहले दिन इस कैलेंडर में लिखी तारीख में गड़बड़ी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चलने लगी। इस पर पहले तो दुकानदार ने इसे निजी कंपनी द्वारा बनाया गया कैलेंडर बताया, लेकिन बाद में अपनी दुकान से इस कैलेंडर को हटा लिया।
ये सवाल जिनके नहीं मिल रहे जवाब
मध्यप्रदेश शासन के नाम का उपयोग करके कैलेंडर को बाजार में बेचने से जहां गफलत हो रही है, वहीं अनेक सवाल भी सामने आ रहे हैं। जिनके जवाब किसी को भी नहीं मिल पा रहे हंै।
क्या मध्यप्रदेश शासन के नाम का उपयोग करके कोई निजी कंपनी कैलेंडर बनाकर उसका विक्रय कर सकती है?
जब कैलेंडर पर प्रकाशक और मुद्रक का नाम ही अंकित नहीं है तो फिर इसकी प्रमाणिकता कैसे परखी जा सकती है?
मध्यप्रदेश शासन के नाम का उपयोग करके जो कैलेंडर बनाकर विक्रय कर रहे हैं क्या उन पर किसी विभाग ने आज तक निगरानी या जांच की है?
कैलेंडर में की गई प्रिंटिंग मिस्टेक से प्रदेश शासन की हुई किरकिरी का जिम्मेदार किसे माना जाए?