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महाकाल मंदिर : श्रद्धालु से भेंट लेने ड्यूटी पाइंट छोड़कर दौड़े थे कर्मचारी, अब गिरी गाज

महाकाल मंदिर में श्रद्धालु की भेंट पाने के लिए ड्यूटी पाइंट-कामकाज छोडऩे वालों को हटाया

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उज्जैन. महाकाल मंदिर में करीब ढाई माह पूर्व श्रद्धालु द्वारा दी जा रही भेट के लिए ड्यूटी पाइंट-कामकाज छोडऩे वाले 10 सफाई और सुरक्षाकर्मी को मंदिर की सेवा से हटा दिया गया है। कर्मचारियों की एजेंसी को इस संबंध आदेश जारी कर दिए गए हैं। वहीं रुपए बांटने वाले श्रद्धालु को प्रोटोकॉल की सुविधा से वंचित कर भविष्य में एेसा नहीं करने की चेतावनी दी गई है।

महाकाल मंदिर में करीब ढाई माह पहले इंदौर के एक श्रद्धालु द्वारा 100-100 रुपए कर्मचारियों को भेंट किए गए थे। भेंट राशि पाने के लिए मंदिर के सेवक और सुरक्षा-सफाई कर्मचारी ड्यूटी पाइंट, कामकाज छोड़कर श्रद्धालु के पीछे लग गए। नतीजतन मंदिर में करीब आधे घंटे तक अव्यवस्था बनी रही। घटना के कुछ दिन बाद सितंबर के अंत में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अघ्यक्ष के पास पहुंचा था।

इसमें श्रद्धालु द्वारा दिए जा रहे 100-100 रु.पाने के लिए मंदिर में सेवकों, सुरक्षा-सफाई कर्मचारियों में होड़ सी मच गई थी। हालात यह बने कि कर्मचारियों ने रुपए के लिए ड्यूटी पाइंट, कामकाज तक छोड़ दिया था। इस स्थिति के कारण मंदिर में करीब आधे घंटे तक अव्यवस्था हो गई। इंदौर निवासी राजेश मंगल बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आए थे। शयन आरती के बाद भक्त ने नंदीहॉल और निर्गम रैम्प में मौजूद सेवकों, सुरक्षा-सफाई कर्मचारियों को 100-100 रु. देना शुरू कर दिया। जैसे ही इसकी जानकारी अन्य कर्मचारियों-सेवकों को लगी वे भी काम, पांइट को छोड़कर रुपए पाने के लिए भक्त के चारों तरफ जमा हो गए थे। इस दौरान नंदीहॉल में मौजूद एक श्रद्धालु ने घटना के दृश्य मोबाइल में कैद कर लिए हैं। इस देख रुपए बांटने वाले श्रद्धालु नंदी हॉल से बाहर आकर परिसर स्थित लड्डू प्रसादी काउंटर के पास चले गए। रुपए भेंट के घटनाक्रम के दौरान परिसर में भारी समूह जमा हो था। इस मामले में महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक अभिषेक दुवे ने वीडियो और सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद इस संबंध कार्रवाई की बात कही थी।

दान, भेंट लेने पर प्रतिबंध है
महाकाल मंदिर में सेवकों, सुरक्षा-सफाई कर्मचारियों के किसी भी दान, भेंट लेने पर प्रतिबंध है। इसके बाद भी कई मर्तबा श्रद्धालुओं द्वारा दी जाने वाली भेंट प्राप्त कर ली जाती है। उक्त घटना सामने आने के बाद मंदिर प्रबंध समिति के अधिकारियों ने जांच की। इसमें घटना की पुष्टि करने के बाद मंदिर में सेवक, सुरक्षा-सफाई कर्मचारियों की पहचान की गई। इस आधार पर मंदिर में कार्यरत निजी सुरक्षा कंपनी के रवि योगी, निर्भयसिंह, अशोक खरोदिया, दिनेश परमार, धनराज परमार और प्रकाश बैरागी सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी बीवीजी ग्रुप के सुमित, धर्मेंद्र और तेजराम को हटाया गया है। मंदिर प्रबंध समिति ने दोनों एजेंसियों को उक्त कर्मचारियों से मंदिर में सेवा नहीं लेने के आदेश दिए है। इधर मौके पर मौजूद मंदिर प्रबंध समिति के सेवक पवन उपाध्याय और संध्या मालवीय की भेंट लेने में संलिप्तता नहीं पाए जाने पर चेतावनी दी गई है।

प्रोटोकॉल की सुविधा से वंचित

मंदिर प्रबंध समिति की ओर से बताया गया कि इंदौर निवासी उक्त श्रद्धालु अवसर विशेष और खास दिनों में अक्सर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। उनके द्वारा मंदिर में कर्मचारियों को भेंट दी जाती है। घटना को लेकर मंदिर प्रबंध समिति ने रुपए बांटने वाले श्रद्धालु को प्रोटोकॉल की सुविधा से वंचित कर भविष्य में एेसा नहीं करने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ वे अब मंदिर में आम श्रद्धालु की तरह ही दर्शन कर सकते हैं।