उज्जैन. केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में १५ करोड़ के जीपीएफ गबन मामले में पूर्व जेल अधीक्षक उषा राजे के इशारे पर ही जीपीएफ के खातों से गबन किया जा रहा था, इनके खातों से रुपए निकल कर मीडियाकर्मी के हवाले से सीधे शहर और आसपास के शहरों के सटोरियों के खातों में जाते थे। इसके बाद नकद राजे और अन्य हिस्सेदारों के पास पहुंचता था।
आरोपी रिपुदमन ने भी पुलिस पूछताछ में कबूला है कि उसके पास तो सिर्फ २० प्रतिशत हिस्सा ही पहुंचता था, जबकि सारा रुपए मैडम और उनके खास मीडिया कर्मी जगदीश के पास जाता था। वहीं यह बात भी सामने आ रही है कि पुलिस पूछताछ में उषा राजे ने कबूला, उनका सारा रुपया जगदीश के पास है, उसे मैंने एक कार भी दिलवाई है। हालांकि एएसपी और जांच प्रभारी डॉ. इंद्रजीत बाकलवार का कहना है कि फिलहाल दोनों ही पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
बेटी के लॉकर की आज होगी जांच
एएसपी डॉ. इंद्रजीत बाकलवार के अनुसार जांच में सोमवार को कई दस्तावेज सामने आए हैं जो गबन काण्ड से जुड़े हैं, इसके अलावा उषा राजे की बेटी के नाम बैंक लॉकर भी सामने आया है जिसकी जांच की जा रही है। मंगलवार को इस मामले में टीम बैंक जाकर लॉकर की जांच करेगी। वहीं बंगले से ज्वेलरी के बिल भी मिले हैं।
कोर्ट में रोते हुए राजे बोली…
जिसने किया, उसे छोड़ रहे
सोमवार सुबह करीब १०.३० बजे पुलिस उषा राजे, रिपुदमन, रोहित पिता अनील चौऋषिया, ङ्क्षरकु पिता गजराजङ्क्षसह मांदरे और हरीश पिता राधेश्याम गहलोत को मेडिकल चेकअप के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची। यहां मेडिकल चेकअप के बाद सभी को कोर्ट में पैश किया। कोर्ट परिसर में उषा राजे आरोपी रिपुदमन को बेईमान और ***** बताती रही कहा इस ***** ने ही यह गबन किया है और मुझे भी फंसवा दिया। कोर्ट में पैशी के बाद जब पुलिस राजे को लेकर बाहर निकली तो मीडिया को देख रोते हुए कहने लगी कि लेरा कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस वाले मेरी बिटिया को भी फंसा रहे हैं और जिसने किया है उसे छोड़ रहे हैं। हालांकि मीडिया ने प्रश्न किया कि वह कौन है जिसे छोड़ रहे हैं इस पर उषाराजे चुप्पी साध वाहन में बैठ गई।
पैरोल के रुपए मांगती थी पूर्व जेल अधीक्षक, रोज हो रहे नए खुलासे
उषाराजे मीडिया कर्मियों के सामने जेल सुधार का दावा करती थी, जबकि गबन सामने आने के बाद नए नए मामले सामने आ रहे हैैं। देवास रोड स्थित महाकाल एवन्यू में रहने वाली महिला गीता पति नारायण गौर ने जेल अधीक्षक को शिकायत की है कि पूर्व जेल अधीक्षक उषाराजे उनकी बेटी मीनाक्षी मीना की पैरोल स्वीकृति के लिए २५ हजार रुपए की मांग कर रही थी, नहीं देने पर बेटी का पैरोल अवधि बंद कर दी गई। जबकि बेटी आजीवन कारावास की सजा काट रही है।
बेटी व मीडियाकर्मी
की फरारी की चर्चा
पुलिस जांच में सामने आया कि उषा राजे ने उसकी बेटी के नाम पर भी बैंक में लॉकर ले रखा है। इसके अलावा बेटी के खाते में भी रुपए ट्रांसफर करवाए गए थे। पुलिस बेटी को भी आरोपी बना सकती है, वहीं मीडिया कर्मी जगदीश परमार की भी पुलिस को तलाश है। चर्चा है कि दोनों इंदौर के एक बदमाश के यहां फरारी काट रहे हैं। जिन्हें पुलिस जल्द ही गिरफ्तार कर सकती है।
२०२० से चल रहा जीपीएफ का गबन
पुलिस के अनुसार २०२०-२१ में २ खाते, २१-२२ में ४७ खाते और २२-२३ में ५१ खातों से गबन सामने आया है, जबकि २०-२१ में तत्कालिन अधीक्षक अलका सोनकर केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में पदस्थ थी। ऐसे में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है जिसको लेकर पुलिस अधिकारी जांच कर रहे हैं। इस मामले में जल्द ही तत्कालीन जेल अधीक्षक से भी पूछताछ हो सकती है।
उषा से 13 दिन में राज उगलवाएगी पुलिस
सोमवार को दोनों को कोर्ट में पेश कर ८ अप्रेल तक रिमाण्ड पर लिया है जबकि तीनों सटोरियों को ३१ मार्च तक रिमाण्ड पर सौंपा गया है। अब राजे और आरोपी रिपुदमन से १३ दिन तक पुलिस कस्टडी मेें पूछताछ करेगी, इतने लम्बे समय तक रिमाण्ड लेेने के पीछे पुलिस का तर्क था कि दोनों ही पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं और एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि यह गबन करोड़ों रुपए का हैं, इन्होंने दर्जनों लोगों के खातों में रुपए ट्रांसफर किए, उन्हें ट्रेस करना है इनके बारे में भी यह कोई जानकारी नहीं दे रहे। बंगले की छानबीन की तो वहां से भी कईं अहम दस्तावेज मिले हैं जो गबन काण्ड से जुड़े हैं। ऐसे में दोनों से लम्बी पूछताछ करना है। इस तर्क के आधार पर कोर्ट ने दोनों को १३ दिन के पुलिस रिमाण्ड पर सौंप दिया। वहीं जिन्ह तीन सटोरियों के खातों में रुपए ट्रांसफर किए थे उनका भी पांच दिन का रिमाण्ड पुरा हो गया था, तीनों को कोर्ट ने ३१ मार्च तक के रिमाण्ड पर सौंपा है।
इधर, नर्मदापुरम् में भी
खातों की जांच शुरू
इधर केंद्रीय भैरवगढ़ में जीपीएफ गबन सामने आने के बाद नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में भी जांच शुरू हो गई। उज्जैन से पहले उषाराजे नर्मदापुरम में पदस्थ थी। ऐसे में नर्मदापुरम केंद्रीय जेल के कर्मचारियों की ङ्क्षचता भी बढ़ गई है। क्योंकि उषा राजे करीब पांच साल तक नर्मदापुरम में पदस्थ रही है। ऐसे में कर्मचारियों की मांग पर ७० कर्मचारियों के जीपीएफ खातों की जांच की जा रही है।
बेटी व मीडियाकर्मी
की फरारी की चर्चा
पुलिस जांच में सामने आया कि उषा राजे ने उसकी बेटी के नाम पर भी बैंक में लॉकर ले रखा है। इसके अलावा बेटी के खाते में भी रुपए ट्रांसफर करवाए गए थे। पुलिस बेटी को भी आरोपी बना सकती है, वहीं मीडिया कर्मी जगदीश परमार की भी पुलिस को तलाश है। चर्चा है कि दोनों इंदौर के एक बदमाश के यहां फरारी काट रहे हैं। जिन्हें पुलिस जल्द ही गिरफ्तार कर सकती है।
२०२० से चल रहा जीपीएफ का गबन
पुलिस के अनुसार २०२०-२१ में २ खाते, २१-२२ में ४७ खाते और २२-२३ में ५१ खातों से गबन सामने आया है, जबकि २०-२१ में तत्कालिन अधीक्षक अलका सोनकर केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में पदस्थ थी। ऐसे में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है जिसको लेकर पुलिस अधिकारी जांच कर रहे हैं। इस मामले में जल्द ही तत्कालीन जेल अधीक्षक से भी पूछताछ हो सकती है।
दोनों को ८ अप्रेल तक रिमाण्ड पर लिया है, उषाराजे और उनकी बेटी के कुछ लॉकर भी सामने आए हैं, ज्वेलरी के बिल भी मिले हैं। इसके अलावा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि ये गबन के रुपए शहर और आसपास के सटोरियों के खातों में ट्रांसफर करते थे। जिसमें जेल और जेल के बाहर के लोग जुड़े हैं।
डॉ. इंद्रजीत बाकलवार, एएसपी और एसआइटी प्रभारी
नर्मदापुरम सेंट्रल जेल के कर्मचारियों की ङ्क्षचता दूर करने के लिए खातों का रिव्यू किया है। लगभग 70 कर्मचारियों के जीपीएफ खातों की जांच कर ली है। अब तक यहां कोई गड़बड़ी नहीं मिली है।
– संतोष सोलंकी, जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल नर्मदापुरम्