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परिजनों की इच्छा पर पहली बार दिव्यांग महिला का नेत्रदान

मृत्यु के एक दिन पहले निर्णय, प्राण त्यागने के दो घंटे बाद बडनग़र की टीम ने कराया नेत्रदान

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Eye donation of a disabled woman for the first time on the wish of fam

मृत्यु के एक दिन पहले निर्णय, प्राण त्यागने के दो घंटे बाद बडनग़र की टीम ने कराया नेत्रदान

नागदा. नागदा में पहली बार किसी दिव्यांग महिला की मृत्यु के बाद नेत्रदान हुआ है। परिजनों की इच्छा पर हुए इस नेत्रदान से दो सप्ताह के भीतर जरुरतमंद का जीवन रोशन होगा। मृत्यु के एक दिन पहले परिजनों ने नेत्रदान का निर्णय लिया और गुरुवार को प्राण त्यागने के दो घंटे बाद बडनग़र से पहुंची टीम ने नेत्रदान करवाया। अमूमन ऐसा होता है कि जब घर में किसी की मृत्यु हो जाती है तो परिवार उसके गम में डूब जाता है। मगर शहर के जैन परिवार ने जरुरतमंदों के बारे में सोचते हुए नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज में सकारात्मक संदेश दिया है।
दरअसल, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी सीमा जैन (54) दिव्यांग थी। बुधवार को सीमा की हालत ज्यादा नाजूक हो रही थी। ऐसी स्थिति में सीमा की देखभाल में जुटी उनकी भतीजी बहू राखी जैन ने संस्था स्नेह के संस्थापक पंकज मारू से चर्चा कर अपनी बुआसास के निधन के उपरांत नेत्रदान की इच्छा जाहीर की थी। संयोगवश अगले ही दिन गुरुवार को सीमा का निधन हो गया। जिस पर मारू व लायंस क्लब ग्रेटर अध्यक्ष कृष्णकांत गुप्ता ने बडनग़र के गीता भवन न्यास समिति के डॉक्टर जीएल ददरवाल से संपर्क किया। लगभग दो घंटे बाद शहर पहुंचे डॉ. ददरवाल, सतीश नीमा व टीम ने शहर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण की। नेत्रदान के पश्चात प्रमाण पत्र मृतका की भतीजी बहू राखी को प्रदान किया गया। इतना ही नहीं राखी ने ही अपनी बुआसास का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान लायंस क्लब के जोन चेयरपर्सन विनयराज शर्मा, सचिव राकेश डाबी, कोषाध्यक्ष मनोहरलाल शर्मा, पूर्व अध्यक्ष अजय गरवाल, स्थानकवासी जैन श्रीसंघ अध्यक्ष प्रकाश जैन सांवेरवाले, चंदनमल संघवी, अमरचंद जैन आदि मौजूद थे।
अगले दो सप्ताह में नेत्रहीनों का जीवन रोशन करेंगे
टीम ने बताया कि यह नेत्र दो सप्ताह के भीतर किसी जरुरतमंद को लगाएं उसके जीवन में उजियारा किया जाएगा। टीम ने बताया कि 50
वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के दो नेत्रों से चार दृष्टिहीनों व 50 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति से दो व्यक्तियों के जीवन को रोशन किया जा सकता है। नेत्रदान मृत्यु के 6 घंटे के भीतर करना आवश्यक है व नेत्रदान करने में किसी प्रकार का नुकसान मृतक व्यक्ति के शरीर को नहीं होता है।
मधुमेह व मोतियाबिंद ऑपरेशन करा चुके व्यक्ति की सामान्य मृत्यु पर हो सकते है नेत्रदान
टीम के अनुसार मधुमेह व मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुके व्यक्ति की सामान्य मृत्यु पर नेत्रदान कराएं जा सकते हैं। इसके अलावा पानी में डूबने, फांसी, जहरीले पदार्थ खाने या जहरीले जानवर के काटने, एड्स, कैंसर व 5 दिन से अधिक वेंटीलेटर पर रहने के पश्चात मृत्यु होने परर नेत्रदान नहीं किए जा सकते हैं।