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बांस की खेती कर मालामाल हुआ किसान, अब कम अवधि वाले बांस भी उपलब्ध

10 बीघा जमीन पर बांस के 8 हजार पौधे लगाए, उसकी जमीन का कटाव रुक गया और इधर किसान को बांस से भी मुनाफा होने लगा।    

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बांस की खेती कर मालामाल हुआ किसान, अब कम अवधि वाले बांस भी उपलब्ध

बांस की खेती कर मालामाल हुआ किसान, अब कम अवधि वाले बांस भी उपलब्ध

उज्जैन. नाले किनारे जमीन पर अच्छी और बड़े स्तर की खेती कर उन्नत किसानों की श्रेणी में आने वाले छोटे से गांव पिपलौदा द्वारकाधीश के किसान कुलदीप सिंह पंवार को एक ही परेशानी थी कि बारिश के समय नाले में बहते पानी से उसकी जमीन का भी कटाव हो रहा था। इसे रोकने के लिए वन विभाग की राज्य बांस मिशन की बांस रोपण योजना में उसने नाले किनारे की लगभग 10 बीघा जमीन पर बांस के 8 हजार पौधे लगाए। वर्ष 2018 में लगाए बांस अब लगभग 10 से 12 मीटर आकार के हो गए। राज्य बांस मिशन योजना में किसान को वन विभाग ने प्रति पौधा 120 रुपए अनुदान भी दिया।

इस तरह नाले से जमीन का कटाव रोकने के लिए लगाए बांस से किसान धन्य हो गया। एक तो उसे वन विभाग से अनुदान मिल गया, दुसरा उसकी जमीन का कटाव रुक गया और इधर किसान को बांस से भी मुनाफा होने लगा।

गौरतलब है कि राज्य बांस मिशन की बांस रोपण योजना में किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए वन विभाग किसानों की तलाश करता रहता है, लेकिन लंबे समय की फसल देखकर किसान इसकी ओर आकर्षित नहीं होते हैं। साधारण पारंपरिक बांस की खेती 8 से 10 साल में तैयार होती है, जिसके बाद ही बांस का आकार बिक्री लायक होता है, लेकिन टिशू कल्चर से तैयार बेम्बोसा बालकोआ प्रजाति के बांस के पौधे अधिकतम 4 वर्ष में तैयार हो जाते हैं। वन विभाग की सलाह पर कुलदीप ने इसी प्रजाति के पौध लगाए और इन्हें तैयार करने के लिए समय-समय पर वन विभाग का मार्गदर्शन लेता रहा। हालांकि इस प्रजाति के पौधे महंगे होते हैं, लेकिन वन विभाग की योजना में अनुदान और इसके बाद जल्दी तैयार होने से किसान को फायदा होता है। टिशू कल्चर से तैयार होने वाले बेम्बोसा बालकोआ प्रजाति के बांस के पौधे लगभग 32 रुपए प्रति पौधा कीमत के होते हैं।

खेती के लिए खरीदना पड़ते थे, अब नहीं

किसान कुलदीप सब्जी की भी खेती करता है, जिसके लिए उसे बाजार से बांस खरीदना पड़ते थे। दरअसल कई प्रकार की बेल वाली सब्जियों में बांस का सहारा देना पड़ता है, लेकिन कुलदीप अब खुद के लिए लगाए बांस का उपयोग सवयं की खेती में करता है। इससे उसे बाजार से महंगा बांस नहीं खरीदना पड़ता है और स्वयं के द्वारा लगाए बांस का भी उपयोग हो जाता है। किसान का कहना है कि अगले वर्ष से वह बांस की बिक्री भी करने लगेगा, जिससे उसे दो गुना फायदा होगा।

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राज्य बांस मिशन की बांस योजना लाभ के लिए है, लेकिन ज्यादातर किसान पारंपरिक खेती से बाहर नहीं आ रहे हैं। हम इस योजना का प्रचार कर किसानों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन काफी कम किसान ही बांस की खेती से लाभ समझ पा रहे हैं। कुलदीप इस बात का प्रमाण है कि बांस की खेती से अपनी आय को दो गुना कर सकते हैं।
-डॉ. किरण बिसेन, जिला वनमंडल अधिकारी