7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हे महाकाल.. पालकी उंचाई बढ़ाने की सद्बुद्धि दें, ताकि हर भक्त आपकों निहार सके

भारी भीड़ के चलते हजारों श्रद्धालु बाबा की झलक देखे बगैर ही लौटै, अब समय आ गया है पालकी की ऊंचाई बढ़ाने या अन्य विकल्प खोजने का

3 min read
Google source verification
भारी भीड़ के चलते हजारों श्रद्धालु बाबा की झलक देखे बगैर ही लौटै,

बाबा के दर्शन सवारी मार्ग पर भक्तों में जद्दोजहद तो आगे आने के लिए धक्कामुक्की होती रही।

उज्जैन। श्रावण-भादौ मास में बाबा महाकाल प्रजा को दर्शन देने निकले तो हजारों भक्त उनके दर्शन ही नहीं कर पाए। पालकी के आसपास पंडे-पुजारी अैर वीआइपी की भीड़ के चलते आम भक्त उनके एक झलक तक देखने को नहीं मिल पाई। रही सही कसर मार्गों पर लगे उँचे बैरिकेड्स ने पूरी कर ली। लिहाजा बाबा के दर्शन करने पहुंचे लाखों भक्त में कई बगैर दर्शन के ही लौटने को विवश हुए। इसकी वजह है कि बाबा की पालकी की उंचाई कम होना, जिसके चलते दूर से बाबा के दर्शन ही नहीं हो पाते। अब बाबा महाकाल से ही प्रार्थना है कि वह अपनी पालकी की ऊंचाई बढ़ाने या अन्य विकल्प की सद्बुदि़्ध दें, ताकि हर भक्त उनकी एक झलक देख सके। पत्रिका की एक रिपोर्ट ....।
बाबा महाकाल की इस बार निकली १० सवारी निकली। हर सवारी में ३ से ४ लाख लोगों की भीड़ जुटी थी। हर सवारी में सबसे बड़ी समस्या सामने आई कि भक्तों को पालकी में विराजित बाबा के दर्शन ही नहीं हो पा रहे थे। इसके लिए पूरे सवारी मार्ग पर भक्तों में जद्दोजहद तो आगे आने के लिए धक्कामुक्की होती रही। यहां तक कि सवारी के दौरान झगड़े, मारपीट तक के मामले सामने आए है। दअरसल पूरे सवारी मार्ग के दोनों ओर कम से ३० से ५० हजार भक्त खड़े थे। ऐसे में सवारी देखने के लिए लोग तीन से चार घंटे पहले से जगह रोकने पहुंचे थे। इसके बाद भी भीड़ इतनी थी अच्छे से दर्शन ही नहीं हो पाते सबसे ज्यादा परेशानी बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों ने उठाई। शाही सवारी के दौरान ६ फीट ऊंचे बैरिकेड्स ने ओर दिक्कत खड़ी की। इनके पीछे खड़े भक्त बाबा की पालकी के आसपास पंडे-पुजारी, वीआइपी तथा सरकारी कर्मचारियों की भीड़ के चलते दर्शन ही नहीं कर पाए। यह परेशानी बाबा की पालकी की ऊंचाई कम होने या खुली नहीं होने से है। दूर से सिर्फ पालकी दिखाई देती है बाबा नहीं। यही वजह है दर्शनों को लेकर आपाधापी मचती है। शाही सवारी के दौरान कई लोग घंटों खड़े रहने के बाद भी बगैर दर्शन कर लौटे।
इसलिए जरुरी है पालकी में बदलाव
- पहले ४०-५० हजार लोग सवारी देखने आते थे अब ३ से ४ लाख लोग पहुंच रहे।
- सवारी का मार्ग तय है और एक निश्चित जगह ही है। ऐसे में ज्यादा लोगों को एकत्र नहीं कर सकते।
- लाखों लोगों को बाबा के दर्शन करवाना है तो उन्हें खुले और ऊंचे मेंं रखना आवश्यक है।
- बाबा की पालकी ऐसी हो जिससे कम से कम १०० मीटर दूर से भी बाबा के दर्शन किए जा सके।
- बाबा की पालकी को ज्यादा भीड़ वाले स्थान पर कुछ ५ से १० मिनट खड़ा किया जाए। इसके लिए सवारी के समय में बढ़ोतरी हो।
पालकी में किए जाए ऐसे परिवर्तन
-बाबा की पालकी को डोल के रूप में निकाली जाए। पूर्व में डोल के रूप में ही सवारी निकलती थी। इसमें ज्यादा जगह के साथ ऊंचाई भी होती थी।
- पालकी को वर्तमान स्वरूप में रखा जाए लेकिन इसको एक नहीं चार खंबों पर उठाया जाए। इसके लिए हर खंबे पर स्टैंड दिए जा सकते हैं। जिससे पालकी की ऊंचाई बढ़ेगी।
- पालकी को किसी गाड़ी पर रखा जा सकता है। गाड़ी पर पालकी को उठाने के लिए कहार भी खड़े किए जा सकते हैं।
-पालकी की वतमान चौड़ाई, लंबाई बढ़ाकर ओर खुला किया जा सकता है।
लंबे समय से उठ रहीं मांग, नहीं फैसला
बाबा की पालकी की ऊंचाई बढ़ाने की मांग लंबे समय से प्रबुद्धजन करते आ रहे है। इसके पीछे मकसद यही कि अधिक से अधिक श्रद्धाुलु बाबा के दर्शन कर सके। परंपरा में छेड़छाड़ नहीं करने की बात कहकर इस पर निर्णय नहीं लिया जा सका। हालांकि इस बार पालकी की ऊंचाई महज ५-६ इंच अवश्य बढ़ाई लेकिन इसका कोई फायदा नजर नहीं आया। दरअसल पालकी को लेकर पंडे-पुजारी, प्रबुद्ध वर्ग के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को आगे आना होगा। इसके लिए अभी से प्रयास शुरू होंगे तो पालकी में बदलाव को लेकर जनमानस तैयार हो सकेगा।
सवारी में हो चुके हैं कई बदलाव
- देश की आाजादी के बाद सवारी डोल स्वरूप में निकलती थी बाद में पालकी में निकली।
- ६० वर्ष पहले सवारी महाकाल थाने के पास सिढिय़ों से होकर से रामघाट जाती थी।
- १५ साल पहले सवारी मार्ग छत्री चौक टंकी चौक से बढ़ाकर तेलीवाड़ा, कंठाल चौराहा होकर किया गया।
- कोविड के दौरान सवारी को महाकाल मंदिर के पीछे हरसिद़्धी से रामघाट ले जाया गया।

टॉपिक एक्सपर्ट
परंपरा से हटकर और राजनीतिक इच्छा शक्ति से होगा बदलाव
महाकाल सवारी में पालकी की ऊंचाई बढ़ाने की वर्तमान में बेहद जरुरत है। मैं वर्ष २०१६ से इसमें परिवर्तन के लिए प्रयासरत हूं। इंजीनियरों के माध्यम से एक चलित सुलभ दर्शन मंच की डिजाइन भी तैयार करवाई थी। यह लागू नहीं हो पार्ई। यदि इसे अमल में लाया जाता तो पालकी की ऊंचाई ८.५० से १० फीट बढ़ जाती। इस डिजाइन में पालकी के साथ कहार के साथ सारी आधुनिक सुविधाएं भी रहती। इससे लाखों भक्तों को आसानी से दर्शन हो सकते है। कोविड में जब सवारी दूसरे मार्ग से निकाल सकते हैं तो पालकी में बदलाव क्यों नहीं हो सकता। वास्तव में परंपरा के नाम पर और राजनीति इच्छा शक्ति की कमी से पालकी में परिवर्तन का निर्णय नहीं हो पा रहा है। लाखों लोगों की सुरक्षा और सुलभ दर्शन के लिए पालकी में परिवर्तन करना ही होगा। जब कभी हादसा होगा और फिर निर्णय लेंगे तो देर हो जाएगी।
- शैलेंद्र व्यास (स्वामी मुस्कुराके), प्राचार्य