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गोवर्धन सागर की जमीन अब सरकारी – एडीजे कोर्ट

कोर्ट ने तालाब की जमीन पर कब्जे को किया खारिज, एडीजे कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला: सर्वे नंबर १२८१/१/१ जोशी परिवार के स्वतत्व को नहीं स्वीकारा, न्यायालय में साबित नहीं हो सका कि गोवर्धन सागर की जमीन निजी है

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Govardhan Sagar's land is now government

कोर्ट ने तालाब की जमीन पर कब्जे को किया खारिजएडीजे कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला: सर्वे नंबर १२८१/१/१ जोशी परिवार के स्वतत्व को नहीं स्वीकारान्यायालय में साबित नहीं हो सका कि गोवर्धन सागर की जमीन निजी है

उज्जैन. गोवर्धन सागर की जमीन पर हुए कब्जे को लेकर जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला दिया है। इसमें सागर के सर्वे क्रमांक १२८१/१/१ की जमीन को निजी मानने से इनकार करते हुए इसे सागर की जमीन को सरकारी करार दिया है। वहीं मामले में कब्जेधारी जोशी परिवार द्वारा प्रस्तुत जमीन के स्वामित्व को भी सही नहीं माना है। न्यायालय के इस फैसले से गोवर्धन सागर की जमीन पर हुए अवैध कब्जों को हटाना अब प्रशासन के लिए आसान होगा।
गोवर्धन सागर की जमीन पर आधिपत्य को लेकर कब्जेधारी अनिल जोशी ने न्यायालय में वाद दायर किया था। जोशी ने न्यायालय को सर्वे नंबर १२८१/१/१ आधिपत्य होने का दावा करते हुए पारिवारिक संपत्ति बताया था। वहीं ८० वर्ष से कब्जा होने की बात कही थी। इस मामले में पूर्व में कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को भी चुनौती दी गई थी।
कोर्ट में जोशी ने ङ्क्षसधिया स्टेट के समय परिवार द्वारा दिए जाने वाले ७५ रुपए मातलव जमा करना भी बताया। साथ ही प्रशासन पर गलत नोटिस जारी करने की बात भी कही। जोशी के इस तर्क को शासकीय वकील मनीष गोयल द्वारा अमान्य करते हुए बताया गया कि मातलव की जो राशि जमा की गई उसके सर्वे क्रमांक १२०५ के संबंध में कोई उल्लेख नहीं है। यह भी नहीं माना कि वादी के पिता मुन्नालाल १९३५ तक काबिज होकर कृषि कार्य कर रहे थे। यही नहीं जोशी द्वारा पूर्वजों के नाम रेयत पटटेदार, मामूली मौरुसी, गैर मौरुसी व पुख्ता मौरुसी के रूप में भी दर्ज नहीं होना पाया गया। वहीं न्यायालय में गोवर्धन सागर की जमीन को मिल्कियत सरकार म्यूनसिपल कमेटी होना बताते हुए वर्ष १९२७ तक शासकीय भूमि बताया गया। ऐसे में कोर्ट द्वारा पूर्व न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय में कोई त्रुटि नहीं मानते हुए अनिल जोशी की अपील को खारिज कर दिया।
तालाब की भूमि सरकारी
न्यायालय में विवादित भूमि को गोवर्धन सागर की भूमि होना बताया गया। इस पर कहा गया कि भूराजस्व संहिता की धारा २५१ के अनुसार तालाब की भूमि संहिता लागू होने के पश्चात शासकीय भूमि होना मानी जाएगी। इसमें वादग्रस्त भूमि सर्वे क्रमांक १२८१/१/१ भूमि पर अनिल जोशी अपना स्वामित्व प्रमाणित नहीं कर पाए ऐसे में यह भूमि तालाब की भूमि होकर शासन में निहित मानी जाएगी।
वर्ष १९७४ में ६.३२२ हेक्टेयर जमीन बेच दी
न्यायालय में विवादित भूमि सर्वे क्रमांक १२८१/१/१ कुल रकबा ७.२८६ हेक्टयर मनमोहन पिता मन्नुलाल के नाम थी। इस भूमि में से ६.३२२ हेक्टयर जमीन को वर्ष १९७४ में बेच दी। शेष ०.९६४ भूमि मनमोहन ने अपने पास रखी। इसमें बेची गई भूमि तालाब की भूमि थी। बताया जा रहा है कि यह जमीन एक गृह निर्माण संस्था को बेची गई।
गोवर्धन सागर की सर्वे क्रमांक १२८१/१/१ विवादित जमीन पर न्यायालय ने वादी अनिल जोशी की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने विवादित जमीन को तालाब की जमीन माना। इस फैसले से प्रशासन अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकेगा।
- मनीष गोयल, सरकारी अभिभाषक