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सरकारी स्कूल… ऐसी सुविधा कि निजी स्कूल भी पीछे छूट रहे

सकारात्मक सोच के साथ किया बच्चों का भविष्य बनाने का अभिनव प्रयास

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Government schools ... such a facility that even private schools are l

सकारात्मक सोच के साथ किया बच्चों का भविष्य बनाने का अभिनव प्रयास

आगर-मालवा (दुर्गेश शर्मा) सकारात्मक विचारों के साथ यदि कोई प्रयास किया जाता है, तो उसमें सफलता भी मिलने लगती है। अमुमन शासकीय स्कूलों को लेकर आम लोगों में धारणा गलत ही रहती है, लेकिन आगर का मॉडल स्कूल ऐसी तमाम धारणाओं को सीरे से खारिज करता हुआ दिखाई दे रहा है। अपने विद्यार्थियों को अच्छे मुकाम तक पहुंचाने के लिए स्कूल के शिक्षक आए दिन नवाचार करते रहते है। बच्चो का भविष्य संवारने एवं प्रतियोगी परीक्षाओं का अभ्यास कराने के लिए स्कूल में पदस्थ शिक्षकों द्वारा एक अभिनव पहल बगैर किसी शासकीय मदद के आरंभ करते हुए बच्चों के लिए स्कूल परिसर में ही एक लायबे्ररी बनाई और उसमें प्राचीन भारत, भूगोल, महापुरुषों की जीवन गाथा पर आधारित तथा प्रतियोगी परीक्षा से संबंधित पुस्तकें एकत्रित करने के लिए एक पुस्तक दान करो अभियान चलाया, जिसके सार्थक परिणाम भी सामने आने लगे। बड़े-बड़े अधिकारी तथा ऐसे प्रतिष्ठित लोग जिनके बच्चों ने महंगे संस्थानों से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियां की वे लोग भी अब मॉडल स्कूल में पुस्तके दान कर रहे है, जिसका सीधा-सीधा लाभ यहां के विद्यार्थियों को मिल रहा है।
कृषि उपज मंडी के पास संचालित शासकीय मॉडल स्कूल को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह भी एक शासकीय स्कूल होगा। स्कूल में प्रवेश करते ही स्वच्छता अपने आप में स्कूल की व्यवस्थाओं को दर्शाती हुई दिखाई देती है। वहीं विद्यार्थियों के लिए स्कूल में जो संसाधन और सुविधाएं मौजूद है वो निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ रही है। अमुमन शासकीय स्कूलों को लेकर एक आम धारणा होती है कि न तो वहां ठीक से पढ़ाई हो पाती है और न ही व्यवस्थाएं विद्यार्थियों के अनुरूप रहती है, लेकिन जिला मुख्यालय पर स्थित शासकीय मॉडल स्कूल निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहा है। निजी स्कूलों के बच्चे भी इस स्कूल में दाखिला लेने के लिए आतुर रहते है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में विभिन्न निजी स्कूलों से दाखिला निकलवाकर करीब 94 बच्चों ने मॉडल स्कूल में दाखिला लिया है। वर्ष 2011 में मॉडल स्कूल की स्थापना की गई थी। यह स्कूल नरवल मार्गस्थित अपने भवन में वर्ष 2014 से संचालित होने लगा। जैसा इसको नाम दिया गया था उसी तर्ज पर स्कूल में व्यवस्थाएं होने लगी। धीरे-धीरे स्थिति यह बनी कि आज यह स्कूल शहर के तमाम निजी स्कूलों को पीछे छोड़ रहा है। वर्तमान में स्कूल में 396 विद्यार्थी अध्ययनरत है। यदि यहां के पिछले 4 साल के परीक्षा परिणामों को देखा जाए तो कक्षा 10वीं में वर्ष 2015 में 90 प्रतिशत, 2016 में 82 प्रतिशत, 2017 में 85 प्रतिशत एवं 2018 में 92 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा। कक्षा 12वीं में 2015 में 88 प्रतिशत, 2016 में 76 प्रतिशत, 2017 में 85 प्रतिशत और 2018 में 80 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा।
सबसे पहले प्राचार्य ने की पहल
स्कूल में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए लायबे्ररी की स्थापना करने में आर्थिक समस्याएं आ रही थी। इसी बीच सभी शिक्षकों ने एकमत होकर इसे जनजागृति अभियान के रूप में लाने की शुरुआत की। शुरुआत में प्राचार्य संजीव उपाध्याय ने उनके बच्चों द्वारा प्रतियोगी परीक्षा के दौरान तैयार किए गए नोट्स तथा पुस्तकें लाकर लायबे्ररी में रखी। इसी तरह सहायक परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केंद्र विक्रमसिंह पंवार ने भी पुस्तकें लाकर लायबे्ररी में रखी। शिक्षक संतोष मालवीय, नरेन्द्र कुल्मी, दीपक शर्मा, रमजान एहमद खान, अर्चना भटनागर, मनीष श्रृंगी, विजय भालेकर, लव पाटीदार ने भी पुस्तकें दान की, साथ ही उत्कृष्ट उमावि के प्राचार्य नंदकिशोर कारपेंटर ने भी पुस्तकें देने का वादा किया। ऐसे करके विद्यार्थियो के लिए स्कूल परिसर में ही एक लायबे्ररी तैयार हो गई।
जिला अधिकारियों से भी करेंगे संपर्क
जब शिक्षकों से चर्चा की तो उन्होंने बताया एक पुस्तक दान करो अभियान के तहत् हम लोग अधिकारियों से भी संपर्क करेंगे और उनसे पुस्तके दान करवाने का अनुरोध करेंगे। प्राचार्य ने बताया एक ओजस गु्रप बनाया गया है, जिसमें जिले के 54 अधिकारी बारी-बारी से सप्ताह में 2 दिन स्कूल आएंगे और विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा करेंगे।
ड्रीप सिस्टम से किया गार्डन विकसित
स्कूल परिसर में गार्डन विकसित करने के लिए एक दानदाता द्वारा ड्रीप सिस्टम दान कर दिया तो शिक्षकों तथा विद्यार्थियो ने मेहनत करते हुए स्कूल परिसर में एक गार्डन विकसित कर दिया। देखते ही देखते गार्डन के पेड़-पौधे विकसित होने लगे।
आरएफ आईडी कार्ड बनाए बच्चों के
स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए यहां एक नवाचार कर एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया, जिससे बच्चे के स्कूल में आने एवं जाने की सूचना स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ परिजनों को भी उसी समय मिलती रहेगी। इसके लिए प्रत्येक विद्यार्थी का आरएफ आईडी कार्ड बनाया गया जो की मशीन पर बारकोड स्केन होते ही उपस्थिति दर्ज करने के साथ-साथ इसकी सूचना परिजनों को भी उपलब्ध कराएगा, जिससे बच्चों के अभिभावकों को भी जानकारी स्वत: मिलती रहेगी उनका बच्चा कितनी बजे स्कूल पहुंचा है और कितनी बजे स्कूल से रवाना हुआ है।
छात्राओं के लिए भी किया नवाचार
मॉडल स्कूल में अध्ययनरत छात्राओं के लिए भी स्कूल प्रबंधन ने नवाचार किया है। छात्राओं के लिए यहां पैड मशीन एवं इंसीलेटर मशीन भी महिला सुविधा घर में स्थापित की गई है, जिससे छात्राओं को मासिक समस्या के समय परेशान नहीं होना पड़ेगा और स्कूल में एक स्वच्छता का वातावरण भी बनेगा। स्कूल का अपने आप में एक अलग डे्रसकोड है। स्कूल में आरओ लगा हुआ है जिससे हर समय स्वच्छ पानी उपलब्ध होता है। यहां अध्ययनरत बच्चों के मोबाइल लाने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा हुआ है।
हिन्दी-अंग्रेजी दोनों माध्यम से होती है पढ़ाई
मॉडल स्कूल में कॉमर्स, आर्ट, साइंस, मैथ्स, बायो विषयों के लिए हिन्दी-अंग्रेजी दोनों माध्यम से पढ़ाई करवाने की व्यवस्था है, लेकिन अधिकांश विद्यार्थी हिन्दी माध्यम से आए हुए है इसलिए यहां हिन्दी माध्यम मे ही पढ़ाई करवाई जा रही है। स्कूल में अत्याधुनिक लेबोरेट्री भी है, जिसके माध्यम से प्रायोगिक कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहते है।
बिजली व्यवस्था में आत्मनिर्भर
मॉडल स्कूल बिजली व्यवस्था के मामले में आत्मनिर्भर होने की प्रक्रिया पूर्ण कर चुका है। स्कूल भवन की छत का उपयोग करते हुए यहां सोलर प्लेट स्थापित की गई है, जिससे स्कूल में बिजली व्यवस्था हमेशा बनी रहेगी, जिसके लिए 32 प्लेट लगाई गई है और इससे 10 केवी विद्युत उत्पादन होगा, जिसका उपयोग स्कूल के लिए ही किया जाएगा। अभी स्कूल में 10 हजार रुपए का मासिक बिल बिजली का आता है, उसकी भी बचत होगी।
सीसीटीवी से होती है निगरानी
मॉडल स्कूल के प्रत्येक कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है और इन कैमरों के माध्यम से प्राचार्य अपने कक्ष में बैठे-बैठे निगरानी करते है। सीसीटीवी कैमरे लगाने का मुख्य उद्देश्य स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रखना है। स्कूल के विद्यार्थी भी अनुशासित रहते है और परिसर को हमेशा स्वच्छ बनाए रखते है।
विद्यार्थियों को उनके विषय से जुड़े हुए अध्ययन तो कराए ही जाते है साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हुई जानकारी भी स्कूल में उपलब्ध कराई है। शिक्षकों ने परस्पर समन्वय के साथ यहां लायबे्ररी की स्थापना की है, जिसे एक पुस्तक दान करो अभियान नाम दिया गया है इस लायब्रेरी से बच्चों को भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ मिलेगा।
-संजय उपाध्याय, प्रभारी प्राचार्य शासकीय मॉडल स्कूल आगर