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ऐसा क्या हुआ कि…इस धार्मिक शहर की पहचान गंदे शहरों में होने लगी

स्मार्ट सिटी उज्जैन शहर में एेसे कई स्पॉट, जहां फैला रहता है कचरा

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उज्जैन। स्वच्छ सर्वेक्षण के बाद शहर की सफाई व्यवस्था फिर चरमराने लगी है। पहले चप्पे-चप्पे की मॉनिटरिंग से हालात सुधरे थे, लेकिन अब जैसे ही ढिलाई हुई, शहर के प्रमुख क्षेत्र गंदगी से पटे दिखाई देने लगे। तय स्पॉट से समय पर कचरा नहीं उठना, सड़क-नालियों की नियमित सफाई नहीं होना व शिकायतों के बावजूद निराकरण नहीं होना आम बात हो चली है। मंगलवार को ही निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने स्वास्थ्य अमले की बैठक में सफाई इंतजामों में सुधार की जरूरत बताई थी। उनकी ये बात सही भी साबित हो रही है। बुधवार को पत्रिका ने शहर के कुछ प्रमुख स्पॉट देखे तो वहां कचरा फैला हुआ मिला।

सवाल यही है कि निगम के १५०० से अधिक स्थायी-अस्थायी सफाई कर्मियों के अलावा जब निजी कंपनियों के कर्मी भी इस काम में जुटे हैं तो फिर क्यों शहर चकाचक नजर नहीं आता। ये स्थितियां इन कंपनियों के कर्मचारियों की लापरवाही व संख्या बताने में अनियमितता का प्रमाण है। जबकि आदेश है कि कंपनियों को अपने कर्मियों कि बॉयोमीट्रिक उपस्थिति देना है तभी उन्हें भुगतान मिलेगा।
बाखल में कचरा लेने वाला इ रिक्शा बंद, रमजान में परेशान बोहराजन

वार्ड १४ के मोहम्मदपुरा बाखल की तंग गलियों में कचरा कलेक्शन करने वाला इ रिक्शा कई दिनों से बंद पड़ा है। रमजान माह होने से बोहराजनों को काफी परेशानी हो रही है। लोग कंट्रोल रूम पर इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सेवा बहाल नहींं हुई। कचरा कलेक्शन नहीं होने से बाखल में यहां वहां गंदगी फैली रहती है। पवित्र माह में इस तरह के हालातों सभी रहवासी परेशान हैं लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।

ऐसे हैं हालात

- रामघाट पहुंच मार्ग पर रामानुजकोट के सामने कचरे का कंटेनर रखा हुआ है। यहां फैला कचरा, समय पर कचरा नहीं उठने के कारण बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के सामने शहर की छवि खराब होती है। अक्सर यहां ये हालात देखे जा सकते हैं।
- मंछामन कॉलोन चौराहा पर निगम ने कचरा ठिया बना रखा है। यहां छोटी गाडि़यां खाली होती हैं। यहां भी गंदगी सड़क किनारे पड़ी रहती है। आसपास के रहवासी कई बार शिकायत दे चुके हैं, लेकिन ये समस्या खत्म नहीं होती। स्वच्छता रैंकिंग आने से पहले ही शहर में इस तरह की स्थिति चिंताजनक है।