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महाकाल को चढ़ेगा हर्बल गुलाल, देश में सबसे पहले यहीं मनाई जाती है होली

holi festival in mahakaleshwar jyotirlinga temple- परंपराः हिन्दू धर्म के सभी त्योहार सबसे पहले महाकाल के आंगन में मनाए जाते हैं...।

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उज्जैन। हिन्दुओं धर्म के कोई भी त्योहार हों, सबसे पहले महाकाल के आंगन में मनाए जाते हैं। इसके बाद दुनियाभर में इसको मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस बार महाकाल के आंगन में होली का त्योहार धूमधाम से मनाए जाएगा, क्योंकि इस बार कोरोना की कोई लहर नहीं हैं, फिर प्रशासन कोविड नियमों का पालन जरूर कराएगा।

महाकाल (mahakaleshwar jyotirlinga) में होली उत्सव की शुरुआत गुरुवार शाम से ही हो जाएगी। शाम को होलीका दहन किया जाएगा। इसके दूसरे दिन शनिवार को भस्म आरती के बाद महाकाल को रंग-गुलाल के साथ होली का पर्व मनाया जाएगा। महाकाल की नगरी उज्जैन में सभी त्योहार मनाए जाते हैं। दीपावली, रक्षाबंधन और होली। यह सभी त्योहार पहले महाकाल मंदिर में ही मनाए जाते हैं। महाकाल के सबसे पहले त्योहार मनाने के बाद ही उज्जैन के लोग त्योहार मनाते हैं। क्योंकि महाकाल को राजा माना गया है।

पिछले ढाई वर्षों में यह पहला मौका है जब होली पर कोरोना का कोई विशेष खतरा नहीं हैं। इसलिए इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एकत्र होने की उम्मीद है। 17 मार्च को शाम 7 बजे होलिका दहन का कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद सुबह 4 बजे भस्म आरती के बाद भगवान के साथ गुलाल की होली खेली जाएगी। उन्हें हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके लिए टेसी के फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही रंगपंचमी पर भी ऐसी ही परंपरा है। यहां फूलों की होली खेली जाएगी। मान्यता है कि महाकाल के दरबार में होली में पूजा-अर्चना करने से दुख, दरिद्रता और संकट दूर हो जाते हैं।

कोरोनाकाल में सिर्फ पुजारियों ने खेली होली

इससे पहले कोरोना काल में कई पाबंदियों और लॉकडाउन के चलते केवल पुजारियों ने ही भगवान के आंगन में त्योहार मनाए थे। पुजारियों ने ही भगवान के साथ होली खेली थी। श्रद्धालु होली उत्सव में शामिल नहीं हो पाए थे। अब इस साल सभी प्रतिबंध हटा लिए गए हैं। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दरबार में पहुंच सकते हैं। हालांकि प्रशासन कोविड गाइडलाइन के मुताबिक सोशल डिस्टेंसिंग और दो गज की दूरी के नियम का पालन करा रहा है।

18 मार्च का समय

प्रथम भस्म आरती- प्रा‍त: 04:00 से 06:00 बजे तक,
द्वितीय दद्योदक आरती प्रा‍त: 07:00 से 07:45 बजे तक,
तृतीय भोग आरती प्रा‍त: 10:00 से 10:45 बजे तक,
चतुर्थ संध्‍या पूजन सायं 05:00 से 05:45 बजे तक,
पंचम संध्‍या आरती सायं 07:00 से 07:45 बजे
शयन आरती रात्रि 10:30 ये 11:00 बजे तक

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