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Video महाकाल की संध्या आरती में आज भी जलती है वर्षों पुरानी मशाल

राजाधिराज भगवान महाकाल के दरबार में हर आरती अनूठी होती है। प्रतिदिन संध्या आरती के समय नगाड़े, शंख, झालर और घंटियों की मधुर गूंज सुनाई देती है। 

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Lalit Saxena

Jun 17, 2016

In ujjain mashal torched in mahakal sandya aarti

In ujjain mashal torched in mahakal sandya aarti

उज्जैन. राजाधिराज भगवान महाकाल के दरबार में हर आरती अनूठी होती है। प्रतिदिन संध्या आरती के समय नगाड़े, शंख, झालर और घंटियों की मधुर गूंज सुनाई देती है। इतना ही नहीं यही एकमात्र ऐसी आरती है, जिसमें वर्षों पुरानी परंपरा का भी निर्वाह किया जाता है।

कई रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं
उज्जैन के राजा भगवान महाकालेश्वर की महिमा बड़ी निराली है। दिनभर में वे कई रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। तड़के 4 बजे प्रतिदिन भस्म आरती, फिर प्रात:कालीन आरती, दद्योदक आरती, भोग आरती, संध्या कालीन आरती, शयन आरती। इन सभी के दर्शन करना अपने आपमें अद्भुत होता है।

In ujjain mashal torched in mahakal sandya aarti

शुभ माना जाता है मशाल जलाना
मंदिर के पुजारी अशीष गुरु ने बताया कि विभिन्न आरतीयों में एक संध्या आरती ऐसी है, जिसमें वर्षों पुरानी मशाल आज भी जलाई जाती है। पहले के समय लाइटें नहीं होती थीं, तो राजा के महलों में मशालची द्वारा मशालें ही जलाई जाती थीं। इसे शुभ माना जाता है। साथ ही यह एक प्रकार के राजा के वैभव का भी सूचक मानी जाती है। अब राजा तो रहे नहीं, इसलिए भगवान महाकाल को राजा के स्वरूप में मानकर मंदिर में संध्या आरती के दौरान मशाल जलाई जाती है।

इधर बजते हैं नगाड़े
संध्या आरती के समय नगाड़े की मधुर आवाज भक्तों को आनंदित कर देती है। महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार के ऊपर एक ऐसा स्थान बना हुआ है, जहां शहनाई और नगाड़े बजाने वाले बैठते हैं। जैसे ही मंदिर के अंदर आरती शुरू होती है, वैसे ही ये लोग नगाड़ा और शहनाई बजाने लग जाते हैं। यही कारण है कि मंदिर के इस द्वार का नाम शहनाई द्वार पड़ा।

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