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कालभैरव को लगेगा 56 भोग, सिंधिया परिवार की पगड़ी पहनेंगे बाबा

6 सितंबर को सवारी की तैयारियां, कलेक्टर करेंगे पूजन, 15 किलो चांदी से बना मां हरसिद्धि का आलीशान सिंहासन

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6 सितंबर को सवारी की तैयारियां, कलेक्टर करेंगे पूजन, 15 किलो चांदी से बना मां हरसिद्धि का आलीशान सिंहासन

उज्जैन। डोल ग्यारस के मौके पर 6 सितंबर को भैरवगढ़ में श्री काल भैरव की सवारी यात्रा निकलेगी। इसकी मंदिर में तैयारियां चल रही है। मुख्य पुजारी धर्मेंद्र सदाशिव चतुर्वेदी ने जानकारी देते हुए बताया मंदिर में सजावट का काम चल रहा है। रंगीन विद्युत रोशनी की जाएगी और विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
सुबह भगवान काल भैरव का पंचामृत से अभिषेक होगा। भैरव सहस्र नामावली का पाठ भी किया जाएगा। भगवान का दिव्य शृंगार होगा व ५६ भोग लगाया जाएगा। सोने-चांदी के आभूषण से भगवान काल भैरव सजेंगे और परंपरा अनुसार बाबा को सिंधिया परिवार की ओर से पगड़ी अर्पित की जाएगी। भगवान महाकाल के सेनापति की आरती होगी। कलेक्टर आशीष सिंह पूजन करेंगे। इसके पश्चात बाबा की सवारी ढोल, बैंड, झांकी, अखाड़े, ध्वज, रंगीन रोशनी, हाथी, घोड़े, बग्घी के साथ निकलेगी। चांदी की पालकी में भगवान भैरवनाथ का मुखौटा निकलेगा। सवारी मंदिर से जेल चौराहे पर पहुंचेगी, यहां जेल अधीक्षक द्वारा पूजन किया जाएगा। इसके पश्चात नया बाजार, भैरवगढ़ नाका, माणक चौक, महेंद्र मार्ग होते हुए सिद्धवट पहुंचेगी यहां पर मां शिप्रा व भगवान सिद्धनाथ महाराज का पूजन किया जाएगा। इसके पश्चात सवारी बृजपुरा होते हुए जेल तिराहा से काल भैरव मंदिर आकर समाप्त होगी। समापन में भगवान की आरती की जाएगी।

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हरसिद्धि मंदिर: गुजरात व मुंबई के यजमान ने बनवाकर किया दान

देश के 52 शक्तिपीठों में एक उज्जैन की प्रसिद्ध मां हरसिद्धि शनिवर को 15 किलो चांदी से बने नए सिंहासन पर विराजित की गई। हरसिद्धि मंदिर के मुख्य पुजारी राजू गुरु गोस्वामी के यजमान एवं मां हरसिद्धि सेवा समिति गुजरात एवं मुंबई के सहयोग से यह चांदी का सिंहासन बनवाकर मंदिर में दान किया गया है। पुजारी राजू गुरु गोस्वामी ने बताया कि पुजारी परिवार की पिछले काफी समय से इच्छा थी कि मां हरसिद्धि के लिए चांदी का सिंहासन तैयार कराया जाए। इसके लिए वे प्रयासरत थे। उन्होंने इस कार्य के लिए अपने यजमान से चर्चा की और मां हरसिद्धि के आशीर्वाद से यजमान इसके लिए तैयार हो गए। लाखों रुपए के खर्च से यह आकर्षक सिंहासन बनकर तैयार हुआ। खास बात यह है कि इसे उज्जैन के ही कलाकारों ने बनाया है। इस कार्य में लगभग 15 किलो चांदी लगी है। उल्लेखनीय है कि मंदिर में मां हरसिद्धि के लिए पूर्व में सिंहासन नहीं था। इसके लिए पुजारी परिवार की इच्छा थी कि मां हरसिद्धि चांदी के सिंहासन पर विराजित हो। अब जाकर उनकी यह कामना पूर्ण हुई और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सिंहासन का विधिवत पूजन-अर्चन कर इसके मंदिर में स्थापित कर मां हरसिद्धि को चांदी के सिंहासन पर विराजित किया गया।