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कालिदास संकुल हॉल का किराया यदि 15 हजार किया, तो करेंगे विरोध

कला-संस्कृति से जुड़ी एक दर्जन से ज्यादा संस्थाओं ने अपेक्षित किराया वृद्धि का किया विरोध

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कला-संस्कृति से जुड़ी एक दर्जन से ज्यादा संस्थाओं ने अपेक्षित किराया वृद्धि का किया विरोध

उज्जैन. भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में पहचाने जाने वाले शहर के कला जगत के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। कला-संस्कृति से जुड़ा हर व्यक्ति पुराने वैभव को पाने को लालायित है, तन-मन-धन से जुटा है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां उनके लिए सुविधा से ज्यादा दुविधा बन रही हैं। शहर की 12 से ज्यादा संस्थाओं ने एक सुर में मांग की है कि प्रस्तावित किराया नहीं बढ़ाया जाए। वर्तमान में किराया 3 से 5 हजार रुपए प्रतिदिन है। लेकिन इसे बढ़ाकर 15 हजार किए जाने की बात सामने आ रही है, जिसे लेकर संस्थाएं विरोध करने की योजना बना रही हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जिस कालिदास अकादमी के पं. सूर्यनारायण व्यास संकुल हॉल से दुनिया को पारंपरिक आयुर्वेद से स्वास्थ्य का मंत्र देने जा रहे हैं। वह अकादमी और ऑडिटोरियम कला की परंपरा को प्रोत्साहित करने के लक्क्ष्य से हाथ खींच रहा है। कला जगत की स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ सरकार से अपेक्षा है कि उज्जैन की सांस्कृतिक राजधानी की पहचान बरकरार रहे। कला के प्रदर्शन और युवा पीढ़ी को जोड़े रखने के लिए सुविधाएं आसानी से उपयुक्त दरों पर दी जाए। 20 से ज्यादा रजिस्टर्ड संस्थाएं शहर में कला जगत से जुड़ी 20 रजिस्टर्ड संस्थाएं हैं। इनमें 10-12 रंगमंच से जुड़ी हैं। इनसे 500 से अधिक सक्रिय कलाकार जुड़े हैं। संस्थाएं वर्षभर में करीब 100 छोटे-बड़े आयोजन करती है। साथ ही साल में एक बार सात दिवसीय कालिदास समारोह होता है, जो सरकार कराती है। चिंता की बड़ी वजह कला जगत में चर्चा है कि कालिदास अकादमी के संकुल हॉल के एक दिन का किराया 15 हजार रुपए किया जा रहा है। यह किराया किसी भी कला संस्था के लिए वहन करना मुश्किल है। बमुश्किल चंदा कर या सहयोग राशि एकत्रित कर होने वाले आयोजन में यह किराया भारी पड़ेगा। इससे कई संस्थाओं के आयोजन बंद हो सकते हैं। इतना ही नहीं रिहर्सल के नाम पर 150 रुपए वसूले जा रहे हैं।
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सुनिए सरकार... कला जगत की गुहार
उज्जैन की कला संस्थाओं को सरकार का संबल मिल जाए तो देश-दुनिया में नाम ऊंचा कर सकते हैं। दोहरे मापदंड के चलते सरकारी आयोजन पर करोड़ों खर्च किए जा रहे जबकि स्थानीय कलाकारों तव्वजो नहीं दी जा रही। यदि संकुल हॉल का किराया बढ़ा तो यह कला-संस्कृति के ताबूत में आखिरी कील होगी।
- राजेंद्र चावड़ा, सचिव, रंग उत्सव
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नहीं हो व्यावसायिकरण
कालिदास अकादमी स्थित संकुल हॉल का व्यावसायिकरण नहीं होना चाहिए। कलाकारों के साथ संस्थाओं की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि इतना अधिक किराया वहन कर सके।
्र-शिव हरदेनिया, डायरेक्टर स्वरांगन म्यूजिक ग्रुप
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मूल उद्देश्य से भटक रही अकादमी
पं. सूर्यनारायण व्यास ने कला-संस्कृति के उत्थान को यह जमीन दान की थी, लेकिन किराया बढ़ाकर अकादमी मूल उद्देश्य से ही भटक रही है। 15 वर्षों के दौरान हुई इसकी दुर्गति हुई, उसे देख मन रो पड़ता है।
- मनीषा व्यास, रंगकर्मी
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किराया बढऩे से आयोजन तो दूर की बात है, रिहर्सल करने पर भी 100 बार सोचना पड़ेगा। इसका विरोध करते हैं। - श्री सर्वोत्तम संगीत एवं नृत्य अकादमी
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कला जगत के लिए सिर्फ दो सभागार
महाकवि कालिदास, कलाप्रेमी सम्राट विक्रमादित्य के शहर में कला जगत के लिए सिर्फ दो सभागार है, वे भी सरस्वती की बजाय लक्क्ष्मी के पुजारी हो रहे हैं। दु:खद है। - पंकज आचार्य, प्रतिभा परख नाट्य मंच शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान
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हमारे साथ कोई नहीं
कलाकारों के साथ न जनप्रतिनिधि है, न ही सरकार सोचती है। हम किससे अपना दर्द साझा करें। मदद की अपेक्षा सिर्फ इतनी है कि कम से कम किराया मत बढ़ाओ। जितेंद्र टटवाल, प्रेसिडेंट, माइम एजुकेशन सोसायटी
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इन्होंने भी कही अपनी बात...
- गौरीशंकर दुबे, अध्यक्ष, वाइस ऑफ फ्रेंड्स क्लब ने कहा कला जगत शहरवासियों के लिए नि:शुल्क अनूठे आयोजन करता है। किराया बढऩे से कलाकारों पर भार बढ़ेगा, जिसे वहन करने में वे सक्षम नहीं हैं।
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- प्रीति दीक्षित, संचालिका, हारमोनियम बिट्स का कहना है कला का केंद्र कालिदास अकादमी संकुल हॉल में हर हाल में कलाकारों के लिए सुलभ रहे। इसका किराया बढऩे से कई कलाकारों पर अस्तित्व का खतरा मंडराने लगेगा।
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- संतोष सर, डायरेक्टर एनएसके म्यूजिकल ग्रुप ने बताया वर्तमान किराया देने के लिए ही कलाकार जैसे-तैसे प्रयास करते हैं। किराया बढऩे से कला जगत का हौसला कमजोर होगा। इसके उलट रिहर्सल के लिए नि:शुल्क जगह उपलब्ध कराएं।
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जयेंद्र रावल, अध्यक्ष गीत आर्ट एवं म्यूजिक अकादमी का कहना है अभी केवल सूचनाभर से कलाकारों में रोष है। कालिदास अकादमी में न कला के लिए स्थान है और न कलाकारों के लिए। यह विडंबना है।
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निनाद नृत्य अकादमी की डायरेक्टर पलक पटवर्धन ने कहा शहर को पहचान देने वाले कलाकार बगीचों, चौराहों या घरों की छतों पर रिहर्सल को मजबूर हैं। किराया बढ़ा तो कला- संस्कृतिक से जुड़े आयोजन बंद हो जाएंगे।
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लोककला और कलाकारों के हित में किराया नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। जिम्मेदार मंथन कर ही किसी निर्णय पर पहुंचे। त्रिनेत्रा सांस्कृतिक संस्थान
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वर्तमान में संकुल हॉल का किराया नाममात्र है। फिलहाल इसका किराया नहीं बढ़ाया जा रहा है, अभी सिर्फ इस विषय को लेकर चर्चा चल रही है।
- संतोष पंड्या, निदेशक कालिदास संस्कृत अकादमी