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मूर्तियों में साकार हो रहा महाकवि कालिदास का कुमारसंभवम्

समरस कला शिविर...मिट्टी के आकार को साकार करने में जुटे कलाकार, कालिदास साहित्य को टेराकोटा शैली में उतारने का प्रयास, कुमारसम्भवम् का शिल्पांकन

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Kalidas Literary Camp artist making sculptures

समरस कला शिविर...मिट्टी के आकार को साकार करने में जुटे कलाकार, कालिदास साहित्य को टेराकोटा शैली में उतारने का प्रयास, कुमारसम्भवम् का शिल्पांकन

उज्जैन। कालिदास अकादमी परिसर में इन दिनों कलाकार अपने हाथों से मिट्टी को नए-नए आकार व स्वरूप देने में लगे हुए हैं। मप्र संस्कृति परिषद द्वारा कुमारसम्भव पर केन्द्रित टेराकोटा मूर्तिकला का यहां पर 15 दिवसीय समरस कला शिविर का आयोजन 22 फरवरी से 7 मार्च तक किया जा रहा है।
अकादमी के प्रभारी निदेशक डॉ. सन्तोष पण्ड्या व उपनिदेशक डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया ने बताया कि गांवों, कस्बों में परम्परा से मिट्टी शिल्प के सृजन हो रहे हैं। कलाकार कालिदास साहित्य को टेराकोटा शैली में उतारने का प्रयास कर रहे हैं। ये कलारसिकों के लिए अनूठा अनुभव है।

प्राचीन काल से है टेराकोटा विद्या
कालिदास अकादमी में 15 दिवसीय समरस कला शिविर में मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर प्राचीन सभ्यता का परिचय करवाया जा रहा है। क्योंकि सदियों से हम मिट्टी के शिल्प, आभूषण, बर्तन बनाते आ रहे हैं। टेराकोटा प्राचीन विद्या है। प्रत्येक युग में इसका विकास होता रहा है। प्राचीनकाल में मुद्राएं, बर्तन आदि मिट्टी से ही बनाए जाते रहे हैं। इससे मिट्टी का महत्व स्पष्ट होता है।

नई पीढ़ी को मिट्टी से साक्षात्कार कराना प्रमुख उद्देश्य
प्रभारी निदेशक डॉ. सन्तोष पण्ड्या ने कहा कि अकादमी अपनी स्थापनाकाल से ही प्राचीन कला आयामों के संवर्धन तथा नई पीढ़ी के साक्षात्कार कराने के लिए विविध आयोजन करती है। मूर्तिविधा में टेराकोटा शैली में कुमारसम्भवम् का शिल्पांकन अभिनव संकल्पना है।

7 मार्च तक चलेगा शिविर
उपनिदेशक डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया ने बताया 15 दिवसीय शिविर 7 मार्च तक चलेगा। इसमें टीकाराम प्रजापति छतरपुर, नोनेलाल प्रजापति छतरपुर, मोहन प्रजापति छतरपुर, धनीराम प्रजापति छतरपुर एवं नारायण कुम्हार राजसमन्द (राजस्थान) एवं इनके सहयोगी कलाकारों द्वारा 15 दिनों तक कुमारसम्भवम् पर केन्द्रित मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है और शिविरार्थियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।