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कार्तिक पूर्णिमा: क्षिप्रा तट पर जगमगाए आस्था के दीप

इस एक दिन के स्नान से मिलता पुण्य फल

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इस एक दिन के स्नान से मिलता पुण्य फल

उज्जैन. धार्मिक नगरी में शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह जहां हजारों लोगों ने स्नान किया, वहीं शाम को रामघाट पर श्रद्धालु दीपदान करने पहुंचे। प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी कर ली है। अलग-अलग घाटों पर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई।

कार्तिक पूर्णिमा अपने आपमें अनूठी
शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन कार्तिक पूर्णिमा अपने आपमें अनूठी है। ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में वैसे तो हर मास की पूर्णिमा का महत्व होता है, लेकिन कार्तिक मास में आने वाली पूर्णिमा का महत्व अधिक होता है। शुक्रवार को पड़ रही पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को भी प्रिय होती है। इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र तीर्थ नदियों में स्नान व दान करने का बड़ा महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है। हालांकि यह प्रतिछाया स्वरूप होने से यहां नहीं दिखेगा, इसलिए इसका असर भी नहीं है। पं. व्यास ने बताया कि इसी दिन से उज्जैन में गदर्भराज का मेला भी लगता है, जिसमें देशभर के खरीदार और विक्रेता यहां पहुंचते हैं। कार्तिक मास के स्नान का क्रम एक मास चलता है, मान्यता है कि यदि कोई एक मास तक स्नान नहीं कर सके, तो अंतिम पांच दिन या फिर पूर्णिमा का ही स्नान कर ले तो उसे वही पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से काफ महत्वपूर्ण है। कार्तिक पूर्णिमा का दिन देवी-देवताओं को खुश करने का दिन होता है। इसीलिए इस दिन लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर और दान-दक्षिणा करके पुण्य कमाते हैं।