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जानिए उज्जैन में कौन-सी नदी लुप्त हो गई थी..अब करेंगे पुर्नजीवित

चंद्रभागा नदी के पुनर्जीवन अभियान में आज से शुरू होगा श्रमदान, उद्गम स्थल पर जुटेंगे लोग

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Know which river was lost in Ujjain..now will revive.

चंद्रभागा नदी के पुनर्जीवन अभियान में आज से शुरू होगा श्रमदान, उद्गम स्थल पर जुटेंगे लोग

उज्जैन। क्षिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाने के लिए क्षिप्रा नदी की सहायक नदी चंद्रभागा को पुनर्जीवित करने के लिए सोमवार से मोहनपुरा बडऩगर रोड पर नदी के उद्गम स्थल पर अभियान शुरू होगा। चंद्रभागा नदी कभी क्षिप्रा की तरह प्रवाहामन थी और इसके पानी से आसपास के किसान खेती करते थे।
क्षिप्रा नदी संरक्षण अभियान के तहत सोमतीर्थ कलस्टर के प्रभारी पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि नदी को पुर्नजीवित करने के लिए आसपास के ग्रामिणजनो ने संकल्प लिया है कि वो अन्य लोगों के सहयोग से इस सहायक नदी को पुराने स्वरूप में लाएंगे। एक बार नदी पुर्नजीवित होती हे तो इससे क्षिप्रा नदी के प्रवाहमान होने में सहायता मिलेगी। अभियान में उत्तराखंड राज्य के प्रमुख पर्यावरणविद, लेखक और पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी शामिल होंगे। शर्मा के मुताबिक 13 मार्च को उज्जैन में क्षिप्रा मित्रों का सम्मेलन आयोजित कर नदी को उज्जैन से लेकर आलोट तक 22कलस्टर में बांटकर कार्य योजना बनायी गई थी। उसी क्रम में सोमतीर्थ कलस्टर के तहत यह कार्य हाथ में लिया गया है। इस अभियान के तहत चंद्रभागा पुनर्जीवन का काम किया जाएगा। इसके तहत स्थान स्थान पर तालाब, स्टाप डैम बनाए जाएंगे और नदी को चौड़ा कर पौधारोपण भी किया जाएगा। इसके अलावा इसके कैचमेंट क्षेत्र में अन्य छोटी छोटी जल संरचनाओं का निर्माण भी किया जाएगा।
अभी बरसाती नाले के रूप में
चंद्रभागा नदी मोहनपुरा रेलवे पटरी के समीप से निकलकर मोहनपुरा, मुल्लापुरा, सदावल होते हुए कालीदास उद्यान के समीप सोमतीर्थ होते हुए क्षिप्रा नदी में मिलती हैं। अभी यह एक बरसाती नाले के रूप में हैं। क्षेत्र के पुराने लोगों का कहना है कि पूर्व में यह नदी बहती थी। इसके अलावा नागरिकों को जोड़कर जल स्त्रोतों के प्रति पूर्ववत भाव जागृत किया जाएगा।