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ऐसे थे हमारे शास्त्री जी, लोग प्यार से कहते थे नन्हे

लाल बहादुर शास्त्री पुण्यतिथि आज, इतिहास में ताशकंद समझौते के रूप में किया जाता है याद

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ऐसे थे हमारे शास्त्री जी, लोग प्यार से कहते थे नन्हे

लाल बहादुर शास्त्री पुण्यतिथि आज, इतिहास में ताशकंद समझौते के रूप में किया जाता है याद

उज्जैन. लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय उत्तर प्रदेश में मुंशी शारदाप्रसाद श्रीवास्तव के यहां हुआ था। पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। उन्होंने राजस्व विभाग में क्लर्क की नौकरी की थी। नाटे कद के कारण लोग प्यार से नन्हे कहकर बुलाते थे। वहीं इतिहास में ताशकंद समझौते के रूप में इन्हें सदैव याद किया जाता है।
शहर के वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमृतलाल अमृत ने उन्हें याद करते हुए कहा कि काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलते ही शास्त्री जी ने अपने नाम के साथ जन्म से चला आ रहा जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा के लिए हटा दिया और अपने नाम के आगे शास्त्री लगा लिया। भारत-पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौते की बात होते ही बरबस हमारे आंखों के समक्ष देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीजी की यादें प्रखर हो जाती हैं। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच शांति के लिए एक संधि की जरूरत महसूस की जा रही थी। युद्ध के बाद रूस यानी पूर्व सोवियत संघ की पहल पर दोनों देशों के बीच एक करार हुआ, जिसे इतिहास में ताशकंद समझौते के रूप में याद किया जाता है। सोवियत संघ के ताशकंद में 10 जनवरी, 1966 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौते पर दस्तखत हुए। तभी ताशकंद गए देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का अकस्मात निधन हो गया।
सर्वोच्च अलंकरण से नवाजे गए शास्त्री जी
भारत-पाक युद्ध विराम के बाद शास्त्रीजी ने अपने एक संबोधन में कहा था कि 'हमने पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी, अब हमें शांति के लिए पूरी ताकत लगानी है।Ó मरणोपरांत 1966 में उन्हें भारत के सर्वोच्च अलंकरण 'भारत रत्नÓ से विभूषित किया गया।