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video : काल भैरव सवारी : जेलर भी हो जाते हैं इनके आगे नतमस्तक, कैदी करते हैं गुणगान

भैरवगढ़ क्षेत्र में महाकाल के सेनापति बाबा कालभैरव की पालकी यात्रा धूमधाम से निकाली गई।

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उज्जैन. डोल ग्यारस के अवसर पर गुरुवार शाम 4 बजे भैरवगढ़ क्षेत्र में महाकाल के सेनापति बाबा कालभैरव की पालकी यात्रा धूमधाम से निकाली गई। उनका स्वागत करने के लिए हजारों की संख्या में भक्त पहले से ही मौजूद थे। पालकी में सवार भगवान काल भैरव के दर्शन करने को भक्त आतुर नजर आए।

शाही ठाठ से किया क्षेत्र भ्रमण
भगवान महाकाल के सेनापति भगवान कालभैरव शाही ठाठ-बाट के साथ क्षेत्र भ्रमण करने निकले। मदिरापान करने वाले भगवान की सवारी में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। यह सवारी डोल ग्यारस पर भैरवगढ़ क्षेत्र में शाम 4 बजे से निकाली गई, जो सिद्धवट मंदिर तक गई, यहां आरती-पूजन के पश्चात सवारी पुन: भैरव मंदिर लौट आई। सवारी में बैंड, रथ, घोड़े और भजन मंडलियां शामिल थीं।

सदियों से चली आ रही परंपरा
भूतभावन भगवान महाकालेश्वर के सेनापति एवं उज्जयिनी के क्षेत्रपाल कालभैरव महाराज की सवारी डोल ग्यारस पर भैरवगढ़ स्थित कालभैरव मंदिर से लाव लश्कर के साथ निकाली जाती है, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सवारी में काल भैरव की प्रतिकृति वाली झांकी, बटुक भैरव की झांकी, भांग शृंगार वाली महाकाल की झांकी घोड़े, रथ, बैंड एवं भजन मंडलियां सम्मिलित रहीं।

कलेक्टर ने किया पालकी पूजन
पुजारी पं. सदाशिव चतुर्वेदी के अनुसार सवारी आरंभ होने से पूर्व पालकी का पूजन कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा किया गया। सवारी कालभैरव मंदिर से शाम 4 बजे प्रारंभ हुई, जो जेल के मुख्य द्वार से होती हुई भैरवगढ़ क्षेत्र के मुख्य मार्गों से होती हुई सिद्धवट मंदिर पहुंची, जहां आरती के पश्चात पुन: सवारी कालभैरव मंदिर पहुंची। डोल ग्यारस पर्व को लेकर मंदिर को फू लों से सजाया गया, वहीं इस अवसर पर मंदिर को विद्युत सज्जा से नहलाया गया। मंदिर परिसर में दीप स्तंभ भी जगमगा रहे थे।

बाबा को अर्पण की शाही पगड़ी
सवारी निकलने के पूर्व बाबा कालभैरव को शाही पगड़ी अर्पण की गई तथा 11 पंडितों ने वेद मंत्रों का उच्चारण किया। बटुक भैरव का जप पूजन तथा बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर का द्वार फूलों और रोशनी से सजाया गया। सवारी में भस्म रमैया मंडली झांझ मंजीरे बजाती हुई निकली।

जेल द्वार पर कैदियों ने किए दर्शन
बाबा कालभैरव की सवारी मंदिर से चलकर जैसे ही भैरवगढ़ जेल के मुख्य द्वार पर पहुंची, यहां जेलर द्वारा आरती की गई, तथा कैदियों ने जेल के अंदर बैरक से ही बाबा की पालकी के दर्शन किए।

कब-कब निकलती है सवारी
बाबा कालभैरव की सवारी भैरव जयंती, भैरव अष्टमी और डोल ग्यारस पर्व के दिन निकालने की परंपरा है। भगवान कालभैरव क्षेत्र का भ्रमण करते हैं। पालकी सिद्धवट तक जाती है, वहां पूजन-आरती पश्चात सवारी फिर लौटकर मंदिर आती है।