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भगवान श्रीकृष्ण ने यहां आकर ली थी शिक्षा, अब होगी श्री कृष्ण गमन पथ की खोज

श्री कृष्ण गमन पथ की खोज संस्कृति विभाग के निर्देशन में होगी, धार्मिक नगरी अवंतिका और मथुरा के बीच जुड़ेगा नया अध्याय!

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उज्जैन. गुरु पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण ने भी गुरु को गुरु दीक्षा दी थी। आप जानते हैं कि प्राचीन अवंतिका नगरी में महर्षि संदीपनी के आश्रम में श्रीकृष्ण ने शिक्षा गृहण की थी। बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका जो आज उज्जैन को नाम से जाना जाता है।

श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली संदीपनी आश्रम में गुरु संदीपनी से शिक्षा ग्रहण करने मथुरा से आए थे। उन्होंने 64 दिन में 64 विद्या, 16 कलाओं का ज्ञान आश्रम में रहकर लिया था। आज 13 जुलाई 2022 गुरु पूर्णिमा पर्व से श्री कृष्ण गमन पथ की खोज के लिए शोध शोध शुरू होने जा रहा है। श्री कृष्ण गमन पथ का शोध मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के निर्देशन में किया जाएगा।

इसके लिए स्वराज संस्था भोपाल और शासकीय विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के पुरातत्व और इतिहासकारों का संयुक्त दल रूप से करेगा। शोध टीम में पुराविद डॉ रमण सोलंकी, डॉ प्रीति पांडेय, डॉ अजय शर्मा, डॉ अनिमेष नागर, डॉ मंजू यादव, डॉ सुदामा सखवार शामिल हैं।

अवंतिका में भगवान श्रीकृष्ण के शिक्षा गृहण करने के अलावा कई बार आने के प्रमाण मिलते हैं। वह अवंतिका की राजकुमारी से विवाह के लिए उज्जैन आए थे। रुकमणी विवाह के बाद भी भगवान के उज्जैन आने की कथा मिलती है। भगवान परशुराम के जन्म स्थान जनापाव पर भी श्री कृष्ण के जाने की कथा मिलती है। भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि का आश्रम जहां है वही भगवान को भेट स्वरूप सुदर्शन चक्र प्राप्त हुआ था।

श्री कृष्ण गमन पथ शोध सदस्य एवं पुराविद रमण सोलंकी ने बताया कि इस शोध के लिए श्रीमद्भागवत पुराण, स्कंदपुराण के अवंतीखण्ड में वर्णित धार्मिक प्रसंगों के आधार बनाया जाएगा। जिससे पता चल सकेगा कि भगवान श्री कृष्ण के मथुरा से उज्जैन किस रास्ते से होकर आए थे और रास्ते में उनको कौन कौन स्थान मिले थे, इस पर शोध किया जाएगा। भगवान ने आते समय जहां जहां भ्रमण किया इन सभी स्थानों की खोज की जाएगी। शोध के बाद श्री कृष्ण गमन पथ का एक नक्शा तैयार किया जाएगा जो तीर्थाटन के रूप में विकसित किया जाएगा।

धार्मिक ग्रंथो में मिले प्रमाणों से पता चलता है कि सांदीपनि आश्रम में शिक्षा गृहण करने के दौरान श्री कृष्ण ने बाबा महाकाल के दर्शन भी किये थे। अवंतिका में ही गुरु माता की आज्ञा से सुदामा के साथ जंगल में लकड़ियां बीनने जाते थे। वर्तमान उज्जैन से 30 किलोमीटर की दूरी पर गांव नारायणा आज भी है जहां वह गए थे। कई साहित्यिक प्रसंगों में भगवान के महाकाल वन में घूमने का उल्लेख मिलता है। शोध करने वाली टीम अब धर्म ग्रंथ और स्थानीय किंवदन्तियों के आधार पर भगवान के पथ गमन का पूरा ब्यौरा एकत्रित करेगी।

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