scriptMahakal Darshan from escalator in Kumbh 2028 in Ujjain | बिना चले एस्केलेटर पर खड़े होकर महाकाल के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु | Patrika News

बिना चले एस्केलेटर पर खड़े होकर महाकाल के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु

locationउज्जैनPublished: Dec 29, 2023 01:49:27 pm

Submitted by:

deepak deewan

सिंहस्थ 2028 का आयोजन उज्जैन में होना है। इसमें अभी करीब चार वर्ष का समय है पर ऐसी कई चुनौतियां सामने हैं जिनसे पार पाना होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 को अब तक के सभी मेलों से सर्वश्रेष्ठ आयोजित करने की बात कही है। इसके लिए कई नए प्रोजेक्ट बनाए गए हैं जिनकी जटिल तकनीक और खर्च को देखते हुए अभी से तैयारी तेज करने की जरूरत है। एक प्रोजेक्ट तो ऐसा भी है जिसमें श्रद्धालु बिना चले एस्केलेटर पर खड़े होकर महाकाल के बिल्कुल पास पहुंच सकेंगे।

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सिंहस्थ 2028 का आयोजन उज्जैन में होना है

सिंहस्थ 2028 का आयोजन उज्जैन में होना है। इसमें अभी करीब चार वर्ष का समय है पर ऐसी कई चुनौतियां सामने हैं जिनसे पार पाना होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 को अब तक के सभी मेलों से सर्वश्रेष्ठ आयोजित करने की बात कही है। इसके लिए कई नए प्रोजेक्ट बनाए गए हैं जिनकी जटिल तकनीक और खर्च को देखते हुए अभी से तैयारी तेज करने की जरूरत है। एक प्रोजेक्ट तो ऐसा भी है जिसमें श्रद्धालु बिना चले एस्केलेटर पर खड़े होकर महाकाल के बिल्कुल पास पहुंच सकेंगे।

2028 की तैयारी सिंहस्थ-2016 में लिए सुझावों अनुसार धरातल पर अभी तक शुरू हो जाना चाहिए थी। यह इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस सिंहस्थ में इन्फ्रास्ट्रक्चर सिर्फ सड़क और पुल-पुलिया तक सीमित नहीं रहेंगे, हाइ टेक्नोलॉजी मशीनरी बेस्ड भी रहेंगे। चुनौती बड़ी और समय कम है। ऐसे में अभी से पूरी क्षमता से आयोजन की तैयारी में जुटने की जरूरत है।

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कुछ प्रमुख बड़े प्रस्ताव, जिनमें समय, तकनीक व खर्च महत्वपूर्ण है

1. मेट्रो: सिंहस्थ 2028 के पूर्व इंदौर-उज्जैन के बीच मेट्रो ट्रेन शुरू करने की योजना है। अभी तकनीकी रिपोर्ट पर अंतिम मुहुर भी नहीं लगी है। इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुए तीन वर्ष से अधिक समय होने के बाद भी जनता के लिए यह सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।

2. महाकाल तक ट्रेवलर, एस्केलेटर से पहुंचेंगे पास: हाल ही में मुख्यमंत्री के समक्ष हरिफाटक मेघदूत वन से महाकाल लोक नंदी द्वार ट्रेवलर का प्रस्ताव रखा गया। इसके एक हिस्से में एस्केलेटर लगा होगा जिस पर खड़े होने पर बिना चले श्रद्धालु मंदिर के नजदीक तक पहुंच सकेंगे। प्रोजेक्ट काफी तकनीकी है और अभी डीपीआर बनाने की मंजूरी भी नहीं मिली है।

3. एलिवेटेड कॉरिडोर: इंदौर रोड महामृत्युंजय द्वार से हरिफाटक ब्रिज क्षेत्र तक एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। यह इंदौर रोड से मंदिर क्षेत्र तक पहुंचने के लिए एक्सक्लूसिव मार्ग होगा। यह भी तकनीकी और नए प्रकार का निर्माण होग। अभी विचाराधीन ही है।

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4. सिक्स लेन: इंदौर-उज्जैन मार्ग को सिक्स लेन विस्तारित करने की योजना है। मुख्य जंक्शन पर फ्लायओवर भी बनेंगे। 900 करोड़ रुपए का खर्च आंकलित है। अभी डीपीआर स्वीकृत ही नहीं हुई है। निर्माण पूरा होने में समय लगेगा। इसी तरह शहर में प्रवेश करने वाले अन्य मार्गों का विस्तारीकरण भी होना है।

5. मेडिकल कॉलेज- सिंहस्थ पूर्व मेडिकल कॉलेज शुरू करना जरूरी है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में इसका उपयोग हो सके। अभी स्थान चयन की प्रक्रिया हुई है लेकिन निर्माण एजेंसी का चयन तक नहीं हो पाया है। कॉलेज का भवन बनने के साथ पूरी क्षमता से इसका संचालन शुरू करने में समय लगेगा।

6. शिप्रा शुद्धिकरण: सिंहस्थ 2028 में शिप्रा के जल से स्नान की परिकल्पना है। फिलहाल ऐसा मुश्किल लग रहा है। कान्ह को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए धरातल पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। 600 करोड़ रुपए से अधिक के खुली नहर से डायवर्शन का प्रोजेक्ट कागजो तक समिति है। जलापूर्ति के लिए नए बांध पर भी कोई निर्णय नहीं हुआ।

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7. एयरपोर्ट: शहर आगमन की अप्रोच बढ़ाने के लिए डोमेस्टिक एयरपोर्ट शुरू करने की योजना है। इसके शुरू होने से सिंहस्थ में लाभ मिलेगा। अभी उज्जैन में डोमेस्टिक एयरपोर्ट की मंजूरी ही नहीं मिली है।

8. आंतरिक सड़कें : सीवरेज प्रोजेक्ट के कारण शहर की लगभग सभी आंतरिक सड़कें खराब हो गई है। स्थिति सुधारने के लिए करीब 400 किलोमीटर की आंतरिक सड़कें बनाना होंगी।

हाल ही आए उज्जैन आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 को अब तक के सभी मेलों से सर्वश्रेष्ठ आयोजित करने की बात कही है। अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा सिंहस्थ तैयारियों को लेकर 31 दिसंबर को उज्जैन में बैठक भी लेेने जा रहे हैं। जानकार मानते हैं, शहर विकास व सिंहस्थ की जरूरत को लेकर अब तक जिस प्रकार के प्रस्ताव सामने आए हैं, यदि उन्हें अमलीजामा पहनाना है तो तैयारियों की गति बढ़ाने की जरूरत है।

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1. तकनीक: कुछ प्रोजेक्ट बेहद उच्च तकनीक पर आधारित रहने की संभावना है। सामान्य निर्माण एजेंसी ऐसे कार्य नहीं कर पाएगी। इनकी निर्माण एजेंसी के चयन में समय लग सकता है।

2. नए प्रोजेक्ट: मेला क्षेत्र में सुगम यातायात, आसान पहुंच, आगंतुकों की सुविधा, भीड़ नियंत्रण आदि के लिए कुछ नए निर्माण और आधारभूत योजनाएं लाना होंगी। अभी कई योजनाओं ने ठीक से कागज पर भी नहीं उतर पाई हैं।

3. खर्च: सिंहस्थ 2016 के आयोजन पर करीब 5 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए थे। सिंहस्थ-28 के लिए स्थायी व लंबी समय अधिक वाले निर्माण कार्य अभी से शुरू करना होंगे। सिंहस्थ के कार्यों के लिए अभी से बड़ा बजट रखना व खर्च करना आसान नहीं होगा।

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