
शिखर के दूसरे तल पर जहां ओंकारेश्वर मंदिर है, वहां लगाया महाकालेश्वर का बोर्ड
उज्जैन. विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में साइन बोर्ड की गड़बड़ी के चलते ओंकारेश्वर मंदिर गायब हो गया है। दरअसल, मंदिर के दूसरे तल पर जहां ओंकारेश्वर मंदिर है, वहां पर महाकालेश्वर का बोर्ड लगा दिया गया है, इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को यह पता ही नहीं चल रहा है कि महाकालेश्वर का मंदिर नीचे है या जहां पर बोर्ड लगा रखा है, वहां पर है।
भगवान महाकाल का मंदिर तीन हिस्सों में विभाजित है। भू-तल से लेकर मुख्य शिखर तक तीनों स्वरूपों के दर्शन होते हैं। सबसे प्रथम बाबा महाकाल विराजमान हैं, जिनके सभी श्रद्धालु दर्शन करके ऊपर परिसर में आते हैं। इस परिसर में शिखर के दूसरे तल पर श्री ओंकारेश्वर का मंदिर है, जिसकी पूजन विधि का कार्य महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा किया जाता है। इसी तरह शिखर के तीसरे तल पर श्रीनागचंद्रेश्वर का मंदिर है, जो कि वर्ष में एक दिन सिर्फ 24 घंटे के लिए नागपंचमी पर खुलता है।
---
सावन की रिमझिम में श्रावण महोत्सव की दूसरी सांझ आज
- त्रिवेणी संग्रहालय में शनिवार को पूर्व रंग में स्थानीय कलाकारों ने दी मनोहारी प्रस्तुति
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा हर वर्ष श्रावण महोत्सव का आयोजन किया जाता है। दो वर्षों से कोरोना के कारण यह आयोजन नहीं हो सका था। इस वर्ष त्रिवेणी संग्रहालय में रविवार को श्रावण महोत्सव की दूसरी सांझ रहेगी, इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों द्वारा विविध कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी, वहीं शनिवार शाम पूर्वरंग कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति हुई, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने मनोहारी प्रस्तुति दी।
महाकाल मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले सांस्कृतिक शृंखला में श्रावण महोत्सव के तहत चार शनिवार जो कि 23, 30 जुलाई, 6 व 31 अगस्त को होने वाले पूर्वरंग के प्रथम दिन 23 जुलाई को तीन प्रस्तुतियां हुईं। शाम 7 बजे से आरंभ हुई इन विविध प्रस्तुतियों में गायन-वादन और नृत्य की कला से श्रोता-रसिक सराबोर हुए। महोत्सव में प्रथम प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उज्जैन का नाम गौरवान्वित करने वाले कलाकार महेंद्र बुआ ने सितार वादन की प्रस्तुति दी। इसके बाद द्वितीय प्रस्तुति शास्त्रीय गायिका एवं पं. कुमार गंधर्व की पुत्री कलापिनी कोमकली ने सुमधुर गायन प्रस्तुत किया। तृतीय प्रस्तुति में प्रतिभा संगीत कला संस्थान के शिष्यों ने भगवान शिव पर आधारित कथक नृत्य से महाकाल की आराधना की।
---
गौरी पाठारे का गायन, 5 वाद्यों के अलावा कथक की प्रस्तुति
अभा श्रावण महोत्सव के दूसरे रविवार 24 जुलाई को शाम 7 बजे त्रिवेणी संग्रहालय में नियोजित शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की रसवर्षा से नटराज बाबा महाकाल की आराधना होगी। प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने बताया मंदिर समिति द्वारा आयोजित 17वें महोत्सव के दूसरे रविवार को मुंबई की गौरी पाठारे का शास्त्रीय गायन, इंदौर की पंच नाद संस्था के कलाकारों द्वारा समूह वादन होगा, जिसमें श्रुति धर्माधिकारी द्वारा संतूर वादन, स्मिता वाजपेयी द्वारा सितार वादन, संगीता अग्निहोत्री द्वारा तबला वादन, डॉ. रचना शर्मा द्वारा हारमोनियम व अनुजा बोरूडें शिंदे द्वारा पखावज वादन की प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रम का समापन उज्जैन की नृत्यसिध्दा कथक अकादमी निदेशक रितु शर्मा शुक्ला के समूह कथक की प्रस्तुति से होगा।
---
नए कलेवर में नजर आ रहा लड्डू प्रसाद का छोटा पैकेट
देश-विदेश से बाबा महाकाल का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु अपने साथ प्रसाद के रूप में लड्डू ले जाते हैं। यह पैकेट अब नए कलेवर में नजर आ रहा है, जिस पर मंदिर का मुख्य शिखर, लड्डू से भरा थाल और पुष्प रखे हुए दिखाई दे रहे हैं। बता दें, सावन मास के चलते फिलहाल सबसे छोटे पैकेट 200 ग्राम वाले का ही कवर पोस्टर बदला गया है, बाकी 1 व आधा किलो के पैकेट अभी पुराने स्वरूप में ही हैं।
Published on:
23 Jul 2022 09:47 pm
बड़ी खबरें
View Allउज्जैन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
