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सर्वार्थ सिद्धियोग में आ रही मकर संक्रांति, जानिए आपके लिए कितनी रहेगी फलदायी

मकर संक्रांति सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है। दोपहर 1.15 बजे से आरंभ होगी, जिसका पुण्यकाल दिवस पर्यंत रहेगा।

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उज्जैन. माघ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर रविवार के दिन प्रदोष काल की साक्षी में संक्रांति पर्व रहेगा। विशेष बात यह है इस बार मकर संक्रांति सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है। 14 जनवरी को आने वाली यह मकर संक्रांति दोपहर 1.15 बजे से आरंभ होगी, जिसका पुण्यकाल दिवस पर्यंत रहेगा। व्यवहारिक मान्यता से देखें तो सूर्य का धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में परिवर्तन संक्रांति कहलाती है। आमतौर पर सूर्य का किसी भी राशि में प्रवेशकाल संक्रांति कहलता है, चूंकि संक्रांति पर्व इसलिए भी विशेष बताया जाता है, क्योंकि इस दिन खर मास की समाप्ति होती है तथा मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।

मकर संक्रांति पर सूर्य का उत्तरायण
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बावाला ने बताया कि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार सूर्य का छह राशि दक्षिणायन तथा छह राशि पर उत्तरायण का प्रभाव होता है। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश होते ही सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे, जो अगले छह माह तक रहेंगे। उत्तरायण के सूर्य का विशेष प्रभाव धर्मशास्त्र में बताया जाता है। जो कि इस दौरान धार्मिक क्रिया के साथ प्रमुख पर्वकालों का आरंभ तथा नए संवत्सर का आरंभ भी उत्तरायण का माना जाता है। चूंकि छह माह चार विशेष ऋतुओं के साथ सूर्य की रश्मियां वनस्पति तंत्र को संचालित करती है, जो अगले छह माह तक प्रकृति में होने वाली घटनाओं को धार्मिक दृष्टिकोण से आनुष्ठानिक तप-बल के माध्यम से नियंत्रित करती हैं। इसलिए उत्तरायण के सूर्य का विशेष महत्व होता है।

मकर संक्रांति पर्वकाल
14 जनवरी रविवार के दिन रविवार के साथ ज्येष्ठ नक्षत्र तत्पश्चात मध्यान्ह में मूल नक्षत्र का साथ होना सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहा है, अर्थात दोपहर से लेकर दिवस पर्यंत तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस दृष्टि से पर्वकाल की शुरुआत मध्यांह से विशेष मानी जाएगी। हालांकि धर्मशास्त्र के अनुसार देखें तो जिस दिन संक्रांति का मध्यांह स्पर्श करता हो, वह पूरा दिन ही पर्वकाल की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दृष्टि से संक्रांति का स्नान, दान, तर्पण, नए कार्य का आरंभ, धर्म ध्वजा का दान आदि विशेष फल देने वाले माने जाते हैं।

किस राशि पर क्या प्रभाव
मेष-कार्य की प्रगति तथा राजकीय सम्मान, वृषभ- भाग्य का लाभ तथा धर्म में आस्था, मिथुन- अस्थिरता के साथ कार्य की पूर्णता, कर्क- पराक्रम में वृद्धि तथा भाई-बहनों का सहयोग, सिंह- संपत्ति की प्राप्ति व बाहरी यात्रा, कन्या- संतान से शुभ समाचार व पैतृक संपति का लाभ, तुला- मित्रों का सहयोग व बाहरी यात्रा, वृश्चिक- व्यापार में वृद्धि तथा धार्मिक यात्रा, धनु- भाग्य का उदय एवं विशेष शक्ति का दर्शन, मकर- वैचारिक प्रगति के साथ प्रगति, कुंभ- कार्यक्षेत्र में परिवर्तन के साथ आर्थिक वृद्धि, मीन- मांगलिक कार्य की रूपरेखा तथा चिंता से मुक्ति ।

क्या दान करें
तांब्र कलश में काले तिल भरकर शिव मंदिर में रखें या तीर्थ पुरोहित को दान करें। चावल एवं मूंग की दाल का दान वैदिक ब्राह्मण को करें। वस्त्र-पात्र श्रद्धानुसार कर्मकांडी ब्राह्मण को दान करें। औषधियां जरूरतमंद मरीजों को दें। कॉपी-किताब निर्धन बच्चों को दान करें। ऊनी वस्त्र-कंबल भिक्षुकों को दें। जलचर एवं वायुचर पक्षियों के लिए ग्रास निकालें। यह करने से दैवीय कृपा तथा पितरों की प्रसन्नता होती है।

तीर्थ पर करें तर्पण
देव, ऋषि व पितृ से ऋण मुक्ति के लिए भी तर्पण तथा पिंडदान करें। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन या सीधा सामग्री का दान करें।