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मालवा के आलू में है चिप्स की सफेदी का राज

देशभर में उज्जैन के आलू ने बनाई पहचान

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Ujjain,secret,

उज्जैन. कृषि के क्षेत्र में मालवा, खासकर उज्जैन की खासी पहचान है। यहां की हर उपज जोरदार होती है। बीते कुछ वर्षों में यहां के आलू की चिप्स निर्माण के लिए खासी मांग होने लगी है। चिप्स बनाने वाली कई बड़ी कंपनियां सीधे किसानों से आलू खरीद रही है। इसके अलावा उज्जैन का आलू की क्वालिटी देश के अन्य आजू उत्पादक राज्य से बेहतर है। यहां के आलू में शुगर की मात्रा काफी कम होती है, इसके चलते चिप्स का रंग लाल नहीं होता। एकदम सफेद चिप्स बनती है।
आलू एक सब्जी है। वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है। इसकी खासियत है कि यह हर सब्जी के साथ घुलमिल जाती है। बीते कुछ समय से आलू का उपयोग तैयार चिप्स में अधिक होने लगा है। इसमेंं उज्जैन के आलू का बड़ी मात्रा में उपयोग होने लगा है। हमारे क्षेत्र का आलू निर्यात के लिए नेशनल हार्टिकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के इंपोर्ट नॉम्र्स के मुताबिक है। बता दें, भारतीय आलू की दुनिया के कई देशों में काफी डिमांड है, लेकिन भारत के अन्य राज्यों में पैदा होने वाले आलू में पेस्ट और पेस्टिसाइड के इश्यू के चलते आलू का एक्सपोर्ट नहीं हो पाता है।
यह है खास बात
-मध्य प्रदेश भारत का पांचवा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है। राज्य में आलू का उत्पादन 2299 टन प्रति वर्ष है।
- आलू उत्पादन में उज्जैन जिला मध्यप्रदेश में तीसरे स्थान पर है और प्रतिपर्ष ३०० टन आलू का उत्पादन होता है।
- क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले आलू में सबसे कम शुगर और कैमिकल है।
- यहां के आलू ३ से चार माह तक भंडारण करने के बाद भी खराब नहीं होते हैं और इसमें शुगर की मात्रा भी नहीं बढ़ती है। यही वजह है कि जिले में ३५ से अधिक कोल्ड स्टोरेज का संचालन होता है।
- आलू की १४ से अधिक किस्म हैं। इनमें से उज्जैन जिले में कुफरी ज्योति, कुफरी लवकर, कुफरी बादशाह और कुफरी सिन्दूरी किस्म के आलू का उत्पादन जिले में किया जाता है।
- कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन, कैल्शियम, मैंगनीज, फॉस्फोरस के तत्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है, जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है।
इनका कहना
उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में पैदा होने वाले आलू में शुगर की मात्रा अन्य राज्यों के आलू की तुलना में न्यूनतम है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और गुजरात आदि राज्यों में आलू पर पेस्टिसाइड का इस्तेमाल अधिक होता है। यह पेस्टीसाइड और पेस्ट दोनों का इश्यू हार्वेस्टिंग के बाद भी रहता है,जबकि मालवा के आलू में यह इश्यू नहीं है। यही वजह है कि मालवा के आलू की देशभर के साथ बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी अधिक मांग रहती है।
- सुभाष श्रीवास्तव, वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी, उज्जैन