उज्जैन. बचपन में छिपकर नाना का वाद्ययंत्र बजाया और आज विलुप्त होते जलतरंग की संस्कृति को सहेज रहे हैं। यह कहानी है पुणे के पं. मिलिंद तुळणकर की। मिलिंद राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलतरंग की प्रस्तुति ही नहीं देते, बल्कि युवा कलाकारों को नि:शुल्क प्रशिक्षण भी देते हैं। जलतरंग वाद्ययंत्र लोगों की पसंद बने, इसके लिए एक वेबसाइट (जलतरंग डॉट कॉम) भी बनाई। इसके माध्यम से लोगों को जलतरंग की बारीकियों से अवगत कराया जाता है। अमरावती के मिलिंद का परिवार शास्त्रीय संगीत से जुड़ा हुआ था। माता सरिता शास्त्रीय गायिका थीं। पिता श्रीराम सितार व तबला वादन करते हैं। मिलिंद पिता के साथ ही सितार और तबला बजाया करते थे।
अन्य यंत्रों से जुगलबंदी
जलतरंग को लोकप्रिय बनाने के लिए मिलिंद ने अन्य वाद्ययंत्र के साथ जुगलबंदी कर प्रस्तुति दी। इसमें तिसार, बांसुरी, शहनाई, शाकुहाची, कथक नृत्य के साथ भी शामिल है।
मिलिंद ने आशा भोसले व श्रीधर फड़के की एलबम साकार गंधार, वेस्ट से बेस्ट फिल्म, तमिल फिल्म तीरूमानम एन्नम निकाह के साथ ब्रिटानिया गुड डे बिस्कुट के विज्ञापन में भी जलतरंग का वादन किया। इसी के साथ अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, न्यूजीलैंड, दुबई, मलेशिया में भी प्रस्तुति दे चुके हैं।
संगीत चिकित्सा पर कार्यशाला
नवोन्मेष संस्था की ओर से शस्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों की स्वरगंगा शृंखला के तहत सोमवार शाम 6 बजे कालिदास अकादमी संकुल में संगीत कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मिलिंद की जलतंरग की प्रस्तुति के साथ तबले पर मयंक बेडेंकर, इंदौर की अनुजा झोकरकर के शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति भी होगी।