24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नेशनल कलरिंग बुक डे : किताबों में रंग भरते-भरते हो गए दूसरों के गुरु

महज 2 वर्ष की आयु से पेंटब्रश और रंगों की दुनिया से था ऐश्वर्य को बेहद लगाव

2 min read
Google source verification
patrika

Education,Fantasy,artist,kids,colors,Experience,festival holi,

उज्जैन. रंग हमारे जीवन में हमेशा से जुड़े हैं, चाहे वह बच्चे हो या बड़े। ये सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। रंगों के बिना यह दुनिया बहुत बैरंग नजर आएगी। हमारा एक त्योहार होली तो खासकर रंगों के लिए ही बनाया गया है, ताकि जिन्हें रंगों से परहेज हो, वो भी इस एक दिन रंगों से सराबोर हो जाएं और सारे भेद भूलकर सबको गले लगाएं। वाकई, रंगों में डूबा कोई कलाकार जब अपनी कल्पना को साकार कर उसमें रंग भरता है, तो हर देखने वाला उसकी खूबी को पसंद करता है। नेशनल कलरिंग बुक डे पर पत्रिका ने शहर के एक बच्चे से चर्चा की, जो महज 2 वर्ष की आयु से ही रंगों से खेलने लगा था, अब वह दूसरों को इसकी शिक्षा दे रहा है।

राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस मनाना हम सबके लिए अलग अनुभव

एक कलाकार की तरह राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस मनाना हम सबके लिए अलग अनुभव सा ही है। हर कोई रंग पसंद करता है। रंग भरने वाली किताबें हमेशा बच्चों के लिए लोकप्रिय रही है। यह हर उम्र के लोगों के लिए न केवल मजेदार, बल्कि तनाव कम करने और दोस्तों के साथ समय बिताने का शानदार तरीका भी है। प्रतिवर्ष 2 अगस्त को रंगों में डूबने का यह दिन आता है। जब हर कोई अपने दोस्तों, बच्चों या नाती-पोतों के साथ या खुद के साथ कुछ समय बिताने के लिए चित्रकला का सहारा लेता है। क्योंकि चित्र बनाने की रचनात्मकता जीवन में आनंद लाती है।

मास्टर ऐश्वर्य को मिल चुके कई अवॉर्ड

शहर में मेट्रो टॉकिज के सामने रहने वाले मास्टर ऐश्वर्य मनोज सुराणा जब 2 वर्ष के थे, तब से चित्रकला के शौकीन रहे। अभी तक कई संस्थाओं, विद्यालयों, नवसंवत कॉलेज, कालिदास संकुल से उत्कृष्ट कला का पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में बच्चों को कभी सिखाते हैं, शौकीया तौर पर उन्होंने अपने परिवार की फोटो भी बनाई है, यहां तक कि वे चित्र देखकर किसी का भी फोटो बना लेते हैं।

अब इन बच्चों को बना रहे कलाकार

मास्टर ऐश्वर्य का कहना है कि मुझे रंगों से खेलना बहुत पसंद है। बचपन से ही इसका शौक रहा है। मैं चाहता हूं, मेरी तरह दूसरे बच्चे भी रंगों से खेलें और अपनी कल्पना को साकार करें। मैं अपने घर में ही माधुर्य, प्रियांशी हाडा, अनर्व तोतला, गोरी आंचलिया, अनिशा घाटिया, अवनि शर्मा, गौरांशी शर्मा व आरुष घाटिया को पेंटिंग सिखाता हूं।