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video : आतंकियों के निशाने पर रहने वाले देश के प्रसिद्ध मंदिर की सुरक्षा-व्यवस्था महाकाल भरोसे…

सुरक्षा के लिहाज से सरकार ने जो उपकरण भेजे थे, अब वे धूल खा रहे हैं। आने-जाने पर कोई रोक-टोक नहीं, कोई खास चैकिंग भी नहीं होती।

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उज्जैन. बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख महाकाल मंदिर आतंकियों के निशाने पर रहा है। मंदिर की सुरक्षा-व्यवस्था महाकाल के भरोसे है। सुरक्षा के लिहाज से सरकार ने जो उपकरण भेजे थे, अब वे धूल खा रहे हैं। आने-जाने पर कोई रोक-टोक नहीं, कोई खास चैकिंग भी नहीं होती।

चैकिंग उपकरण खा रहे धूल
सुरक्षा की दृष्टि से बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख महाकाल मंदिर संवेदनशील रहा है। यही कारण है कि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकन्ना रहना आवश्यक है, लेकिन इन दिनों मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरती जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से जो उपकरण मंदिर में हैं, वे धूल खा रहे हैं। आने-जाने पर कोई रोक नहीं, कोई खास चेकिंग भी नहीं होती। साथ ही मंदिर में प्रतिबंधित होने के बावजूद यहां लोगों को मंदिर के अंदर ही फोटो खींचते हुआ देखा जा सकता है।

शीर्ष एजेंसियां कई बार जारी कर चुकी अलर्ट
बता दें कि मंदिर को लेकर देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियां कई बार हाई अलर्ट जारी कर चुकी हैं, मगर यहां इंतजाम कभी भी वैसे नजर नहीं आते। मंदिर में तीन स्तर की सुरक्षा किसी काम की नहीं है। मंदिर में सुरक्षा के लिए तीन एजेंसियां तैनात हैं। एसएएफ, स्थानीय पुलिस, होमगार्डस् सहित निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी व्यवस्था संभालते हैं।

समय-समय पर जिला प्रशासन को भेजी जाती है रिपोर्ट
आईबी द्वारा जिला प्रशासन को समय-समय पर रिपोर्ट दी जाती रही है। इसमें मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान रखने की हिदायत रहती है। आइबी के निर्देश पर ही मंदिर में मोबाइल प्रतिबंधित किया है। सुरक्षा इतनी ढीली पड़ गई है कि कोई भी व्यक्ति कपड़ों में छुपाकर या जेब में रखकर मोबाइल अंदर ले जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु वीडियो बनाते हैं। सेल्फी और फोटो लेते देखे जा सकते हैं। इन्हें कोई नहीं रोकता। दिखावे के लिए बोर्ड जरूर है जिस पर लिखा है कि मंदिर में मोबाइल ले जाना मना है।

दोनों जगह बैग स्केनर नहीं हैं
वर्तमान में आम श्रद्धालु बैरिकेड्स और २५० की रसीद वाले पुलिस चौकी गेट से प्रवेश कर रहे हैं। दोनों जगह बैग स्कैनर नहीं हैं। डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर कभी-कभी चलता दिखता है। बिना किसी चेकिंग के हर कोई प्रवेश कर रहा है। पुलिस चौकी होने तथा एएसएफ होमगार्डजवान और निजी सुरक्षा एजेंसी के गाड्र्स की तैनाती के बावजूद सुरक्षा में कोताही बरती जा रही है।

मोबाइल प्रतिबंधित, फिर भी अंदर तक ले जाते हैं लोग
मंदिर में मोबाइल प्रतिबंधित है। बावजूद इसके लोग अंदर तक ले जाते हैं और वीडियो-फोटो बनाते देखे जा सकते हैं। इन्हें कोई नहीं रोकता। दिखावे के लिए एक बोर्ड जरूर लगा रखा है, जिस पर लिखा है कि मंदिर में मोबाइल ले जाना मना है। पुलिस चौकी होने तथा एएसएफ व होमगार्ड के जवानों की तैनाती के बावजूद सुरक्षा में कोताही बरती जा रही है।

उपकरणों से नहीं हो रही जांच, स्कैनर चलाने वाला कोई नहीं
सुरक्षा जांच के लिए मेटल डिटेक्टर लगे जरूर हैं, मगर किसी काम के नहीं। परिसर में सामान बिना जांच के ही ले जाया जा रहा है। बैग स्कैनर मंदिर परिसर के कौने में पड़े धूल खा रहे हैं। प्रतिबंध की धज्जियां उड़ाता कोई भी शख्स आपको यहां आसानी से नजर आ जाएगा।

मोबाइल पर सिर्फ नाम का प्रतिबंध
मंदिर परिसर में मोबाइल और कैमरे प्रतिबंधित है। मगर जांच के बेहतर इंतजाम नहीं। कई श्रद्धालु परिसर में मोबाइल और कैमरे का उपयोग करते आसानी से नजर आ जाते हैं।

महीनों से बंद स्कैनर, किसी का ध्यान नहीं
मंदिर में वर्षों पहले बैग स्कैनर लगाया गया था ताकि यहां पूजन सामग्री सहित अन्य सामान की जांच की जा सके। स्कैनर महीनों से बंद पड़ा है। इस पर धूल जमी पड़ी है। इसी प्रकार एक बैग स्कैनर तो कोटितीर्थ कुंड के पास प्रवचन हॉल के कबाड़े की तरह पड़ा हुआ है। अफसरों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। कई बार स्कैनर बंद पड़े होने की बात उठ चुकी है, मगर इसे ठीक नहीं कराया गया।

नारियल पर लगा है प्रतिबंध
अलबत्ता मंदिर में नारियल, बैग ले जाने पर प्रतिबंध जरूर लगाया गया। हालांकि अन्य सामान बिना जांच के ही परिसर में जा रहा है। इस तरह की लापरवाही कभी भी सुरक्षा की दृष्टि से महाकाल मंदिर के लिए बड़ी चूक बन सकती है। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होना चाहिए।

अनुभव की कमी बन रही रोड़ा
कुछ माह पहले मंदिर की व्यवस्थाओं की कमान नए अधिकारियों के हाथ में आई तो उम्मीद थी कि व्यवस्थाओं में थोड़ा सुधार होगा। यह व्यवस्था और भी बेहतर हो सकती है, लेकिन अधिकारियों में मैदानी काम के अनुभव की कमी इसमें रोड़ा बन रही है। अधिकारी, मंदिर के सेवकों से काम नहीं ले पा रहे हैं, वहीं मंदिर की व्यवस्थाओं में समन्वय का अभाव है।

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