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आवेदन पत्र की जांच का लाखों में भुगतान

विक्रम विश्वविद्यालय में परीक्षा आवेदन-पत्र की जांच के नाम पर लाखों का भुगतान किया गया है। इसमें विवि के सहायक कुलसचिव से लेकर स्वच्छक तक का हिस्सा है।

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Payment of application check in lakhs

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उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय कर्मचारियों को वेतन के अलावा मानदेय के तौर पर उपाधि की जांच के एवज में 4.70 लाख रुपए भुगतान के बाद इसी तरह के भुगतान का एक और मामला सामने आया है। इसमें विवि 58 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को परीक्षा आवेदन-पत्र की जांच के लिए नियमित वेतन के अतिरिक्त 8.62 लाख से अधिक का भुगतान किया गया है। खास बात यह कि लाभ पाने वालों में सहायक कुलसचिव से लेकर स्वच्छक शामिल है। विक्रम विश्वविद्यालय में कार्यपरिषद के पुराने निर्णय के हवाले से मानदेय के नाम पर राशि के भुगतान का सिलसिला जारी है। विक्रम विश्वविद्यालय ने कार्यपरिषद के निर्णय के हवाले से परीक्षा आवेदन-पत्र जांचने के लिए प्रति आवेदन के मान से कर्मचारियों को 20 रुपए दिए गए हैं। विवि ने कर्मचारियों के लिए सत्र 2018-19 के परीक्षा आवेदन की जांच के मानदेय के तौर पर 8 लाख 62 हजार 145 रुपए का भुगतान कर दिया।
आवेदन कॉलेजों से अग्रेषित तो फिर जांच कैसी
उच्चशिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षा के शुल्क और आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन कर रखी है। इस प्रक्रिया के बाद विद्यार्थियों के आवेदन की प्रति ऑनलाइन निकालने के बाद संबंधित कॉलेज/केंद्र पर जमा की जाती है। कॉलेज/केंद्र पर सत्यापन के बाद इसे विवि के लिए अग्रेषित कर दिया जाता है। उच्च शिक्षा विभाग में परीक्षा के आवेदन-पत्र ऑनलाइन जमा होते हैं। इनमें आधुनिक संसाधनों के चलते गलती होने की संभावना नहीं रहती है। वहीं कॉलेज-केंद्रों पर जांच के होने के बाद भी विक्रम विश्वविद्यालय में परीक्षा आवेदन-पत्र जांच समझ से परे हैं। सूत्रों का कहना है कि दो से तीन स्तर पर पूर्व में आवेदनों की जांच के बाद भी विवि में केवल कर्मचारियों को अर्थिक लाभ देने के लिए जांच होती है और मानदेय के तौर पर लाखों का भुगतान भी किया जा रहा है। कार्यपरिषद के निर्णय का हवाला विक्रम विवि में कर्मचारियों के भत्तों की फाइल नहीं रुकती है। दरअसल मानदेय भुगतान में विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों का भी हिस्सा तय रहता है। लिहाजा भुगतान की प्रक्रिया तेजी से कराई जाती है। वेतन के अलावा मानदेय भुगतान के लिए कार्यपरिषद के पुराने निर्णय का लगातार सहारा लिया जाता है। मानदेय के संबंध में बताया जाता है के कुछ वर्ष पहले विवि में संसाधनों के साथ स्टाफ की कमी रहती थी। संबंधित विभाग के अलावा अन्य विभाग के कर्मचारियों ने मूल कार्य के अलावा दूसरे कार्य लिए जाने और अतिरिक्त समय काम करने के एवज में मानदेय प्रदान करने का निर्णय कार्यपरिषद द्वारा लिया गया था।
स्वच्छक जांच करने वालों में
कार्यपरिषद के निर्णय अनुसार मानदेय का भुगतान यदि किया भी जा रहा है तो राशि उन कर्मचारियों को मिलना चाहिए, जिन्होंने आवेदन पत्र की जांच का काम किया है। हालात यह है कि राशि पाने वालों में एक स्वच्छक का नाम भी है। शंका स्वभाविक है कि क्या स्वच्छक ने भी आवेदन-पत्रों की जांच की।
इन्हें मिला लाभ
विक्रम विवि ने परीक्षा आवेदन-पत्र की जांच के लिए अपने कर्मचारियों को 8 लाख 62 हजार 145 रुपए मानदेय का भुगतान किया है। इसमें द्वितीय श्रेणी अधिकारी से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। मानदेय का लाभ पाने वालों में एक-एक सहायक कुलसचिव, अनुभाग अधिकारी, तकनीकी अधिकारी, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, तीन अधीक्षक, 14 उच्चश्रेणी लिपिक वर्ग-1, तीन उच्चश्रेणी लिपिक वर्ग-2, आठ लघुश्रेणी लिपिक, आठ दैनिक वेतन भोगी लघुश्रेणी लिपिक, 13 भृत्य, दो दैनिक वेतन भोगी भृत्य, एक लिपिक और एक स्वच्छक शामिल है। इसमें सबसे अधिक 24 हजार रुपए सहायक कुलसचिव ओर सबसे कम लिपिक का मानदेय 4485 रुपए है। कर्मचारियों के अलावा फाइल को स्वीकृत कराने में सहयोग करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को भी उपकृत किया गया।