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नागदा. फोटो में नजर आ रहा ममता किराना स्टोर्स की इस दुकान के स्थान पर दो वर्ष पूर्व सार्वजनिक शौचालय हुआ करता था। काफी वर्षो तक इस शौचालय का क्षेत्र के लोग और यहां से गुजरने वाले राहगीर किया करते थे, लेकिन नगर पालिका की अनदेखी के चलते अब शौचालय की जमीन पर पड़ोसी ने कब्जा कर यहां किराने की दुकान खोल ली है वहीं एक अन्य दुकान को किराए से दे दी गई है।
दरअसल पिछले दिनों पुराने बस स्टैंड से लेकर बायपास चौराहे तक की रोड को उत्कृष्ट सडक़ निर्माण के तहत चौड़ीकरण का कार्य किया गया था। जिसकी जद में यह शौचालय आने से इसका कुछ हिस्सा तोडकऱ इसके स्थान पर नया शौचालय निर्माण करने का निर्णय लिया गया था। पक्का निर्माण होने तक नपा की ओर से यहां एक अस्थायी शौचालय भी रखा गया था, लेकिन रोड निर्माण के बाद नपा ने पक्के शौचालय निर्माण की सुध नहीं ली। जिसका नतीजा यह हुआ की पड़ोसी ने ही सार्वजनिक शौचालय की जमीन पर कब्जा कर वहां दुकानों का निर्माण कर लिया है। जिसमें एक दुकान किराने की खोल दी और दूसरी किराए से देकर हजारों रुपए किराया वसूला जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी नपा के अधिकारियों को नहीं है। क्षेत्र के लोगों ने शौचालय की जमीन पर अतिक्रमण करने की शिकायत कई बार नपा अधिकारियों को की लेकिन अभी तक कब्जा हटाने के लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके लेकर क्षेत्र के लोगों में तो नाराजगी है ही वहीं सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुझे इसकी जानकारी नहीं है, मंै मामले को दिखवाता हूं। अगर नगरपालिका की जमीन पर किसी ने अतिक्रमण कर दुकान का निर्माण करवाया है तो उसे जल्द ही हटाकर वहां फिर से सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाया जाएगा।
सतीश मटसेनिया, सीएमओ, नपा नागदा
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दिखने लगे जलसंकट के आसार तो प्रशासन को याद आई जिम्मेदारी, एसडीएम ने बुलाई 15 को बैठक
नागदा. पिछले वर्ष सामान्य से कम बारिश होने और चंबल नदी से लगातार पानी चोरी होने से दिसबंर माह में ही शहर में जलसंकट के आसार नजर आने लगे थे। तत्कालीन जिला कलेक्टर मनीषसिंह ने क्षेत्र में जल परिरक्षण अधिनियम लागू कर चबंल नदी एवं सार्वजनिक जल स्त्रोतों से पानी की चोरी पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
अब हालत यह है कि चबंल के दो बांध पूरी तरह से खाली हो चुके है और दो बांधों में मात्र 55 एमसीएफटी एवं टकरावदा और जलवाल तालाब में करीब 110 एमसीएफटी पानी शेष बचा है। यानी कुल 165 एमसीएफटी पानी ही उपलब्ध है। अगर इसमें से 10 एमसीएफटी पानी डेड स्टोरेज के रूप में छोड़ दिया जाए तो उद्योग को संचालित करने एवं नागदा-खाचरौद और रेलवे के पेयजल के लिए मात्र 155 एमसीएफटी पानी ही शेष रह जाता है। जबकि रोज की खपत 2.5 एमसीएफटी से लेकर 3 एमसीएफटी के रूप में होती है। ऐसी स्थिति में मात्र 50 दिन से भी कम समय का पानी स्टोरेज है। ऐसे में अगर मानसून ने थोड़ी भी देरी की या फिर बेरूखी दिखाई तो शहर एवं आसपास के क्षेत्र में भयंकर पानी का संकट खड़ा हो सकता है। जिसके आसार अब नजर भी आने लगे है। यहीं कारण है कि एसडीएम ने 15 अप्रैल को चबंल और अन्य जलाशयों में पानी की स्थिति को जानने के लिए बैठक बुलाई है जिसमें नगर पालिका, ग्रेसिम, पीएचई और रेलवे के अधिकारियों को पत्र भेजकर उन्हें बैठक में आने के लिए कहा गया है।
Published on:
13 Apr 2019 08:02 am
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