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स्कूल फीस नहीं मिली तो काट दिए बच्चों के नाम, ऑनलाइन ग्रुप में से कर दिया रिमूव

पिछले पांच माह से स्कूलों में ऑनलाइन क्लास चल रही है। इसके पहले डेढ़ साल से स्कूल बंद रहे। ऑनलाइन पढ़ाई और स्कूल की पढ़ाई में काफी अंतर है। ऐसे में स्कूल ट्यूशन फीस के नाम पर 60 से 70 प्रतिशत तक फीस ले रहे हैं।

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स्कूल फीस नहीं मिली तो काट दिए बच्चों के नाम, ऑनलाइन ग्रुप में से कर दिया रिमूव

स्कूल फीस नहीं मिली तो काट दिए बच्चों के नाम, ऑनलाइन ग्रुप में से कर दिया रिमूव

उज्जैन. लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुए परिवारों द्वारा बच्चों की समय पर स्कूल फीस जमा नहीं होने से शहर के कई स्कूल संचालकों ने अपना क्रूर और अमानवीय चेहरा बच्चों के सामने रख उन्हें शिक्षा देने से वंचित रख दिया है। इनमें निजी स्कूल ही नहीं जबकि कई ट्रस्ट के स्कूल भी शामिल हैं, जो सालना करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। ऐसे में इन शिक्षा की शालाओं पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं।


कई ऐसे माता-पिता है, जिनका लॉकडाउन में व्यापार प्रभावित हुआ है और वो फीस नहीं जमा कर पाए थे, जो अब किश्तो में फीस जमा कर रहे हैं परंतु कई स्कूलों ने बच्चों के नाम काट दिए तो कई ने बच्चों का नाम काटने की धमकी पालकों को दे रहे हैं, तो कई स्कूल मालिक बच्चों को स्कूल में जाने से रोक रहे हैं। वहीं जो स्कूल ऑन लाइन शिक्षा दे रहे हैं उन्होंने बच्चों को ग्रुप से रिमूव कर दिया। ऐसे में बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। जबकि शिक्षा ऐसा बच्चों का मौलिक अधिकार है अगर शिक्षा नहीं है। तो बच्चे की पूरी जिंदगी अंधकारमय और अज्ञानता में रहती है। यही कारण है कि देश में अनिवार्य शिक्षा को महत्ता दी गई है।

बच्चों का नाम नहीं काट सकते स्कूल

वैसे तो आरटीई एक्ट 2009 के सेक्शन 16 के अनुसार, 'किसी भी बच्चे को किसी भी क्लास से पीछे नहीं किया जा सकता है, और ना ही स्कूल से बाहर किया जा सकता है। यह नियम कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों के अनिवार्य है। 2019 में इस एक्ट में संशोधन करते हुए इस बात को कंफर्म भी कर दिया कि किसी भी बच्चे को स्कूल से बाहर नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सम्बद्ध में निर्देश दिए हैं।


ट्यूशन फीस के नाम कर रहे 70 प्रतिशत वसूली

अभिभावकों का कहना है कि पिछले पांच माह से स्कूलों में ऑनलाइन क्लास चल रही है। इसके पहले डेढ़ साल से स्कूल बंद रहे। ऑनलाइन पढ़ाई और स्कूल की पढ़ाई में काफी अंतर है। ऐसे में स्कूल ट्यूशन फीस के नाम पर 60 से 70 प्रतिशत तक फीस ले रहे हैं। जबकि कोरोना काल में काम धंधा पूरी तरह से ठप पड़ा है, और बच्चों की पढ़ाई भी जरूरी है ऐसी परिस्थिति में स्कूल की पूरी फीस एक साथ कैसे पटा सकते हैं। थोड़ी थोड़ी करके दे रहे हैं परंतु स्कूल वाले मानने को तैयार नहीं।


शिक्षा विभाग का जवाब शिकायत करें, कार्रवाई करेंगे

इधर स्कूलों की मनमानी को लेकर शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। डीईओ आनंद शर्मा कहते हैं कि ऐसे पालक शिकायत करें। शिक्षा विभाग स्कूलों पर कार्रवाई करेगा।

सैकड़ों बच्चों को किया रिमूव
लोकमान्य टिलक सहित मिशनरी ट्रस्ट के दर्जनों स्कूल शहर में हैं। जिन्होंने बच्चों की फीस समय पर जमा नहीं करने पर बच्चों को शिक्षा देने से वंचित कर दिया। शनिवार को भी लोटि स्कूल से करीब 150 से ज्यादा बच्चों को ऑनलाइन एज्यूकेशन ग्रुप से रिमूव किया है। मामले में लोटि स्कूल की प्रिंसिपल सहित प्रबंधक गिरिश भालेराव से फोन पर सम्पर्क किया परंतु उन्होंने फोन रिसीव नहीं किए।