उज्जैन.
बाबा महाकाल के भक्तों को जल्द नए अन्नक्षेत्र में भोजन प्रसादी का आनंद मिलेगा। यहां का भोजन जितना सात्वीक होगा, अन्न क्षेत्र संचालन की व्यवस्था उतनी ही आधुनिक रहेगी। सब्जी धोने,काटने और पकाने से लेकर भोजन के बाद बर्तन धोने तक का काम फुल ऑटोमेटिक रहेगा। त्रिवेणी संग्रहालय के सामने स्थित वाहन पार्किंग के नजदीक श्री महाकाल मंदिर का नया अन्न क्षेत्र बनकर तैयार हो गया है। खास यह कि यहां का अधिकांश कार्य ऑटोमेटिक रहेगा जिसके लिए करीब ६ करोड़ रुपए की लागत की आधुनिक मशीनें इन्सटॉल की जा रही हैं। भवन का निर्माण सीएसआर मद से किया गया है। आर्किटेक्ट नितिन श्रीमाली बताते हैं, अन्न क्षेत्र में आंगतुक श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ ही सफाई व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया है।
पांच गुना से अधिक हुई क्षमता
वर्तमान में संचालित महाकाल मंदिर के अन्न क्षेत्र में एक समय में करीब १५० लोगों को भोजन कराया जाता है। प्रत्येक राउंड में औसत ३० मिनट लगते हैं। दोपहर १२ से शाम ५ व शाम ६ से रात ९ बजे तक करीब २३०० लोग भोजन करते हैं। नए अन्न क्षेत्र में निचे-ऊपर दोनों डाइनिंग रूम में एक समय में करीब एक हजार लोग एक साथ भोजन कर सकेंगे। इस तरह पुराने समय अनुसार एक दिन में १५ हजार से अधिक लोग भोजन प्रसादी प्राप्त कर पाएंगे। भोजन कराने की क्षमता बढऩे के साथ ही भोजन सामग्री की आवश्यकता भी बढ़ेगी। पुराने अन्न क्षेत्र में अभी प्रतिदिन औसत ३ क्वींटल आटा, ५० किलो दाल, १.५ क्विंटल चावल और २.५ क्विंटल सब्जी की खपत होती है।
51 हजार वर्ग फीट में निर्माण, वीआइपी बैठक भी
– करीब २४ करोड़ रुपए की लागत से ५१ हाजर वर्ग फीट में महाकाल अन्न क्षेत्र का निर्माण हुआ है। दो मंजिला इस भवन में भूतल पर डाइनिंग रूम, कीचन, वॉश एरिया, वेटिंग एरिया, टॉयलेट्स युनिट आदि है। इसी तरह पहली मंजिल पर भी डाइनिंग रूम कीचन, वॉश एरिया, टॉयलेट युनिट्स आदि। इस मंजिल पर विशिष्ट लोगों के भोजन के लिए प्रथक से डाइनिंग हॉल है भी जिसमें ४०-५० लोग भोजन कर सकते हैं। भविष्य में दूसरी मंजिल बनाने का विकल्प भी छोड़ा गया है। अन्न क्षेत्र को कुछ इस प्रकार तैयार किया गया है कि जहां इसका स्वरूप भक्तों के भोजन प्रसादी स्थल की तरह दिखता है वहीं इंटीरियर व उपयुक्त सामग्री किसी लग्जरी होटल से कम नहीं है। यह पूरी तरह सेंट्रल एयर कंडिशनर है। तीन लिफ्ट हैं जिसमें से एक कीचन में लगी है जो भोजन सामग्री लाने-लेजाने के काम आएगी। दो लिफ्ट श्रद्धालुओं के लिए रहेंगी। सुरक्षा के लिए बिल्डिंग में फायर सिस्टम, सीसी टीवी कैमरा आदि लगाए हैं।
ये मशीनें कुछ समय में बना देंगी हजारों का भोजन
छलनी- आटा छानने के लिए ऑटोमेटिक छलनी मशीन है। इसमें मोटा व बारिश, दोनो अनाज का आटा छन सकता है।
मल्ली मशीन- इसमें ऑटोमेटिक आंटा गुथा जाता है। एक बार में एक मशीन करीब २५ किलो आंटा गुंथ लेती है। चार नई मशीन आई हैं।
रोटी मेकर- करीब चार नई मशीने लगेंगी। एक मशीन एक घंटे में दो हजार रोटी बनाती है। मंदिर समिति के पास पहले से एक मशीन है।
वेजिटेबल वॉशर- इस मशीन में दो कंटेनर रहते हैं। सब्जी धुलकर कोल्ड रूम में रख दी जाएगी। जरूरत पडऩे पर दूसरी मशीन से आलु छीलने, इनके व सब्जी काटने का काम हो सकेगा।
केटल- इसमें सब्जी, दाल, चावल बनाए जा सकते हैं। एक मशीन की क्षमता करीब ढाई क्वींटल है। इसमें दाल-सब्जी को चलाने का कार्य भी ऑटोमेटिक हो जाता है। तीन मशीन आ चुकी हैं, कुछ और आएंगी।
ट्रॉली- भोजन परोसने के लिए ट्राली रहेंगी। पहीये लगी टॉली में भोजन रखा होगा। कर्मचारी इन्हें चलाते हुए आसानी से भोजन परोस सकेंगे।
डिश वॉशर- बर्तन धोने का कार्य भी ऑटोमेटिक होगा। इसके लिए हांगकांग से डिश वाशर मशीन मंगवाई है जो कुछ दिन में उज्जैन पहुंच जाएगी। झूटन हटाने के बाद बर्तन इस मशीन में डाले जाएंगे। मशीन बर्तन धोने के साथ ही इन्हें सूखाकर बाहर व्यवस्थित जमा देगी।
(जानकारी मंदिर व अन्न क्षेत्र से जुड़े लोगों से चर्चा के अनुसार)