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धनतेरस पर खत्म होगा महाकाल के श्रद्धालुओं का यह इंतजार

श्रद्धालुओं को मिलने लगेंगे चांदी के सिक्के

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महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने चांदी खरीदकर शुरू की सिक्के निर्माण की प्रक्रिया
उज्जैन. श्रद्धालुओं को राजाधिराज महाकाल के शिवलिंग और शिखर की आकृति वाले चांदी के सिक्कों के लिए कुछ दिन और इंतजार करना होगा। दरअसल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से बेचे जाने वाले सिक्के खत्म हो गए थे। समिति ने चांदी खरीदकर इनके निर्माण की औपचारिकता प्रारंभ कर दी है। उम्मीद है कि धनतेरस से श्रद्धालुओं को चांदी के सिक्के मिलने लगेंगे।
महाकाल मंदिर में श्रावण मास के बाद से चांदी के सिक्के खत्म हो गए थे। बाहर से आने वाले श्रद्धालु सिक्कों से वंचित थे। पत्रिका द्वारा इस मामले को उठाए जाने के बाद महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने सिक्के तैयार कराने की प्रक्रिया प्रारंभ की है। महाकाल मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को धनतेरस से पहले चांदी के सिक्के उपलब्ध हो जाएंगे। सिक्के बनवाने के लिए मंदिर समिति द्वारा ५ किलो चांदी खरीद कर सिक्कों की ढलाई के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए समिति का गठन किया गया है।
११ सौ रुपए में १० ग्राम का सिक्का
मंदिर प्रबंध समिति की ओर से १० ग्राम चांदी का सिक्का ११ सौ रुपए में बेचा जाता है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं में इन सिक्कों की खासी मांग रहती है। मंदिर प्रबंध समिति कुशल कारीगर को चांदी देकर उचित पारिश्रमिक के आधार पर सिक्के तैयार कराती है। करीब २ माह से सिक्के बनकर नहीं आ रहे थे। मंदिर समिति के पास स्टॉक में जो थे वह खत्म हो गए हैं। मंदिर समिति ने दो माह से न आर्डर दिया है और ना ही कारीगर को चांदी दी है। महाकालेश्वर भगवान के शिवलिंग और मंदिर शिखर की उकेरी गई आकृति के सिक्कों की मांग दीपावली, गुड़ी-पड़वा और नववर्ष पर अधिक होती है। दीपावली पर खासतौर से चांदी के सिक्कों की मांग रहती है।

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