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पौराणिक गोवर्धन सागर पर इतने लोगों का कब्जा..निगम ने थमाए नोटिस

सागर की भूमि सर्वे क्रमांक 1281 पर हुआ है अवैध निर्माण, कोर्ट ने सागर की जमीन को घोषित किया है सरकारी

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So many people occupied the legendary Govardhan Sagar.

सागर की भूमि सर्वे क्रमांक 1281 पर हुआ है अवैध निर्माण, कोर्ट ने सागर की जमीन को घोषित किया है सरकारी

उज्जैन। पौराणिक गोवर्धन सागर की जमीन पर हुए अवैध निर्माण को हटाने को लेकर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। निगम ने सागर की सर्वे क्रमांक १२८१ पर हुए निर्माण को अवैध मानते हुए इन्हें हटाने के नेाटिस जारी किए है। करीब २४ लोगों को थमाए गए नोटिस में इन्हें अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई है। दअरसल पिछले दिनों न्यायालय ने सर्वे क्रमांक १२८१ को सरकारी भूमि माना था, इसके बाद निगम ने इस सर्वे क्रमांक पर हुए निर्माण करने वालों को नोटिस जारी किए हैं।
गोवर्धन सागर की जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ। सागर की जमीन पर कॉलोनी, मार्केट, शादी घर से लेकर नर्सरी व सागर किनारे गुमटियां तक लग गई है। गोवर्धन सागर की जमीन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी सुनवाई चल रही है। एनजीटी ने भी माना है कि तालाब की सरकारी है। वहीं पिछले दिनों एडीजे कोर्ट ने भी अपने फैसले में सागर की भूमि सर्वे क्रमांक १२८१ को तालाब की जमीन को शासकीय मानने के आदेश जारी किए थे। इसी आदेश के बाद कलेक्टर आशीषसिंह ने नगर निगम को सागर की जमीन पर हुए अवैध कब्जे व अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इस पर नगर निगम की ओर से सागर की जमीन पर हुए निर्माण को लेकर करीब २४ लोगों को नोटिस दिए गए । नोटिस में कहा गया है कि सर्वे क्रमांक १२८१ पर निर्माण किया गया है, जो अवैध है। इन्हें हटाया जाए। निगम द्वारा दिए गए इस नोटिस के बाद से क्षेत्र के लोगों में हडक़ंप मचा हुआ है। बता दें कि गोवर्धन सागर करीब ३६ बीघा में फैला हुआ था वर्तमान में २४ बीघा तक ही सीमट कर रह गया है।
नोटिस मिलने पर लोगों ने जताई आपत्ति
नगर निगम द्वारा गोवर्धन सागर की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर जारी किए गए नेाटिस के बाद लोगों ने आपत्ति जताई। प्रतिनिधि मंडल के रूप में े निगम सभापति कलावती यादव से मिलकर निगम की कार्रवाई का विरोध किया है। इनका कहना है कि उनके मकान सर्वे क्रमांक १२८९/१ पर है, जो कि गोवर्धन सागर क्षेत्र के अंतगृत नहीं आता। जबकि निगम ने सर्वे क्रमांक १२८१ के आधार पर नोटिस दे दिए। रहवासियों का कहना था यहां मकान निर्माण के लिए निगम ने ही नक्शा व अनुमति दी है तो फिर निर्माण अवैध कैसे हो गया। निगम सभापति यादव ने रहवासियों को आश्वस्त किया है कि प्रकरण में जांच की जाएगी आवश्यकता हुई तो पुन: नोटिस जारी कर पक्ष सुना जाएगा।