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सोशल क्रांति: जनभागीदारी और 5 वर्ष में १७०० करोड़ से बारहमासी बनेगी शिप्रा

अविरल बहे शिप्रा... इंदौर-उज्जैन वाले ग्रुप के पर्यावरणविद्, रिसर्चर और साइंटिस्ट ने बनाया प्रोजेक्टशिप्रा के जलतंत्र से पुनर्जीवन

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Social revolution: Public participation and Shipra will become perennial with 1700 crores in 5 years

अविरल बहे शिप्रा... इंदौर-उज्जैन वाले ग्रुप के पर्यावरणविद्, रिसर्चर और साइंटिस्ट ने बनाया प्रोजेक्टशिप्रा के जलतंत्र से पुनर्जीवन

उज्जैन. मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के उद्धार को लेकर अब तक सरकारी जतन होते आए हैं लेकिन पहली बार जनजगारूकता व निजी प्रयासों से इसकी दशा बदलने के नए प्रयास शुरू हुए हैं। उज्जैन और इंदौर वाले सोशल ग्रुप से जुड़े साइंटिस्ट, रिसर्चर प्लानर और जलसंवर्धन के विशेषज्ञों ने मिलकर शिप्रा अविरल प्रवाह प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें 1700 करोड़ की लागत से पांच वर्ष में जनभागीदारी से शिप्रा को पुन: बारहमासी नदी बनाने का प्लान तैयार है। शिप्रा अविरल प्रवाह प्रोजेक्ट का मुख्यमंत्री शिवराजङ्क्षसह चौहान के सामने प्रजेंटेंशन भी दिया जा चुका है। सीएम चौहान ने इस पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
अगर प्रोजेक्ट क्रियान्वित होता है तो ङ्क्षसहस्थ में करोड़ों श्रद्धालु शिप्रा के पानी से नहान कर सकेंगे। मालवा की मोक्षदायिनी शिप्रा को लेकर यह योजना उसके जलतंत्र को पुर्नजीवित करने पर आधारित है। इसमें भूजल , वर्षा जल संचयन और उन्नत कृषि ङ्क्षसचाई के तरीकों से जल उपयोग , जन जागरण और लेटेस्ट सेंसर पर आधारित मॉनिटङ्क्षरग सिस्टम बनाकर शिप्रा को नया जीवन देने का कांसेप्ट तैयार किया गया है। इसके लिए उज्जैन और इंदौर वाले ग्रुप से जुड़े पर्यावरण और जल विशेषज्ञों का पैनल बनाया गया। इनके द्वारा तैयारी की गई स्टडी और सर्वे के आधार पर शिप्रा प्रवाहमान बनाया जाएगा।
दो लाख परिवारों को जोड़ेंगे-शिप्रा अविरल प्रवाह प्रोजेक्ट में सोशल मीडिया और आईसी से 2 लाख परिवारों को जोडऩे का दावा भी किया गया है। वहीं इस प्रोजेक्ट को क्रियान्वित होने पर 3 वर्षों में रिजल्ट देने की बात कही गई है। वहीं प्रोजेक्ट से 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में स्मार्ट ङ्क्षसचाई के साथ हजारों किसानों को फायदा के साथ नए रोजगार व स्टार्टअप भी पैदा होंगे।
ऐसे करेंगे काम
शिप्रा के उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करना।
ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करना।
शिप्रा की सहायक नदी कान्ह और गंभीर के साथ जल शुद्धिकरण।
शिप्रा को चंबल में संगम तक पूर्णत: स्वच्छ करना।
शिप्रा में गंदे पानी की रोकथाम।

कैचमेंट एरिया को समृद्ध करना होगा
शिप्रा नदी को स्वच्छ व प्रवाहमान बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किए जाने की आवश्यकता है। शिप्रा के कैचमेंट एरिया, सहायक नदी व जलस्रोतों को संवारते हैं, तो इससे निश्चित तौर पर नदी में पानी बढ़ेगा। शिप्रा के संरक्षण में आम लोगों को जोडऩे, जनजागरुकता फैलाने से नदी किनारे पौधरोपण व गंदगी मिलने से रोकने पर प्रभावी काम हो सकता है। अगर ऐसे प्रोजेक्ट में किसानों को युवाओ को रोजगार के अवसर भी मिलते हैं तो शिप्रा नदी के उद्धार किया जा सकता है। शिप्रा के लिए महज सरकार के भरोसे न रहकर आम व्यक्ति या संगठन को आगे आने की जरूरत है।
राजीव पाहवा, पर्यावरणविद्
ऐसे अविरल बनेगी शिप्रा