उज्जैन. दौर बदल रहा है, शहर बदल रहा है। लोगों की चॉइस में भी बदलाव हो रहा है। बच्चे. टीएनएजर्स और यंगस्टर्स में रुचि को निखारने का ट्रेंड बढ़ रहा है। मोबाइल-लैपटॉप से दूरी बनाकर बच्चे और यंगस्टर्स क्लासिकल तथा वेस्टर्न डांस के स्टेप्स सीख रहे हैं। बच्चों का कहना है, डांस करने से एक तो शारीरिक फिटनेस बनी रहती है, पसीना निकल जाता है, तो बीमारियां दूर रहती हैं।
सीखने की उम्र नहीं, डांस से आता है कॉन्फिडेंस
सीखने की कोई उम्र नहीं होती, बस मन में इच्छाशक्ति चाहिए। डांस करने से मन हल्का होता है, साथ ही कॉन्फिडेंस भी आता है, फिटनेस बनी रहती है। भगवान शिव ने डमरू लेकर नटराज किया था और श्रीकृष्ण ने मधुबन में डांडिया रास रचाकर सबको नृत्य से आराधना में लीन होना सिखाया। यह भी एक प्रकार की भक्ति है। बच्चों और युवाओं में इसके प्रति लगाव बढ़ रहा है। हमारे यहां भरतनाट््यम और कथक को अधिक पसंद किया जाता है।
वेस्टर्न डांस सिखाने वाली संस्थाएं
8 एकेडमी, 400 बच्चे सीख रहे डांस, 800 से 1500 रुपए महीना फीस
क्लासिकल डांस सिखाने वाली संस्थाएं
10 एकेडमी, 700 बच्चे सीख रहे डांस, 800 से 1000 रुपए महीना फीस
15 वर्षों से शहर में बच्चों, युवाओं और महिलाओं को फिटनेस तथा वेस्टर्न डांस सिखाती हूं। बच्चों को सबसे ज्यादा वेस्टर्न डांस पसंद हैं। हमारे यहां सालसा, वॉल्टस (वॉल रूम डांस), लिरिकल, हिप-हॉप, कंटेम्प्ररी, बॉलीवुड और सेमी क्लासिकल डांस सिखाया जाता है।
रजनी रत्नाकर, रॉक डांस
शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य से बड़ा परिवर्तन आया है। कालिदास अकादमी हो, महाकाल मंदिर में श्रावण महोत्सव, उमा-सांझी पर्व हो या अन्य कोई इवेंट सबसे ज्यादा क्लासिकल डांस करने वालों की डिमांड की जाती है। यह हमारी धरती और हमारी संस्कृति से जुड़ा नृत्य है।
पलक पटवर्धन, निनाद नृत्य अकादमी