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नागपंचमी पर रात 12 बजे पट खुले, श्री नागचंद्रेश्वर भगवान का हुआ पूजन

दर्शन के लिए श्रद्धालु कतार में, साल में एक बार होते हैं महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित श्री नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन

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The doors opened at 12 o'clock on Nagpanchami, Shri Nagchandreshwar was worshipped.

दर्शन के लिए श्रद्धालु कतार में, साल में एक बार होते हैं महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित श्री नागचंद्रेश्वर भगवान के

उज्जैन. श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष शिखर पर स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में एक बार नागपंचमी को रात बजे खुलते हैं। इस वर्ष भी यह पावन अवसर 1 अगस्त सोमवार (नागपंचमी) की रात्रि को 12 बजे आया। मंदिर के पट खुलने के बाद श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी एवं मप्र उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ द्वारा प्रथम पूजन व अभिषेक किया गया। पूजन के बाद गर्भगृह स्थित शिवलिंग का पूजन किया गया।

मंदिर दर्शन की यह है व्यवस्था
नागचंद्रेश्वर मंदिर पहुंचने के लिए अलग से कतार में लगना होगा। यह कतार चारधाम मंदिर से शुरू होगी। सोमवार रात 12 बजे पट खुलने के बाद मंगलवार को रात 12 बजे पट बंद होंगे। सामान्य श्रद्धालुओं को चारधाम मंदिर के जिगजैक से होकर हरसिद्धि चौराहा से बड़ा गणेश के सामने, गेट चार नंबर से विश्राम धाम पहुंचना होगा। यहां रेलिंग से नए ब्रिज से नागचंद्रेश्वर तक जाएंगे। निर्गम के लिए विश्राम धाम से होकर मार्बल गलियारे से मंदिर के मुख्य पालकी द्वार से बाहर होंगे। नागचंद्रेश्वर मंदिर में शीघ्र दर्शन टिकट लेने वाले दर्शनार्थी चारधाम से आकर हरसिद्धि से शामिल होकर दूसरी कतार से सामान्य दर्शनार्थी के साथ मंदिर पहुंचेंगे। मुख्य गेट से बाहर होकर हरसिद्धि तक पहुंचेंगे। नर्माल्य गेट से प्रवेश के बाद सभा मंडप के ऊपर से होकर रैंप से विश्राम धाम पहुंचकर नए ब्रिज से दर्शन करेंगे। विश्राम धाम होकर सभामंडप के ऊपर से रैंप से ही वापसी। कर्कराज मंदिर, नृसिंह घाट, कार्तिक मेला मैदान तरफ जूता स्टैंड, खोया-पाया केंद्र, लड्डू प्रसाद। नागचंद्रेश्वर और महाकालेश्वर मंदिर जाने के लिए अलग-अलग कतार रहेगी। आम श्रद्धालु नृसिंहघाट के सामने से होकर चारधाम जिगजैक से होकर हरसिद्धि चौराहा से बड़ा गणेश के सामने, गेट चार नंबर से विश्राम धाम पहुंचेंगे। शीघ्र दर्शन टिकट वाले चारधाम से हरसिद्धि से शामिल होकर दूसरी कतार से सामान्य दर्शनार्थी के साथ मंदिर पहुंचेंगे।

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