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उज्जैन. पुष्पामिशन हॉस्पिटल प्रबंधन और सांसद प्रतिनिधि गगनसिंह के बीच जमीन को लेकर उपजे विवाद और आरोपों के बाद राजस्व विभाग ने क्षेत्र में पाइंट टू पाइंट हकीकत पता कर ली है। पुष्पामिशन रोड की शासकीय जमीन पर किसी प्रकार का कब्जा है या नहीं, यह पता लगाने के लिए आधा दर्जन से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों ने विभिन्न दिशाओं में ५०० मीटर दूर तक के पाइंट्स से नप्ती शुरू और सुबह १० से शाम ६ बजे तक की मशक्कत के बाद सड़क की स्थिति स्पष्ट की। सभी पहलुओं को ठोक बजाकर किए गए सीमांकन में सड़क की सरकारी जमीन पर किसी का अतिक्रमण नहीं पाया गया है।
पुष्पामिशन हॉस्पिटल और आजादनगर के बीच की सड़क पर सरकारी जमीन के घालमेल की आशंका और लग रही अटकलों को लेकर स्थति लगभग साफ हो गई है। दरअसल रोड की शासकीय जमीन सर्वे नंबर ७४० पर अतिक्रमण या अवैध कब्जे की आशंका जताई जा रही थी। इसके चलते शुक्रवार को तहसीलदार सुदीप मीणा, नायब तहसीलदार मूलचंद जूनवाल, एसएलआर अनिल शर्मा, यूडीए के संजय शाह, आरआई कमल मेहरा आदि की टीम ने सर्वे नंबर ७४० की जमीन सीमांकन किया। इसके लिए ऋषिनगर आरटीओ चौराहा स्थित नाला, देवासरोड तीन बत्ती चौराहा, पंचमपुरा-मुनिनगर तिराहा से अलग-अलग पाइंट लेकर सीमांकन शुरू किया। करीब आठ घंटे तक सीमांकन की कार्रवाई के बाद पुष्पामिशन रोड की शासकीय जमीन को लेकर स्थति स्पष्ट हो सकी। नायब तहसीलदार जूनवाल के अनुसार सड़क की जमीन यथावत है और उस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं पाया गया है। सीमांकन होने के बाद दल ने पंचनामा तैयार किया, जिस पुष्पामिशन प्रबंधन व सांसद प्रतिनिधि की ओर से भी हस्ताक्षर किए गए।
दो बीघा जमीन को लेकर संशय
सीमांकन के दौरान नवकार पैराडाइज के पीछे स्थित करीब दो बीघा जमीन को लेकर संशय की स्थिति बनी है। दरअसल सरकारी रिकॉर्ड में उक्त क्षेत्र व आसपास स्कूल व यूडीए की जमीन स्थित है। वर्तमान में जमीन पर वॉलबाउंड्री बनी हुई है। यदि स्कूल प्रबंधन या यूडीए मांग करता है तो उक्त जमीन का भी सीमांकन किया जा सकता है।
मार्ग टेढ़ा होने से उठे सवाल
कुछ महीनों पूर्व सांसद प्रतिनिधि गगनसिंह ने पुष्पामिशन अस्पताल से ऋषिनगर की ओर मोड़ के कोने की जमीन को अपने पिता की बताते हुए सीमांकन करने व कब्जा दिलाने की मांग की थी जबकि उक्त हिस्से को पुष्पामिशन अस्पताल प्रबंधन ने उनके स्वामित्व की होने का दावा किया था। प्रशासन के सीमांकन में जमीन गगनसिंह की पाई गई और बाद में उन्हें कब्जा भी दिलाया गया। विवादित जमीन पर फेंसिंग के बाद मोड़ वाले क्षेत्र में मार्ग का आकार बदल गया। इससे यह आशंका खड़ी हो गई कि सड़क की सरकारी जमीन पर कहीं न कहीं अतिक्रमण है। अटकलें यह भी लगने लगी कि आवासीय क्षेत्र आजादनगर का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर आ गया है। मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंचा। विस्तृत सीमांकन के लिए लंबे समय से तैयारियां चल रही थीं। यही कारण रहा कि सीमांकन के लिए दूर-दूर के पाइंट्स को आधार बनाया गया ताकि अब किसी प्रकार का संशय न रहे।
Published on:
23 Jun 2018 08:00 am
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