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उज्जैन.विक्रम विवि के कुलपति ने भले ही त्यागपत्र देने के लिए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया, लेकिन इसकी वास्तविकता कुछ ओर है। तयागपत्र के देने के पीछे खास मंशा बारकोड की विसंगतियों के किसी भी आरोप और विवादों से बचने की है। दरअसल विक्रम विवि में इन दिनों सबसे बड़ा मुद्दा बारकोड की विसंगतियों के कारण परीक्षा परिणामों में विलंब और आए दिन छात्र संगठनों का प्रदर्शन हो रहा है। बारकोड उत्तर पुस्तिका पर परीक्षा लेने और परिणाम तैयार करने की नई एजेंसी तय करने का निर्णय पूर्व कुलपति के कार्यकाल का था। मामले पर विवाद बढ़ता देख और किसी भी आरोप से बचने के लिए कुलपति प्रो.बालकृष्ण शर्मा ने त्यागपत्र का सहारा लिया। राज्यपाल लालजी टंडन ने कुलपति प्रो.शर्मा का इस्तीफा नामंजूर कर दिया है और उन्हें पद पर बने रहने को कहा है।
यह है मसला
विक्रम विश्वविद्यालय एक तरफ बार कोड की विसंगति से परिणाम अटके हुए हैं तो रिजल्ट तैयार करने का कार्य अनुभवहीन एजेंसी से कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने एजेंसी से अनुबंध तक नहीं किया हैं। विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों के रिजल्ट अटके हुए हैं। यह स्थिति परीक्षा में बारकोड वाली उत्तर पुस्तिका के उपयोग और अनुभवहीन एजेंसी को रिजल्ट बनाने का काम देने वजह से बनी है। स्नातक स्तर पर वार्षिक प्रणाली की प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाओं में बारकोड उत्तर पुस्तिका का उपयोग करने का निर्णय पूर्व कुलपति एसएस पांडे के कार्यकाल में लेकर प्रथम एवं द्वितीय वर्ष की बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएचएससी, बीबीए, बीसी, और बीकॉम ऑनर्स की परीक्षा इन्हीं बार कोड वाली उत्तर पुस्तिकाओं पर ली गई। नागपुर की इमर्ज सर्विसेस के जिम्मे था रिजल्ट देनारिजल्ट बनाने का काम पहले नागपुर की इमर्ज सर्विसेस के पास था। इसी एजेंसी के कार्यकाल के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं पर बार कोडिंग की गई थी। इस एजेंसी का ठेका खत्म होने पर विवि ने रिजल्ट बनाने के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। इसमें इमेज इन इंडिया सॉल्यूशन दिल्ली को दर कम होने पर परीक्षा परिणाम प्रोसेसिंग का काम दिया गया था। नई एजेंसी द्वारा बगैर अनुबंध के कार्य किया जा रहा है। इसमें दोनों निर्णय में प्रो.शर्मा की भूमिका नहीं थी। अनुभवहीनता के कारण नई एजेंसी पहले ही सही तरीके से रिजल्ट बनाने में असफल है।
राजभवन को विवि की जानकारी मिलती रहीं
परीक्षा परिणामों में विलंब और अनेक विसंगतियों को लेकर कांग्रेस से संबंधित छात्र संगठन द्वारा लगातार प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी दे रहें थे। एेसे में राजभवन को विवि के घटनाक्रम की जानकारी मिलती रहीं और वास्तविकता जानने के लिए विक्रम विवि कुलपति को राजभवन बुलावाया गया था। इस बीच प्रो.शर्मा ने किसी भी आरोप में पडऩे और विवाद से बचने के लिए अपना त्यागपत्र भेज दिया।
कुलपति ने राज्यपाल के समक्ष रखा पक्ष
असल में राज्यपाल लालजी टंडन ने विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शर्मा को भोपाल आकर अपना पक्ष रखने को कहा था। राज्यपाल ने इस्तीफा देने के कारणों के संबंध में जानकारी मांगी। कुलपति ने राज्यपाल को संपूर्ण स्थिति से अवगत कराया। राज्यपाल टंडन ने कुलपति प्रो.शर्मा से कहा कि प्राप्त अधिकारों का निष्पक्ष रहकर विवेकपूर्ण उपयोग कर उचित निर्णय लें। विश्वविद्यालय की गरिमा और शिक्षण व्यवस्था के लिए अनुशासित व्यवहार अनिवार्य है।
Published on:
28 Sept 2019 10:02 pm
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