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कवित्त शैली में “राधाकृष्ण युगल अवतार” नाटक का मंचन

इस्कॉन के भक्तों और गौडीय वैष्णव जगत में यह पर्व भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है, क्योंकि होली के दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी सबसे प्रिय भक्त राधारानी का भाव धारण कर शाम के समय मायापुर में अवतरित हुए।

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Three day festival on the occasion of Holi in ISKCON temple

इस्कॉन के भक्तों और गौडीय वैष्णव जगत में यह पर्व भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है, क्योंकि होली के दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी सबसे प्रिय भक्त राधारानी का भाव धारण कर शाम के समय मायापुर में अवतरित हुए।

उज्जैन. इस्कॉन मंदिर में होली के अवसर पर तीन दिवसीय महोत्सव मनाया जा रहा है। इसके तहत चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव दिवस का उल्लास छाया हुआ है। इस्कॉन के भक्तों और गौडीय वैष्णव जगत में यह पर्व भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है, क्योंकि होली के दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी सबसे प्रिय भक्त राधारानी का भाव धारण कर शाम के समय मायापुर में अवतरित हुए। भक्ति का यह सबसे अनुरूप अवतार है, क्योंकि इस अवतार में भगवान श्रीकृष्ण कोई शस्त्र धारण नहीं करते, बल्कि जीवों पर दया कर अपना प्रेम प्रदान करते हैं।

नगर संकीर्तन निकला गया
पीआरओ राघव पंडितदास ने बताया इस अवसर पर इस्कॉन में नगर संकीर्तन निकला गया, जिसमें लगभग 100 भक्त मृदंग की थाप और करताल बजाकर भगवन्नाम का कीर्तन करते हुए टावर चौक फ्रीगंज से तीन बत्ती देवास रोड होते हुए इस्कॉन मंदिर पहुंचे। नव निर्मित पूर्णत: वातानुकूलित सभागृह में सांस्कृतिक कार्यक्रम रविवारीय स्कूल द्वारा कृष्ण अर्जुन संवाद, लड़कियों द्वारा चैतन्य महाप्रभु के प्रकट होने के कारणों और पृथ्वी पर उनकी लीलाओं को दर्शाने वाले "शचिसुताष्टकम" पर आधारित नृत्य और प्राची द्वारा रचित कवित्त शैली में "राधाकृष्ण युगल अवतार" नाटक का मंचन हुआ और भक्ति वृक्ष के भक्तों द्वारा "चांदकाजी का उद्धार" नाटक प्रस्तुत किया गया।

शास्त्रों में शिक्षा, भागवत में प्रेम
शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इन लीलाओं को सुनता है वह हमेशा आनंद में रहता है और भगवान के लिए प्रेम विकसित करता है। रविवारीय स्कूल के छोटे छोटे भक्तों ने हमें भगवद गीता से कृष्ण और अर्जुन की शिक्षाओं से भी अवगत कराया। इस्कॉन यूथ फोरम के युवा ड्रम प्रस्तुत करेंगे। कुल मिलाकर भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में समृद्ध प्रदर्शनों से भरी शाम होगी। प्रात: 4;30 बजे मंगल आरती में सैंकड़ों भक्त सम्मिलित हुए।

दर्शन आरती में भक्तों ने किया नृत्य
बेल्जियम से आये सन्यासी परम पूज्य भक्ति प्रभव स्वामी महाराज कथा कृष्ण प्रेम को रेखांकित किया। प्रात: 8:30 पर दर्शन आरती हुईं जिसमें भगवान फूलों की पोशाक में दर्शन दिए। दिनभर आनन्ददायक कीर्तन होता रहा, भक्त नृत्य में लीन रहे। सायं 4:30 पर जगदानंद प्रभु गौर कथा की। सायं 5:30 पर अभिषेक उपरान्त 7 बजे गौर आरती हुई। फरियाली खिचड़ी प्रसाद का वितरण होता रहा।

सांदीपनि आश्रम में उड़ा आस्था का गुलाल
इधर, होली के पावन पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली सांदीपनि आश्रम में शनिवार को फाग उत्सव का आयोजन हुआ। पुजारी रूपम व्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली, महर्षि सांदीपनि आश्रम में फागोत्सव के आनंद का उत्सव मनाया गया। उपस्थित भक्तों पर जमकर गुलाल की वर्षा की गई। भक्तों ने भगवान अपने कान्हा जी के साथ खूब होली खेली।