5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सावन के आखिरी सोमवार को नगर भ्रमण पर निकले महाकाल

श्रावण मास के अंतिम सोमवार को राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर की पांचवीं सवारी धूमधाम के साथ निकली।

2 min read
Google source verification

image

Shailendra Tiwari

Aug 07, 2017

patrika

Mahakal Temple,Baba Mahakal,

उज्जैन. श्रावण मास के अंतिम सोमवार को राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर की पांचवीं सवारी धूमधाम के साथ निकली। प्रजा का हाल जानने के लिए भगवान महाकाल फूलों से सजी हुई चांदी की पालकी में विराजमान होकर निकले। पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ पर शिव तांडव, रथ पर उमा महेश तथा पांचवी सवारी में घटाटोप स्वरूप में भगवान महाकाल ने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। मंदिर के सभा मंडप में पूजन आरती के पश्चात राजाधिराज की प्रतिमा को पालकी में विराजमान किया। इसके बाद सवारी मंदिर से चलकर बाहर आई, तो गार्ड ऑफ दिया गया। पुलिस बैंड ने सलामी दी और ओम नम: शिवाय की मधुर धुन बजाते हुए पालकी के आगे-आगे चले। सवारी में पर्याप्त संख्या में घुड़सवार बल मौजूद था। सशस्त्र पुलिस बल के अलावा भजन मंडलियां और अन्य झांझ-डमरू बजाने वाले भक्त चल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने परिवार के साथ किए महाकाल दर्शन
राजाधिराज भगवान महाकाल के दरबार में सुबह प्रात:कालीन आरती के दौरान मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अपने पूरे परिवार के साथ आए और उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में पंचामृत पूजा संपन्न की। उनके साथ पत्नी साधना सिंह और पुत्र कार्तिकेय भी थे।

राखी पर लगा सवा लाख लड्डुओं का भोग
राखी के त्योहार पर बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग अर्पण करने की परंपरा निभाई गई। सवा लाख लड्डुओं का भोग मंदिर के अभिषेक स्थल पर लगाया गया। इस बार पुजारी राजेश शर्मा की ओर से यह प्रसाद बाबा को अर्पण किया गया। राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर को सबसे पहले राखी बांधी गई। परंपरानुसार हर त्योहार की शुरुआत भगवान महाकाल के दरबार से होती है। इसी परंपरा का निर्वाहन सोमवार को भस्म आरती के दौरान महाकाल को राखी बांधकर किया गया। राखी बांधने के पूर्व नंदी हॉल और गर्भगृह में फूलों से आकर्षक शृंगार किया गया। इसके बाद सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी बाबा को अर्पण किया गया।

ये भी पढ़ें

image