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इस्कॉन को आवंटित करोड़ों की जमीन वापस लेगा यूडीए

आवंटित जमीन की लीज डीड हुई निरस्त, वराह मिहिर कंपनी को नोटिस भेजकर 5 फरवरी को 2.88 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे लेने को कहा

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इस्कॉन को आवंटित करोड़ों की जमीन वापस लेगा यूडीए

आवंटित जमीन की लीज डीड हुई निरस्त, वराह मिहिर कंपनी को नोटिस भेजकर 5 फरवरी को 2.88 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे लेने को कहा

उज्जैन. उज्जैन विकास प्राधिकरण की ओर से इॅस्कान की संस्था वराह मिहिर इन्फो डोमेन प्रालि को आइटी पार्क बनाने के लिए 2005 में दी गई 2.88 हेक्टेयर जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया है। वहीं अब जमीन पर कब्जा लेने के लिए 5 फरवरी की तारीख तय की गई है। दरअसल जमीन पर समय सीमा पर आइटी पार्क नहीं बनाने के लिए चलते यूडीए ने यह कार्रवाई की है।
प्राधिकरण ने भरतपुरी क्षेत्र में भूखंड क्रमांक 43 को आइटी पार्क बनाने के लिए आवंटित किया था। यह भूमि रियायती दर पर महज 500 रुपए प्रति वर्ग मीटर के मान से वराह मिहिर कंपनी को दी गई थी। जमीन आवंटन के समय शर्त रखी गई थी कि कंपनी एक साल में आइटी पार्क निर्माण के लिए भवन अनुज्ञा लेगी तथा अगले तीन वर्ष में 10 हजार वर्ग फीट पर निर्माण कार्य करेगी। इसके बाद फिर 10 हजार फीट पर निर्माण होगा। स्थिति यह रही कि वराह मिहिर कंपनी द्वारा 2020 तक की अवधि में आइटी पार्क निर्माण को लेकर कोई कवायद नहीं की। लिहाजा यूडीए अध्यक्ष व संभागायुक्त अजीत कुमार की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इस्कॉन को आवंटित भूखंड का आवंटन निरस्त करने का फैसला ले लिया था। इसी तारतम्य में वराह मिहिर कंपनी के डायरेक्टर विमल कृष्णदास को नोटिस भेजकर आवंटन व लीजडीड निरस्त करने की बात कही है। साथ ही 5 फरवरी को भूखंड कब्जा लेने की कार्रवाई करने की बात कहते हुए मौके पर उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।
आइटी पार्क बनाने हमेशा मांगते रहे समय
समय-सीमा में आइटी पार्क नहीं बनाए जाने पर यूडीए ने इस्कॉन की संस्था वराह मिहिर प्रालि को लगातार नोटिस भी जारी किए। इसमें कंपनी द्वारा हमेशा समय की मांग की गई। यूडीए ने 7 अगस्त 2019 को पत्र भेजा था इसके जवाब में कंपनी की ओर से कहा गया था आइटी पार्क निर्माण एक बड़ा मसला और फिलहाल भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारी में लगे हैं। जवाब देने के लिए 5 सितंबर का समय दिया जाए। स्थिति यह रही कि कंपनी की ओर से इसका जवाब ही नहीं दिया।
गिरवी रख ले लिया लोन
आइटी पार्क बनाने के लिए दिए गए भूखंड को एक बैंक में रखकर कंपनी ने लोन भी ले लिया था। वहीं किस्त की राशि नहीं चुकाने पर बैंक ने इस भूखंड को कब्जे में ले लिया था। बाद में कंपनी ने बैंक में रुपए जमा कर इसे छुड़वाया था। बैंक से छुडऩे के बाद प्राधिकरण ने इसके आवंटन के निरस्ती की कार्रवाई कर दी।
कब्जा देने को कहा गया है
जमीन पर समय सीमा में निर्माण नहीं होने पर इसका आवंटन निरस्त कर दिया गया है। संबंधित को नोटिस भेजकर कब्जा देने को कहा गया है।
-सोजानसिंह रावत, सीइओ, यूडीए