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उज्जैन. देश के स्वच्छ शहरों में उज्जैन 7 अंक पीछे रह गया। बता दें, कि स्वच्छ शहरों के सर्वे में उज्जैन मप्र के 17वें नंबर पर है। शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के नतीजे घोषित हुए, जिसमें जनसंख्यावार शहरों की रैंकिंग जारी की गई। निगम अधिकारियों को उम्मीद थी कि शहर देश के टॉप 10 शहरों में शामिल हो सकता है, लेकिन ऐसा हो न सका।
पिछले साल 12वें नंबर पर था उज्जैन
वर्ष 2017 की स्वच्छ रैंकिंग में शहर का 12वां नंबर था। इसके बाद बेहतर बनने के लिए शहर में सफाई इंतजाम, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, कचरा पृथकीकरण, नवाचार, सिटीजन फीडबैक आदि में कई काम हुए। इन सबकी कसौटी पर शहर उतना खरा नहीं उतर सका है। कई दिनों से हर किसी को शहर की रैंकिंग का बेसब्री से इंतजार था।
5 करोड़ से बने 2 हजार आवास, ई लोकार्पण
उज्जैन में 5 करोड़ रुपए के सरकारी अनुदान से 2 हजार आवास तैयार हुए हैं। इन सभी का इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में ई लोकार्पण किया गया, इधर शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम की रिहर्सल की और लाइव प्रसारण संबंधी तकनीकी परीक्षण किया था, लेकिन बारिश ने खलल डाला।
पीएम के हाथों सम्मानित हुए कलेक्टर
कलेक्टर मनीष सिंह के इंदौर नगर निगम आयुक्त रहने केदौरान इंदौर में स्वच्छता को लेकर कार्य किए गए थे। इसके चलते इंदौर दूसरी बार स्वच्छता सर्वेक्षण में देश में पहले नंबर पर आया। उपलब्धि पर शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने इंदौर में गृहप्रवेश उत्सव कार्यक्रम में कलेक्टर सिंह को सम्मानित किया।
मप्र का कौन सा शहर किस नंबर पर
इंदौर 1, भोपाल 2, खरगौन 15, उज्जैन 17, सिंगरौली 23, मंदसौर 24, जबलपुर 25, छिंदवाड़ा 42, सागर 46, रीवा 49, पीथमपुर 62, देवास 68, नीमच 70, रतलाम 72, होशंगाबाद 75, नागदा 79, छतरपुर 92, सतना 93, खंडवा 99
जनवरी से मार्च तक 4203 शहरों में प्रतिस्पर्धा चली
4 जनवरी से 10 मार्च तक चले विश्व के सबसे बड़े सर्वेक्षण में 4203 शहरों के बीच सबसे स्वच्छ शहर बनने की प्रतिस्पर्धा चली। 94000 घरों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की जांच हुई। 46000 आवासीय क्षेत्र पर ओचक निरीक्षण किया गया। 28000 व्यावसायिक क्षेत्रों का निरीक्षण हुआ। 25000 स्कूलों में स्वच्छता समीति की जांच की गई। 25000 प्रोसेसिंग प्लांट का निरीक्षण किया गया। 37.66 लाख लोगों की राय ली गई। 53.58 लाख स्वच्छता ऐप डाउनलोड हुई। जनता ने 1.18 करोड़ शिकायतें दर्ज कराई। 63 सर्वेक्षकों की टीम ने इस पूरे सर्वेक्षण को अंजाम दिया। स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 कड़ी है, उससे शहरों को स्वच्छ बनाने के उस मुहिम की जिसका आगाज 2016 में हो गया था। शहरों के बीच छिड़ी प्रतिस्पर्धा ने शहरों को स्वच्छ बनाने में अहम भूमिका निभाई है। लक्ष्य 2019 तक देश को स्वच्छ बनाने का है।
Updated on:
23 Jun 2018 06:56 pm
Published on:
23 Jun 2018 06:49 pm
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