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Video पत्रिका के 9वें स्थापना दिवस पर धार्मिक व सामाजिक संगठनों के प्रबुद्धजनों ने रखे अपने विचार

उज्जैन में पत्रिका का नौ वां स्थापना दिवस धर्म गुरु व सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रबुद्धजनों के साथ मनाया गया।

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उज्जैन. उज्जैन में पत्रिका का नौ वां स्थापना दिवस धर्म गुरु व सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रबुद्धजनों के साथ मनाया गया। धर्मगुरु बाल योगी उमेशनाथ महाराज व डॉ. अवेधशपुरी महाराज ने आशीर्वाद प्रदान किया वहीं प्रबुद्धजनों ने पत्रिका की निश्पक्षता की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर पत्रिका परिवार ने केक काटकर सभी के साथ खुशियां बांटी। बाद में स्थापना दिवस को शहर विकास के लिए समर्पित करते हुए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी पर मंथन किया गया। इसमें सभी ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। आमंत्रित प्रबुद्धजनों का यही कहना था कि स्मार्ट सिटी की परिकल्पना सिर्फ सड़क, पुल-पुलिया या उंची इमारतें बना देना ही नहीं है, बल्कि जन सेवा, सुविधा और जीवनशैली को स्मार्ट बनाना है। उन्होंने इसके लिए शासन-प्रशासन के प्रयासों में गति लाने के साथ जनभागीदारी को भी आवश्यक बताया।

किसने क्या कहा

दिल धड़कने की जरूरत है
जब जन का विकास के लिए धड़केगा हार्ट... तब जाकर उज्जैन होगा स्मार्ट। जिस तरह हम अपनी बाहरी स्वरू को सुंदर बनाने का प्रयास करते हैं, शहर को स्मार्ट बनाने के लिए हृदय को तैयार करना होगा। शासन-प्रशासन के नुमाइंदों का प्रयास पर्याप्त नहीं है, हमें भी जागृत होना पड़ेगा।
- शैलेंद्र व्यास (स्वामी मुस्कुराके), सामाजिक कार्यकर्ता

हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा

सरकार जो योजनाएं ला रही हैं वह तभी सफल होगी जब हमारी उसमें भागीदारी रहेगी। हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा। मीडिया की ईमानदारी पर यह निर्भर होता है कि शहर किस गति से विकास करेगा। सामाजिक स्तर पर बदलाव का असर राजनीतिक स्तर पर बदलाव से अधिक होता है। स्मार्ट सिटी के लिए यही प्रयास जरूरी है। - सुरेंद्रसिंह अरोरा, अध्यक्ष फ्रीगंज गुरुद्वारा कमेटी

परिवर्तन जनता को लाना होगा
सरकार योजनाएं बनाकर कर विकास करती है लेकिन परिवर्तन के लिए जनता को ही आगे आना होगा। महाकाल मंदिर क्षेत्र में ही ऐसी कई समस्याएं हैं जो हमारी भागीदारी से ही दूर हो सकती हैं। पर्यटक-श्रद्धालु शहर से अच्छा अनुभव लेकर जाएं, यह भी स्मार्ट सिटी का ही हिस्सा है।
- जगदीश शुक्ला, महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति सदस्य

सफाई का सिस्टम और बेहतर हो

उज्जैन की पहचान महाकाल और अन्य प्रमुश तीर्थ स्थलों से हैं। अब भी धार्मिक स्थलों के आसपास सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। त्रिवेणी के स्टॉपडेम की ऊंचाई बढ़ाई जाए जिससे पानी स्टोरेज बढ़े। मंगलनाथ, दत्त अखाड़ा आदि प्रमुख मार्ग पर सघन पौधारोपण हो।

- सुरेंद्र चतुर्वेदी, अध्यक्ष सर्व ब्राह्मण समाज

फंड की उचित व्यवस्था हो

स्मार्ट सिटी के अंतर्गत आधारभुत सुविधाओं का विकास होना चाहिए। साथ ही आवश्यक धन व्यवस्था होना चाहिए ताकि फंड की कमी में प्रोजेक्ट प्रभावित न हों। सिवरेज सिस्टम, चौराहों पर संकेतक, शिप्रा शुद्धिकरण को प्राथमिकता पर लेने की आवश्यकता है। विकास के मुद्दे पर राजनेता एक साथ खड़े रहें।

- व्हायसी गील, समन्वयक मप्र पेंशनर्स एसोसिएशन

जन भागीदारी की कमी से हम पीछड़े
धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में शहर का काफी विकास हो सकता है। स्मार्ट सिटी योजना में अमल और क्रियान्वयन के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। जनभागीदारी शामिल नहीं करने से हम थोड़ा पीछड़े हैं २०४० का विजन तैयार हो। हवाई पट्टी, गदा पुलिया विकास, आल इंडिया का धार्मिक पैकज तैयार करना चाहिए।
- महेंद्र गादिया, समाज सेवी

अतिक्रमण हटना जरूरी

पहला सवाल हमें अपने आप से पूछना होगा कि स्मार्ट सिटी के लिए हम क्या योगदान दे रहे हैं। सभी के सामुहिक प्रयास से शहर स्मार्ट बनेगा। इसके साथ ही अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है। जब तक यह समस्या रहेगी, शहर स्मार्ट नहीं बन सकेगा।

- संजय सक्सेना, अध्यक्ष ह्ययूमन वेलफेयर सोसायटी

स्मार्ट इंजीनियर की आवश्यकता
शहर में आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी है। प्रमुख स्थानों पर ही सुविधाघर नहीं मिलते हैं। स्मार्ट सिटी के लिए ऐसी आवश्यक जरूरतों की पूर्ति पहले होना चाहिए। सेवरखेड़ी बांध का निर्माण हो। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए स्मार्ट इंजीनियर उपलब्ध हों।
- जगदीश पांचाल, अध्यक्ष पांचाल समाज

एजुकेशन हब बने

उज्जैन में गुरु सांदीपनी आश्रम है जहां शिक्षा लेने के लिए श्रीकृष्ण आए थे। शहर को शैक्षणिक क्षेत्र में जितना आगे ले जाया जा सकता था, नहीं ले जा पाए हैं। स्मार्ट सिटी में इस ओर फोकस कर एजुकेशन हब विकसित किया जाए। साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर स्थापित किया जाए।

- कुतुब फातेमी, बोहरा समाज प्रतिनिधि

वृहद स्तर पर चर्चा की आवश्यकता
शहर पहले से ही विश्व विख्यात है। स्मार्ट सिटी में जरूरत जनजागरण की है। इस विषय पर वृहद स्तर पर चर्चा होना चाहिए ताकि शहरवासियों की भागीदारी बढ़े और हमारा शहर सही मायनों में स्मार्ट बने। शिप्रा शुद्धिकरण के लिए समानांतर एक और खान डायवर्शन हो।
- केसरसिंह पटेल, अध्यक्ष जिला किसान मोर्चा

सभी अपने कार्य को पूजा माने

हर व्यक्ति अपने कार्य को पूजा बनाले तो शहर को स्मार्ट सिटी बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। दूसरों को बालने की जगह, हम कितना योगदान देते हैं, यह महत्वपूर्ण है। नैतिक शिक्षा और व्यवहारिक ज्ञान की आवश्यकता है।

- राजेंद्र गुरु, संत सत्कार समिति

विकास कार्य की प्राथमिकता तय हो
सिवरेज सिस्टम शहर की प्राथमिक आवश्यकता है। लेकिन हम देखते हैं कि इसकी जगह दूसरी योजना मंजूर हो जाती है। स्मार्ट सिटी में होने वाले विकास योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए। जलापूर्ति के लिए सेवरखेड़ी बांध या स्टॉप डेम की क्षमता बढ़ाई जाए। सुव्यवस्थित पौधारोपण हो।
- जयप्रकाश जुनवाल, सदस्य डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन जनरल बॉडी

अवधारणा समझने की आवश्यकता

स्मार्ट सिटी की अवधारणा सिर्फ पुल-पुलिया या बड़ी इमारतों का निर्माण ही नहीं है। स्मार्ट नगरवासियों से शहर स्मार्ट बनेगा। इसलिए हम सभी को स्मार्ट बनने की आवश्यकता है। सरकार अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए, जनता के व्यवहार में सुधार किया जाए।

- कुलदीप धारिया, प्रांतीय महामंत्री वैश्य महासम्मेलन

उज्जैन में हो धार्मिक समिट
अवंतिका नगरी सात पूरी में से एक है। इसका महत्व समझना होगा। जनता में इस बात का बिज रोपना होगा कि यह हमारा शहर है। जिस प्रकार सरकार उद्योगों के लिए इंदौर में ग्लोबल समिट करती है, उज्जैन में धार्मिक समिट हो। इसमें दानदाताओं को आमंत्रित कर शहर के धार्मिक महत्व की जानकारी दी जाए।
- प्रदीप गुरु, सदस्य महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति सदस्य

शहर विकास के लिए पूरा जीवन भी कम

हमारा शहर इतना विशिष्ट है कि इसके विकास के लिए हम पूरा जीवन भी समर्पित करेंं तो कम है। स्मार्ट सिटी के रूप में एक बेहतर अवसर शहर को मिला है। शासन-प्रशासन के साथ शहरवासियों को भी इस अवसर का पूरा लाभ लेना चाहिए।

- धर्मेंद्र चतुर्वेदी, पुजारी, कालभैरव मंदिर

स्मार्ट सिटी के लिए स्थायी अधिकारी हो

हम स्मार्ट सिटी पर चर्चा कर रहे हैं लेकिन यह विडंबना ही है कि शहर में गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। हमें छोटे-छोटे बिंदुओं पर सोचना होगा। छोटे-छोटे सुधार ही स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को पूरा करेंगे। इसके लिए आदत में बदलाव लाने की आवश्कयता है। सभी भागीदारी, जनता के सुझाव को महत्व देकर उन्हें शहर विकास से जोडऩा होगा। बाबा महाकाल भी जनता का हाल जानने के लिए निकलते हैं तो फिर जनप्रतिनिधि क्यों, जनता की समस्या जानने नहीं निकलते। जन समस्या का दूर होना ही स्मार्ट सिटी की पहचान है। शासन स्तर पर स्मार्ट सिटी के लिए आईएएस रेंक का स्थायी अधिकारी नियुक्त किया जाए।

- बाल योगी उमेशनाथ महाराज, संस्थापक वालमीकि धाम

अध्यात्मीक दृष्टि से विकास हो
स्मार्टनेस क्या है, पहले यह परिभाषित होना जरूरी है। सिर्फ भौतिक विकास ही पर्याप्त नहीं है। आध्यात्मिक, धार्मिक व पौराणिक दृष्टि से भी विकास की आवश्यकता है। एक ही व्यक्ति को सभी जिम्मेदारी सौंप दी गई है, इससे स्मार्ट सिटी नहीं बन पाएगी। इसके लिए बुद्धिजिवियों को भी जोड़ा जाए। आज शहर के ज्वलंत सवाल है, पीले पानी को अधिकारी कैसे पीने योग्य बता सकते हैं, खान डायवर्शन के बाद भी शिप्रा में गंदा पानी मिल रहा है, सप्त सरोवरह क्यों नहीं सुधारे जा रहे, क्यों विश्वस्तरीय गुरुकुल स्थापित नहीं हो सका। हम अपनी समस्या बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।स्मार्ट सिटी में शिप्रा को स्मार्ट बनाना होगा, सप्त सरोवरों का विकास करना होगा, व्यक्तित्व को स्मार्ट बनाना होगा। सप्त सरोवर की देखरेख होना चाहिए।
- डॉ. अवधेशपुरी महाराज, महामंत्री अखाड़ा परिषद उज्जैन

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