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महाकाल की तर्ज पर निकलती है माता पार्वती की पालकी, पांच दिन चलता है उत्सव…देखें फोटो

महाकाल मंदिर में लोक संस्कृति का पर्व उमा-सांझी उत्सव शुक्रवार से आरंभ हो गया है। पांच दिनों तक यहां धार्मिक और मालवा के लोक संस्कृति के रंग बिखरेंगे।

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उज्जैन. महाकाल मंदिर में लोक संस्कृति का पर्व उमा-सांझी उत्सव शुक्रवार से आरंभ हो गया है। पांच दिनों तक यहां धार्मिक और मालवा के लोक संस्कृति के रंग बिखरेंगे। बाबा महाकाल की तर्ज पर ही 10 अक्टूबर को माता पार्वती की पालकी यात्रा भी निकाली जाएगी। सभा मंडप में पुजारी प्रतिदिन रंगोली के रंग से सांझी का निर्माण करेंगे। मंदिर में पांच दिन बालकृष्ण नाथ ढोलीबुआ महाराज ग्वालियर वाले की कथा का नारदीय कीर्तन होगा।

उमा-सांझी पर्व : पार्वती का आकर्षक शृंगार
उमा-सांझी पर्व की शुरुआत मौके पर माता पार्वती की प्रतिमा का आकर्षक शृंगार किया गया। सुबह 9 बजे घट स्थापना के साथ पांच दिवसीय उमा-सांझी पर्व आरंभ हुआ। सोलह श्राद्ध के दिनों में प्रतिवर्ष महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा यह आयोजन किया जाता है। प्रशासक अभिषेक दुवे ने बताया महाकाल मंदिर में अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी से अमावस्या पर्यंत मंदिर में उमा सांझी उत्सव मनाए जाने की परंपरा है।

रंगोली से सजाया उमा-महल
मंदिर के सभामंडप में आकर्षक रंगोली द्वारा उमा-महल बनाया गया। रात्रि को पुजारियों द्वारा उमा माता की वसंत पूजा की गई। प्रतिदिन रंगोली से सांझी सजेगी तथा विभिन्न झांकियों का निर्माण किया जाएगा। 9 अक्टूबर को रात 10 से तड़के 3 बजे तक भजनों के साथ रात्रि जागरण होगा। महोत्सव में 6 अक्टूबर को शाम 7.30 से गायिका स्वाति उखले के संझा गीतों की रस वर्षा और संतोष देसाई के कथक नृत्य की प्रस्तुति होगी।

बाबा महाकाल ने किया नौका विहार
उमा-सांझी महोत्सव के तहत शुक्रवार रात महाकाल मंदिर स्थित कोटितीर्थ कुंड के जल में बाबा महाकाल ने नौका विहार किया। इस दृश्य को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

शेषनाग के बीच विराजीं मां पार्वती
महाकाल मंदिर के सभा मंडप में खूबसूरत झांकी सजाई गई। शेषनाग के बीच माता पार्वती को विराजित किया गया। महोत्सव के दौरान विभिन्न विषयों पर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। 8 अक्टूबर को महाकाल प्रवचन हॉल में दोपहर 3 बजे से रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। 9 अक्टूबर को दोपहर 2 से 4 बजे तक चित्रकला प्रतियोगिता दो आयु वर्ग में आयोजित की जाएगी। इसमें एक कनिष्ठ वर्ग आयु 6 वर्ष से 14 वर्ष तक और दूसरा वरिष्ठ वर्ग आयु 15 से 18 वर्ष तक का होगा। चित्रकला के लिए कनिष्ठ वर्ग का विषय प्रकृति और वरिष्ठ वर्ग के लिए ज्योतिर्लिंग रहेगा। इसी दिन 3 से 5 बजे तक श्लोक पाठ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

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